जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी नाराजगी बढ़ती जा रही है. पार्टी के 19 विधायकों ने एक बैठक में प्रस्ताव पास कर नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखी हैं. वे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव चाहते हैं. उनकी मांग है कि मंत्रियों की जिम्मेदारी दोबारा तय की जाए. इसके साथ ही वे उमर अब्दुल्ला के दो करीबी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियों से हटाने की मांग कर रहे हैं.
नाराज विधायकों का कहना है कि सरकार और पार्टी में फैसले लेने का तरीका बदला जाना चाहिए. वे चाहते हैं कि मंत्रिमंडल में जगह केवल योग्यता के आधार पर मिले. जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों को सही प्रतिनिधित्व भी दिया जाए.
दो साल पूरे कर चुके मंत्रियों को हटाने की मांग
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने प्रस्ताव में मांग की है कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो साल हो चुके हैं, उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए. उनकी जगह नए विधायकों को मौका दिया जाए. विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में जिम्मेदारियां बांटते समय योग्यता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
उनकी नाराजगी हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी है. दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए विस्तार में अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ कालू को मंत्री बनाया गया था. इसके बाद कुछ वरिष्ठ विधायक खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं.
उमर के दो करीबियों को हटाने की भी मांग
विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दो करीबी नेताओं नासिर असलम वानी और सांसद शम्मी ओबेरॉय को हटाने की मांग भी रखी है. उनका आरोप है कि ये दोनों पार्टी के कामकाज और प्रशासनिक फैसलों में जरूरत से ज्यादा दखल देते हैं. नाराज विधायक चाहते हैं कि पार्टी और सरकार के फैसलों में विधायकों की भूमिका बढ़ाई जाए.
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार शाम श्रीनगर में विधायक कैसर जमशेद लोन के घर करीब चार घंटे तक बैठक हुई. इसमें जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों के 19 विधायक शामिल हुए. बैठक में नाराजगी से जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसे पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को सौंपने की तैयारी है.
इस बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल भी शामिल हुए थे. उन्हें हाल ही में पार्टी का महासचिव बनाया गया था. लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि अक्टूबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी का पद लेने से भी इनकार कर दिया था.
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि नाराज विधायक मंत्रिमंडल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहते हैं. वे पार्टी के फैसलों में अपनी बात सुने जाने और नेतृत्व के करीबी नेताओं के दखल को सीमित करने की मांग कर रहे हैं. अब देखना होगा कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं.