महाराष्ट्र में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाले फीस रिइम्बर्समेंट में देरी का मामला विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजा. राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने गुरुवार को विधान परिषद में स्वीकार किया कि करीब 3,000 करोड़ रुपये के बकाया का दावा "आंशिक रूप से सही" है.
शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य अनिल परब ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा था कि राज्य के 8,000 से अधिक निजी स्कूल RTE के तहत दाखिला लेने वाले छात्रों की फीस रिइम्बर्समेंट के लगभग 3,000 करोड़ रुपये मिलने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी से स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
इस पर लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि सरकार को विभिन्न स्कूल प्रबंधन और संगठनों से RTE के तहत दाखिल छात्रों की शैक्षणिक खर्च प्रतिपूर्ति में देरी की शिकायतें मिली हैं. उन्होंने माना कि दावा आंशिक रूप से सही है.
हालांकि, मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2025-26 के बीच पात्र निजी स्कूलों को 2,027.30 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति जारी की है. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अभी कुल कितनी राशि लंबित है.
दादा भुसे ने बताया कि 12 फरवरी 2026 को जारी सरकारी प्रस्ताव के जरिए RTE योजना के तहत शैक्षणिक खर्च की प्रतिपूर्ति की दर तय की गई थी. इसके बाद कई स्कूलों और संगठनों ने सरकार से लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग की है.
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि 'समर्थन' नामक एक संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित भुगतान जल्द नहीं किया गया तो अगले शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूल RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया को सख्त बना सकते हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के प्रवेश पर असर पड़ सकता है.
सरकार ने बताया कि लंबित प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए वित्त विभाग से अतिरिक्त धनराशि की मांग संबंधी प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं. इसके जरिए बकाया राशि का भुगतान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
हालांकि, शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने इस आरोप को खारिज किया कि सरकार की ओर से जानबूझकर कोई अनावश्यक देरी की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार लंबित भुगतान के समाधान के लिए आवश्यक वित्तीय प्रक्रिया पूरी कर रही है.