मिडिल-ईस्ट जंग की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट बढ़ गया है. देश में गहराते ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनता से ईंधन बचाने की अपील की. इस अपील का असर अब जमीन पर दिखने लगा है.
राजधानी दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर पिछले दिनों के मुकाबले गाड़ियों की कतारें कम हुई हैं. जनपथ रोड और आसपास के इलाकों में लोग अब अपनी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल सोच-समझकर कर रहे हैं.
आजतक संवाददाता जितेंद्र बहादुर सिंह ने जनपथ रोड पर आम लोगों से बातचीत की. इस दौरान कई नागरिकों ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया.
क्या कहती है दिल्ली की जनता?
एक नागरिक ने कहा, 'पेट्रोल पंपों पर अब लोगों की संख्या कम हुई है. लोग प्रधानमंत्री की बात सुन रहे हैं. हमारा फर्ज बनता है कि अगर देश का राजा कोई अपील करे, तो उसे माना जाए. इस तरह हम देश की सेवा में अपना योगदान दे सकते हैं.'
एक दूसरे व्यक्ति ने दिल्ली के ट्रैफिक और बढ़ते ईंधन खर्च पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही कहा है. दिल्ली में ट्रैफिक का बुरा हाल है. हर कोई अपना स्टेटस मेंटेन करने के लिए अपनी अलग गाड़ी लेकर निकल पड़ता है. अगर हम मिलकर कोशिश करें, तो पेट्रोल और डीजल की बड़ी बचत हो सकती है.'
जहां कुछ लोग इस अपील से खुश हैं, वहीं कुछ का मानना है कि सिर्फ अपील काफी नहीं होगी. संवाददाता अमित भारद्वाज से बात करते हुए एक नागरिक ने ईंधन की बचत को लेकर कहा, 'देखिए करना तो चाहिए, ये तो उनके हाथ में नहीं हैं. ये एक इंटरनेशनल प्रॉब्लम है. अब लोग कितना करेंगे और कितना नहीं, ये देखना होगा. लेकिन अगर दाम बढ़ा दिए जाएंगे, तो अपने आप बचत हो ही जाएगी.' उन्होंने ये भी कहा कि सोना न खरीदने जैसी अपीलें व्यावहारिक रूप से मुश्किल होती हैं.
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'ऑड-ईवन सिस्टम लागू किया...'
एक दफ्तर जाने वाले व्यक्ति ने सरकार को सुझाव दिया, 'बुनियादी जरूरतें तो पूरी करनी ही पड़ती हैं. ऑफिस आना-जाना बंद नहीं किया जा सकता. सरकार को इसके विकल्प ढूंढने चाहिए. फिर से ऑड-ईवन सिस्टम लागू किया जा सकता है या वर्क फ्रॉम होम (WFH) को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. हमें टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल करना होगा.'