मंगलवार को जम्मू-कश्मीर कैबिनेट का विस्तार हुआ. उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में मीर सैफुल्लाह, अली मोहम्मद सागर, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री के रूप में शामिल किया गया.
उमर अब्दुल्ला कैबनिट में मंगलवार को चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया है. आइए इनके बारे में जानते हैं-
अली मोहम्मद सागर की बात करें तो वे पूर्व मंत्री हैं और श्रीनगर जिले के खानयार विधानसभा क्षेत्र से 7 बार विधायक चुने गए हैं. उन्होंने 1996 के बाद से सभी विधानसभा चुनाव जीते हैं. उन्हें उमर अब्दुल्ला कैबिनेट में जगह दी गई है. वहीं, शमीमा फिरदौस श्रीनगर जिले के हब्बा कदल विधानसभा क्षेत्र से 3 बार की विधायक हैं. वह नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की महिला विंग की अध्यक्ष भी हैं.
कौन हैं सैफुल्ला मीर?
सैफुल्ला मीर की अगर बात करें तो वे 4 बार के विधायक हैं. वह कुपवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार जीते हैं और वर्तमान में त्रेहगाम से विधायक हैं. वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं. उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. वहीं, अल्ताफ अहमद वानी 'कालू' दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार के विधायक हैं. उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है.
यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता, ब्रिटिश संसद में सांसदों का प्रस्ताव
अली मोहम्मद सागर और शमीमा फिरदौस मध्य कश्मीर के श्रीनगर जिले से आते हैं. सैफुल्ला मीर उत्तरी कश्मीर से हैं, जबकि अल्ताफ अहमद वानी 'कालू' दक्षिणी कश्मीर से हैं. कैबिनेट में फेरबदल के बाद अब उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी मंत्रिमंडल में एकमात्र हिंदू चेहरा रह गए हैं.
कांग्रेस ने क्यों बनाई दूरी?
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी. कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, तब तक वे सरकार में शामिल नहीं होंगे.