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कानपुर किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड फर्जी डॉक्टर रोहित गिरफ्तार, पुलिस ने रखा था 25 हजार का इनाम

कानपुर किडनी स्कैम में 25 हजार के इनामी फर्जी डॉक्टर रोहित की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं. इस मामले की जांच पड़ताल में सामने आया कि फेक डॉक्टर रोहित ही पूरे अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट का मास्टरमाइंड था. पढ़ें शातिर रोहित की गिरफ्तारी की पूरी कहानी.

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फेक डॉ. रोहित पहचान छुपाकर काम करता था (फोटो-ITG)
फेक डॉ. रोहित पहचान छुपाकर काम करता था (फोटो-ITG)

कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट स्कैम में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. इस रैकेट के मास्टरमाइंड और 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी फर्जी डॉक्टर रोहित को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है. उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं, जिससे पूरे रैकेट की गहराई और नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा रहा है. यह मामला अब सिर्फ एक फर्जी ऑपरेशन का नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित अपराध का रूप ले चुका है.

कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट मामले में लंबे समय से फरार चल रहे रोहित को पुलिस ने पकड़ लिया है. शुरुआत में उसे केवल एनेस्थीसिया देने वाला एक सहयोगी माना जा रहा था, लेकिन अब जांच में उसकी असली भूमिका सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, रोहित इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड था. वह पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को संचालित करता था और हर कदम की रणनीति खुद तय करता था.

ताजा जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रोहित सिर्फ ऑपरेशन के दौरान मौजूद रहने तक सीमित नहीं था. बल्कि वह मरीजों और डोनर्स के चयन से लेकर पूरे ऑपरेशन की योजना बनाने तक में शामिल रहता था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि किस मरीज को किडनी चाहिए और किस डोनर को तैयार करना है, यह फैसला भी रोहित ही करता था. इसके जरिए वह पूरे अवैध कारोबार को नियंत्रित करता था.

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जांच में यह भी सामने आया है कि रोहित बेहद शातिर तरीके से अपनी पहचान छिपाकर काम करता था. वह सीधे तौर पर बहुत कम लोगों के संपर्क में रहता था और अपने सहयोगियों के जरिए ही निर्देश देता था. इसी वजह से लंबे समय तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर रहा. वह अलग-अलग अस्पतालों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच समन्वय बनाकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिलवाता था.

इस रैकेट में पैसों के लेन-देन और हिस्सेदारी तय करने में भी रोहित की अहम भूमिका सामने आई है. पुलिस को शक है कि इस अवैध धंधे में करोड़ों रुपये का खेल हुआ है. रोहित ही तय करता था कि किसे कितना पैसा मिलेगा और किस स्तर पर कौन जिम्मेदारी निभाएगा. अब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के बाद आर्थिक लेन-देन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है.

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि इस सिंडिकेट का जाल किन-किन शहरों तक फैला हुआ था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं. जांच एजेंसियां अस्पतालों, दलालों और अन्य संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही हैं ताकि पूरे मामले का खुलासा किया जा सके.

वहीं, इस मामले के अन्य फरार आरोपी अली और अफजल की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. पुलिस का दावा है कि इस पूरे किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट का पर्दाफाश कर सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगाई जा सके.

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