जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही जोजिला टनल की खुदाई मंगलवार को पूरी हो गई है. केद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्य टनल का आखिरी 2.5 मीटर हिस्सा ब्लास्ट करके ब्रेकथ्रू कर दिया, जिससे सुरंग के दोनों छोर आपस में मिल गए हैं. 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग है. इस टनल से यात्रा बहुत आसान और तेज हो जाएगी.
जोजिला टनल की कुल लागत 6800 करोड़ रुपये है. यह 13.15 किलोमीटर लंबी टनल 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है. यह घोड़े की नाल के आकार की दो लेन वाली टनल है, जो 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है. टनल बाल्टाल (गंदरबल) से शुरू होकर द्रास के मिनीमार्ग तक जाएगी. इसमें 18 किलोमीटर एप्रोच रोड भी शामिल है. पूरा प्रोजेक्ट 31 किलोमीटर लंबा है.
अभी जोजिला पास से लद्दाख जाने में डेढ़ घंटे का समय लगता है, लेकिन टनल बनने के बाद यह सिर्फ 15 मिनट का हो जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि सर्दियों में भारी बर्फबारी और एवलांच की वजह से जोजिला पास कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख पूरी तरह कट जाता है. टनल बन जाने से लद्दाख को साल भर सड़क कनेक्टिविटी मिल जाएगी.
नितिन गडकरी ने कहा कि यह टनल लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए लाइफलाइन है. यहां -4 डिग्री तापमान में काम करने वाले मजदूरों ने बहुत मेहनत की है. 80 प्रतिशत वर्कफोर्स स्थानीय लोगों का है. इस दौरान गडकरी के साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे. ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के लोगों का यह पुराना सपना था. पहले शिक्षा, पर्यटन और इलाज में बहुत दिक्कत होती थी. अब यह टनल लोगों की जिंदगी बदल देगी.
अभी तक प्रोजेक्ट का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. ब्रेकथ्रू 6 महीने पहले हो गया है. टनल फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खोल दी जाएगी. ब्रेकथ्रू के बाद सिविल वर्क में 7-8 महीने और लगेंगे, फिर इलेक्ट्रिकल काम शुरू होगा.
मेगा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) कंपनी इस प्रोजेक्ट को बना रही है. कंपनी ने न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का इस्तेमाल किया है. पिछले 5 साल में यहां 5 बार एवलांच आए लेकिन फिर भी 1 करोड़ सुरक्षित मैन-आवर्स पूरे किए गए.
टनल के पूरा होने से पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा. लद्दाख साल भर पर्यटक आ सकेंगे. द्रास, कारगिल और लेह पहुंचना भी आसान हो जाएगा. होटल, ट्रांसपोर्ट और लोकल बिजनेस को भी बढ़ावा मिलेगा. सर्दियों में भी पर्यटन बना रहेगा. इसके अलावा नागरिकों की आवाजाही, माल ढुलाई और क्षेत्रीय विकास भी तेज होगा. रणनीतिक रूप से भी यह इलाका मजबूत बनेगा क्योंकि सैन्य वाहन भी आसानी से आ-जा सकेंगे.
नितिन गडकरी ने बताया कि शुरुआत में प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 12,000 करोड़ थी, लेकिन इसे 7,000 करोड़ में ही पूरा किया जा रहा है. इस तरह 5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई.
बता दें कि जोजिला टनल न सिर्फ भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची टनलों में भी शामिल होगी. यह हिमालय की कठिन चट्टानों को पार करते हुए इंजीनियरिंग का कमाल दिखा रही है. लद्दाख अब सर्दियों में भी बाकी देश से जुड़ा रहेगा.