
पुणे के केतन हत्याकांड में जैसे-जैसे जांच बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं. इसी बीच एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. केतन के पिता ने बताया कि 19 जून को सिया जन्मदिन मनाने की जिद करके 18 जून को लोहगढ़ किले पर लेकर गई थी. सुबह 8:20 बजे वे वहां के लिए निकले थे. करीब 10:45 बजे सिया की मां का फोन आया कि केतन लोहगढ़ किले से घाटी में गिर गया है. जिसके बाद हम तुरंत वहां पहुंचे, लेकिन तब तक केतन की मौत हो चुकी थी.
हमें यह घटना दुर्घटना नहीं लगी, बल्कि शुरू से ही साजिश और हत्या का संदेह था. जब केतन का शव लाया गया, तब सिया के चेहरे पर कोई दुख या शोक दिखाई नहीं दे रहा था. उसकी प्रतिक्रिया भी सामान्य नहीं थी, जिससे हमारा शक और गहरा हो गया. 14 जून को भी सिया और केतन लोहगढ़ किले पर गए थे. उस समय वे दोनों ही वहां मौजूद थे. उसी दौरान सिया ने केतन को धक्का दिया था. धक्का लगने के बाद केतन पीछे की ओर सरक गया, लेकिन उसका हाथ झाड़ियों में फंस गया और उसकी जान बच गई.

केतन को समझ में आ गया था कि उसे धक्का दिया गया है. इसके बाद सिया ने "सांप आया, सांप आया" चिल्लाते हुए उसे गले लगा लिया और यह दिखाने की कोशिश की कि उसने बचाने के कारण धक्का दिया था. केतन के पिता विशाल अग्रवाल का आरोप है कि उसी दिन केतन की हत्या का पहला प्रयास किया गया था.
चाचा ने की फांसी की मांग
केतन के चाचा ने आरोपी सिया और चेतन चौधरी को फांसी की सजा देने की मांग की है. परिजनों के अनुसार सिया इससे पहले भी केतन को दो से तीन बार लोहगढ़ लेकर गई थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि सिया और केतन के संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे. इसके बावजूद सिया लगातार केतन पर लोहगढ़ चलने का दबाव बना रही थी और उसे वहां जाने के लिए बार-बार कह रही थी.
परिवार ने बताया कि केतन और उसकी होने वाली पत्नी का 11, सिया को देखने का समारोह हुआ और 19 फरवरी को रोका हुआ था और दोनों की शादी 25 नवंबर को होने वाली थी. शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है. वहीं, केतन के परिजन आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई और फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं. ये सब बताते हुए केतन के चाचा विजय अग्रवाल आंसू नहीं रोक पाए.