जम्मू कश्मीर में पिछले महीने हुए पॉलिटिकल ड्रामे का अहम हिस्सा रही राजभवन की फैक्स मशीन रविवार को दोबारा चर्चा में आ गई, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला इसी मशीन से गवर्नर मलिक को पत्र भेजने की कोशिश में थे, लेकिन वह नाकाम रहे.
पूर्व सीएम ने कहा कि उन्होंने इसी मशीन से गवर्नर मलिक को पत्र भेजने की कोशिश की, लेकिन अब तक मशीन काम नहीं कर रही है.
दरअसल, उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के लिए उठाए जाने वाले किसी भी कदम को लेकर गवर्नर सत्यपाल मलिक को फैक्स के जरिये पत्र भेजने की कोशिश कर रहे थे.
I’m trying to fax a letter to but the fax machine still isn’t working. The operator who answered the phone says the fax operator is on holiday as it’s a Sunday. Will attempt again tomorrow in the mean time am forced to put the letter out through social media.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah)
उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के लिए उठाए जाने वाले किसी भी कदम का विरोध करेगी.
उमर अब्दुल्ला ने गवर्नर सत्यपाल मलिक को लिखे पत्र में कहा, ‘हम ऐसे समय आपको पत्र लिखने के लिए बाध्य हैं जब आप स्थायी निवासी प्रमाणपत्र नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं. हमारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस का मानना है कि यह राज्य की जनसांख्यिकी बिगाड़ने की एक कोशिश है और यह जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के लिए हानिकारक है.'
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसएसी राज्य में संस्थानों के कामकाज और प्रक्रियाओं में एकतरफा तौर पर बदलाव ला रहा है. यह लोकतंत्र और भागीदारी शासन की भावना और सिद्धांत के खिलाफ है.
उन्होंने कहा, 'खबरों में कहा गया है कि ये प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश पहले ही जारी कर दिये गए हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में किसी भी राजनीतिक पार्टी या अन्य हितधारक के साथ कोई व्यापक मशविरा नहीं किया गया.'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'इससे संवेदनशील जम्मू-कश्मीर में शांति भंग हो सकती है. विधानसभा भंग है और चुनाव अगले कुछ महीनों में होने वाले हैं. इससे आपके प्रशासन के कदम पर सवाल उठाए जा सकते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि सरकार की भूमिका की प्रकृति एक कार्यवाहक सरकार की ज्यादा है.'
अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि आप इस बारे में अपने फैसले को वापस लेंगे. हम इस कदम पर अपनी नाखुशी दर्ज कराना चाहते हैं और इसका विरोध करने के लिए सर्वसम्मति से किए गए फैसले से अवगत कराना चाहते हैं.’
बता दें कि इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कवींद्र गुप्ता ने कहा था कि राज्य प्रशासन पीआरसी प्रदान करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उसे जारी करने के लिए एक समयसीमा तय की जानी चाहिए.
क्या था फैक्स मशीन मामला
दरअसल 21 नवंबर को पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन से सरकार बनाने संबंधी पत्र को पूर्व मुख्यमंत्री ने राजभवन को फैक्स से भेजने की कोशिश की थी. लेकिन 2 घंटे की कोशिश के बाद भी कामयाब नहीं हो पाईं.
इसके बाद उन्होंने अपनी चिट्ठी पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट की और फिर राजभवन को ई-मेल के जरिए पत्र भेजा. इस बीच मलिक ने विधानसभा भंग कर दी. इसी के साथ एक फैक्स के अटक जाने से घाटी में सरकार बनाने की संभावना भी खत्म हो गई थी.