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चमत्कार! डॉक्टरों ने देसी जुगाड़ से नवजात को किया जिंदा

झारखंड के जमशेदपुर में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों ने जुगाड़ की तकनीक से कमाल कर दिया है. डॉ. मनीष कुमार भारती और डॉ रविकांत ने एक नवजात बच्चे को बचाने के लिए महज 100 रुपए खर्च पर एक उपकरण बनाया, जिससे बच्चे की जान बचाई जा सकी. उस अस्पताल में मैकेनिकल वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध नहीं थी. 

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अस्पताल में भर्ती नवजात
अस्पताल में भर्ती नवजात

झारखंड के जमशेदपुर में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल के दो जूनियर डॉक्टरों ने जुगाड़ की तकनीक से कमाल कर दिया है. डॉ. मनीष कुमार भारती और डॉ रविकांत ने एक नवजात बच्चे को बचाने के लिए महज 100 रुपए खर्च पर एक उपकरण बनाया, जिससे बच्चे की जान बचाई जा सकी. उस अस्पताल में मैकेनिकल वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध नहीं थी.  

जानकारी के मुताबिक, बालीगुमा बागान की रहने वाली अंबिका राय ने बुधवार को एक बच्चे को जन्म दिया. प्रसव के पूर्व ही गर्भ में , जो श्वास नली के जरिए फेफड़े में चला गया. उसने सांस लेना बंद कर दिया. उसकी हालत देख डॉक्टर घबरा गए. ऐमें इलाज के लिए मैकेनिकल वेंटिलेटर मशीन की जरूरत थी, जो अस्पताल में नहीं था.

डॉक्टरों ने परिजनों को बच्चे को बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी. आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से मां-बाप ने जाने में असमर्थता जताई. इसके बाद डॉ. मनीष और डॉ. रविकांत ने सी-पैप मशीन तैयार की. इससे बच्चे की जान बचा ली गई.

डॉ. रविकांत के मुताबिक, सी-पैप मशीन तैयार करने के लिए दो चीजें इस्तेमाल की गईं. 60 रुपए की पीडिया ड्रिप और 30 रुपए की थ्री-वे कैनूला. . कैनूला के एक सिरे से ऑक्सीजन दी और दूसरे सिरे को ड्रिप से जोड़ा. तीसरे सिरे को बच्चे की नाक से जोड़कर आक्सीजन दी गई. बच्चे ने सांस ली और हवा छोड़ी.

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