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बीमार महिला को डोली-खटोली पर उठाकर ले गए परिजन, गांव तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस

झारखंड के गढ़वा में बदहाल सड़क व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है. भवनाथपुर के ढेकुलिया टोला में बीमार 64 वर्षीय महिला को इलाज के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए परिजनों ने करीब एक किलोमीटर तक डोली-खटोली पर उठाकर सफर किया. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से मरीजों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ती है.

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सड़क नहीं होने से मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी.(Photo: Screengrab)
सड़क नहीं होने से मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी.(Photo: Screengrab)

झारखंड के गढ़वा में स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ सड़क सुविधा की बदहाल तस्वीर सामने आई है. भवनाथपुर प्रखंड के मकरी पंचायत के ढेकुलिया टोला में सड़क नहीं होने के कारण बीमार महिला को डोली-खटोली के सहारे करीब एक किलोमीटर तक उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा. इसके बाद वाहन की मदद से उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया.

मकरी पंचायत के ढेकुलिया टोला में करीब 600 लोगों की आबादी है. ग्रामीणों के मुताबिक, वे वर्षों से खराब सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं. इसी टोला में रहने वाले इकबाल मियां की 64 वर्षीय पत्नी धनपतिया बीबी की अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजन उन्हें इलाज के लिए गढ़वा ले जाना चाहते थे, लेकिन सड़क की स्थिति ऐसी थी कि एंबुलेंस या कोई दूसरा वाहन टोला तक नहीं पहुंच सका.

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इसके बाद परिजनों के सामने महिला को डोली-खटोली पर ले जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा. धनपतिया बीबी को खटोली पर लिटाया गया और परिजन उन्हें करीब एक किलोमीटर तक पैदल उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे. वहां वाहन मिलने के बाद महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया.

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सड़क नहीं होने से मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि ढेकुलिया टोला तक सड़क सुविधा नहीं होने से उन्हें आए दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को होती है. आपात स्थिति में एंबुलेंस के टोला तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है.

ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की जा चुकी है. ग्रामीणों ने सड़क बनवाने की मांग लगातार उठाई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई. उनका कहना है कि आवागमन का रास्ता बेहतर होने से इलाज समेत रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आने-जाने में राहत मिलेगी.

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ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के लिए इस तरह डोली-खटोली के सहारे मुख्य सड़क तक नहीं ले जाना पड़े, इसके लिए स्थायी समाधान जरूरी है.

सिविल सर्जन ने एंबुलेंस सेवा पर क्या कहा?

इस मामले में गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. कनेडी ने कहा कि जहां तक रास्ता उपलब्ध होता है, वहां तक एंबुलेंस पहुंचती है. उन्होंने कहा कि अगर किसी स्थान पर एंबुलेंस का जाना संभव नहीं है, तो वहां पहुंचना संभव नहीं होता. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे रास्तों पर भी अक्सर एंबुलेंस सेवा पहुंचती है.

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फिलहाल, ढेकुलिया टोला की घटना ने गांव तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच के साथ-साथ सड़क कनेक्टिविटी पर भी सवाल खड़े किए हैं. करीब 600 की आबादी वाले इस टोले के लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण का काम जल्द शुरू कराया जाए, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके.

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