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राहुल झारिया

राहुल झारिया

Senior Assistant Editor , TVTN

rahul.jharia@aajtak.com

aajtak.in में बतौर सीनि‍यर असिस्टेंट एड‍िटर राहुल झार‍िया वीड‍ियो सेक्शन की कमान संभाल रहे हैं. यहां खाल‍िस खबरों को धार देने का काम करने के बाद अब सात साल से ट्रेंडिंग न्यूज वीडियोज को डिज‍िटल के दर्शकों तक ड‍िज‍िटल माध्यम से पहुंचाना इनकी जिम्मेदारी है, वो भी सबसे तेज. कर‍ियर के 17 साल के अनुभव, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और हर खबर को सच की कसौटी पर खरा उतारने के काम को बखूबी अंजाम देने के ल‍िए जाने जाते हैं.    

2008 में प्रिंट मीड‍िया से अपने कर‍ियर का आगाज करने वाले राहुल झार‍िया ने सबसे पहले "नई दुन‍िया" को पत्रकार‍िता को अपनी पाठशाला बनाया. इसके बाद कुछ वक्त "राज एक्सप्रेस" और फ‍िर "दैनिक भास्कर" में हाइपर लोकल डेस्क में पत्रकार‍िता के गुर सीखते हुए जुड़े रहे. लेक‍िन दिमाग में इससे इतर करने की कुलबुलाहट थी, तो कुछ समय तक एडवरटाइज‍िंग कंपनी में काम करके अपने ज‍िंगल्स ल‍िखने के हुनर को न‍िखारा. टीवी पत्रकारिता को लेकर अपने कौतूहल को दूर करने के लिए कुछेक टीवी चैनल्स के साथ जुड़े,तो मैदान में उतरकर र‍िपोर्ट‍िंग करने चस्का भी पूरा क‍िया. साथ ही चैनल में  न्यूज रीडिंग में भी हाथ आजमाया. इसके बाद देश के नामी बुक्स पब्ल‍िकेशन हाउस से भी संबद्ध रहे और अनग‍िनत किताबों का अनुवाद और संपादन क‍िया. लेक‍िन बदलती दुन‍िया के मद्देनजर ये सफर अब नए पड़ाव की ओर था, तो 2015 में "दैन‍िक भास्कर डॉट कॉम" के जर‍िये ड‍िज‍िटल न्यूज इनका नया ठ‍िकाना बना. जहां इन्हें नए ऐप के लॉन्च‍िंग से जुड़ने का मौका म‍िला. 2018 में aajtak.in के हुए तो यहीं के होकर रह गए. 

राहुल भेड़ाघाट के ल‍िए मशहूर और तपस्वी ऋष‍ि जाबाल‍ि की धरती यानी संस्कारधानी जबलपुर से हैं. गृहनगर से ही कंप्यूटर ग्रैजुएशन करने के बाद इंदौर की "देवी अह‍िल्या यून‍िवर्सिटी" से मीड‍िया मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रैजुएशन यानी एमबीए क‍िया. फि‍र भोपाल की "माखनलाल यून‍िवर्स‍िटी" में मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की ड‍िग्री भी हासिल की. हालात चाहे गवारा करते या न करते, लेक‍िन पढ़ने-ल‍िखने, खुद को लगातार न‍िखारने और जमाने के साथ अपडेट रहने की ललक के चलते ढेरों ड‍िप्लोमा और सर्ट‍िफ‍िकेट कोर्सेस करते हुए अपने झोले में ज्यादा-से-ज्यादा अकादम‍िक कागजात समेटने के शौक को भी पूरा करते रहे.     

राहुल कई महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख, वृत्तांत, कविताएं, कहानियां और खासकर नाटक लिखते रहे हैं. साथ ही भारत के गौरवशाली उपलब्धि पर आधारित क‍िताब 'म‍िशन मंगल' का लेखन भी कर चुके हैं. उनकी बनाई शॉर्ट फ़िल्म 'अच्युत न्याय' अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में नॉमिनेट की जा चुकी है. काम की मशगूल‍ियत से वक्त चुराकर वे अक्सर लुट‍ियंस द‍िल्ली समेत नोएडा-एनसीआर में कव‍िता पाठ करते नज़र आ जाते हैं. इतना ही नहीं, कई प्रत‍िष्ठ‍ित संस्थानों द्वारा उन्हें ढेरों पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत क‍िया जा चुका है, ज‍िनकी फेहर‍िस्त काफी लंबी है.

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