scorecardresearch
 

मे‍हसाणा में राहुल गांधी की रैली, मोदी के गढ़ को क्यों चुना और क्या होगा इसका असर?

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में चुनावी रैली कर रहे हैं. राहुल इसके साथ ही राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर रहे हैं. राहुल ने अपनी पहली चुनावी रैली के लिए इस जगह को ही क्यों चुना? और राहुल की इस सियासी रणनीति का असर क्या होगा...यह जानना जरूरी है.

Advertisement
X
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को गुजरात के मेहसाणा में चुनावी रैली कर रहे हैं. राहुल इसके साथ ही राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर रहे हैं. राहुल ने अपनी पहली चुनावी रैली के लिए इस जगह को ही क्यों चुना? और राहुल की इस सियासी रणनीति का असर क्या होगा...यह जानना जरूरी है.

उत्तरी गुजरात में बसा मेहसाणा पीएम नरेंद्र है. इसके अलावा मेहसाणा पाटीदार आरक्षण आंदोलन का गढ़ रहा है. नोटबंदी के बाद पीएम मोदी पर हमलावर हुए राहुल गांधी की गुजरात में यह पहली सभा है. नोटबंदी को लेकर सरकार आए दिन नए फरमान जारी करती है. कांग्रेस इस सभा के जरिये नोटबंदी के बाद उपजे जनाक्रोश को भुनाने की कोशिश भी करेगी.

कांग्रेस की रणनीति है कि राहुल की सभा के जरिये मोदी को उनके दी जाए. सनद रहे कि कुछ दिनों पहले पीएम मोदी ने मेहसाणा जिले के दीसा में ही किसानों की रैली को संबोधित किया था. ऐसे में राहुल सूबे में किसानों तक अपना संदेश तो पहुंचाना चाहते ही हैं, पाटीदार समुदाय के बीच जगह बनाने में भी उनकी दिलचस्पी है.

Advertisement

2015 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस ने मेहसाणा में जीती थीं. ऐसे में सूबे में करीब दो दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस राहुल की रैली के जरिये विधानसभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करना चाहती है. राहुल केवल मेहसाणा ही नहीं, बल्कि दक्ष‍िण गुजरात, मध्य गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में भी जल्द ही चुनावी रैलियां करने वाले हैं.

सूबे में सत्तारुढ़ बीजेपी को पिछले साल का सामना करना पड़ा था. उस वक्त राज्य की मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल इस आंदोलन को काबू करने में पूरी तरह विफल रही थीं. आंदोलन की अगुवाई युवा नेता हार्दिक पटेल ने की थी और इस आंदोलन को यहां के पटेल समुदाय की ओर से खूब समर्थन मिला था. यह समुदाय बीजेपी का बड़ा वोट बैंक रहा है. कांग्रेस को शायद यह भी लग रहा है कि मौजूदा वक्त में किसी युवा नेता की गैरमौजूदगी का फायदा उठाया जा सकता है.

वैसे में गुजरात में मोदी-युग से पहले उत्तरी गुजरात कांग्रेस का गढ़ रहा था. अब ऐसे वक्त में जब इस इलाके में बीजेपी की स्थ‍िति थोड़ी कमजोर पड़ रही है, कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाना चाहती है.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सूबे में दो मुख्यमंत्री बदल चुके हैं. सत्तारुढ़ पार्टी शायद इस असमंजस में है कि वो अगला चुनाव पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर लड़े या मौजूदा सीएम विजय रूपानी के सहारे चुनावी मैदान में उतरे. ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि वो राहुल गांधी को आगे रखकर सूबे में अपनी सियासी जमीन मजबूत करे.

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement