गुजरात सरकार में सबकुछ सामान्य था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में विश्व पाटीदार समाज के सरदार धाम का लोकार्पण किया. माहौल खुशनुमा था लेकिन इसके कुछ ही समय बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन मंत्री बीएल संतोष अचानक गांधीनगर पहुंचे और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल और प्रदेश प्रभारी रत्नाकर के साथ बैठक की. बीएल संतोष की बैठक के बाद गुजरात का सियासी परिदृश्य बदलने लगा.
विजय रुपाणी डिप्टी सीएम नितिन पटेल के साथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे तब तक भी मंत्रिमंडल विस्तार के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन जब रुपाणी राज्यपाल से मिलकर लौटे तो हालात बदल चुके थे. विजय रुपाणी ने सीएम पद से इस्तीफे का ऐलान कर सबको चौंका दिया. रुपाणी ने पीएम मोादी और बीजेपी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए साफ किया कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगी, वे उसका निर्वाह करेंगे.
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ऐसे समय में जब गुजरात विधानसभा चुनाव में करीब सवा साल का समय बचा है, सत्ता परिवर्तन को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चा भी शुरू हो गई है. कोई इसे पाटीदार समाज की नाराजगी से जोड़ रहा है तो कोई विजय रुपाणी के लाइमलाइट और प्रचार से दूर रहकर काम करने की आदत के कारण जनता पर कमजोर पकड़ से. कोई पिछले चुनाव में 99 के फेर में फंसी पार्टी की ओर इसबार जनता का मिजाज भांपते हुए उस तरह की परिस्थिति से बचने के लिए उठाया गया कदम बता रहा है.
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रुपाणी की जगह किसी नए हाथ में गुजरात की सत्ता की कमान सौंपने के निर्णय के पीछे असली वजह क्या है ये बीजेपी आलाकमान ही जाने लेकिन इतना तय है कि पार्टी के लिए ऐसे चेहरे का चयन भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं जो पार्टी को चुनाव जिताकर लाए. नया सीएम चुनने के लिए बीजेपी विधायक दल की बैठक 12 सितंबर को होनी है. विधायक दल की बैठक में नए सीएम के नाम पर मुहर लगेगी लेकिन उससे पहले अटकलों का बाजार गर्म है. गुजरात के सीएम पद की रेस में कुछ केंद्रीय मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं.
रुपाणी के बाद सीएम के लिए रेस में ये नाम
मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी के इस्तीफे के बाद सीएम पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं. 2017 के चुनाव के बाद बधाइयां लेते-लेते भी सीएम पद से दूर रह गए रुपाणी के डिप्टी रहे नितिन पटेल का भी रेस में है. इनके अलावा पाटीदार समाज से ही आने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन, डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला के नाम भी शामिल हैं.
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कहा जा रहा है कि लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल भी गुजरात के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं. गोरधन जदाफिया का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए रेस में चल रहा है लेकिन डॉक्टर हर्षवर्धन को हटाकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए मनसुख मंडाविया का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. रुपाणी के इस्तीफे के बाद मंडाविया बीजेपी के दफ्तर भी पहुंचे थे.
पाटीदार समुदाय को साधने की कोशिश में बीजेपी
विजय रुपाणी के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि बीजेपी प्रभावशाली पाटीदार समुदाय को साधने की कोशिश करेगी. मनसुख मंडाविया और रुपाला, दोनों ही पाटीदार समाज से आते हैं. पुरुषोत्तम रुपाला कदवा पाटीदार हैं और मनसुख लेउवा पाटीदार. सीएम पद की रेस में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी सीआर पाटिल का नाम भी शामिल बताया जा रहा था लेकिन पाटिल ने खुद साफ कर दिया है कि वे इस रेस में शामिल नहीं हैं.