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उद्धव के 6 सांसदों के पाला बदलने से शिंदे कैसे बने महाराष्ट्र के 'बॉस'? समझें बड़े सियासी मायने

शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों की बगावत से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है. इस घटनाक्रम से एकनाथ शिंदे की राजनीतिक ताकत और एनडीए में उनकी अहमियत बढ़ी है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट लोकसभा में महज तीन सांसदों तक सिमट गया है. इससे महाविकास अघाड़ी को भी झटका लगा है और राज्य की राजनीति में शिंदे की सौदेबाजी की क्षमता पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है.

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इस राजनीतिक घटनाक्रम का पहला बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ा है. (File Photo- PTI)
इस राजनीतिक घटनाक्रम का पहला बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ा है. (File Photo- PTI)

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के एक साथ बगावत कर एकनाथ शिंदे गुट का दामन थामने से राज्य की सियासी तस्वीर बदल गई है. इस घटनाक्रम से जहां उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है, वहीं उद्धव ठाकरे गुट को करारा झटका लगा है.

इस राजनीतिक घटनाक्रम का पहला बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ा है. छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से लोकसभा में उनकी पार्टी की संख्या बढ़ गई है. इससे एनडीए के भीतर शिंदे का कद और प्रभाव मजबूत होगा. साथ ही केंद्र सरकार की सहयोगी दलों, खासकर टीडीपी और जेडीयू जैसे दलों पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है.

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर शिंदे गुट का यह बढ़ता ग्राफ केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी राहत है. सांसदों की संख्या बढ़ने से अब मोदी सरकार की चंद्रबाबू नायडू (TDP) और नीतीश कुमार (JDU) जैसे अन्य राष्ट्रीय सहयोगियों पर बेहद क्रिटिकल (अति-आवश्यक) निर्भरता थोड़ी कम होगी, जिससे एनडीए में शिंदे एक मजबूत संकटमोचक बनकर उभरे हैं.

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उद्धव ठाकरे और 'MVA' गठबंधन को करारा झटका

दूसरी ओर, इस बगावत ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. छह सांसदों के जाने के बाद लोकसभा में पार्टी के पास केवल तीन सांसद ही बचे हैं. इससे न केवल उद्धव ठाकरे की राजनीतिक पकड़ कमजोर होगी, बल्कि विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) की ताकत पर भी असर पड़ेगा.

इस घटनाक्रम का तीसरा बड़ा असर महाराष्ट्र की सत्ता की राजनीति पर देखने को मिल सकता है. लोकसभा में संख्या बढ़ने के बाद एकनाथ शिंदे की भाजपा के भीतर भी राजनीतिक सौदेबाजी की क्षमता बढ़ेगी. इससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुकाबले शिंदे का दावा और मजबूत माना जा रहा है. राजनीतिक हलकों में इसे शिंदे की उस महत्वाकांक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें वह भविष्य में फिर से मुख्यमंत्री बनने की कोशिश कर सकते हैं.

चौथा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाल के दिनों में देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों की अटकलों पर भी इस घटनाक्रम से विराम लग सकता है. शिंदे की बढ़ी हुई ताकत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ भविष्य में किसी संभावित समझौते की संभावना और कमजोर होती दिखाई दे रही है.

शिंदे गुट को मिलेंगे बड़े 'इनाम'

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सफल राजनीतिक रणनीति का लाभ शिंदे गुट को आने वाले समय में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर मिल सकता है. अगले केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में शिंदे गुट को एक महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार में भी शिंदे गुट को अधिक प्रभावशाली विभाग मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

कुल मिलाकर, शिवसेना (UBT) के छह सांसदों की बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन बदल दिया है. इससे एकनाथ शिंदे की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है, जबकि उद्धव ठाकरे के सामने संगठन और राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

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