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दिल्ली के रामलीला मैदान पर CAPF तैनात, विपक्ष के प्रदर्शन के बीच फैसला

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए स्थल के रूप में तय किया है. रामलीला मैदान में CAPF की तैनाती बढ़ाई गई है, जबकि सफाई और रामलीला की तैयारियां भी जारी हैं. हालांकि, यहां प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा.

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रामलीला मैदान की बुकिंग के लिए रोजाना 50 हजार रुपये देने होते हैं. (Photo- ITG)
रामलीला मैदान की बुकिंग के लिए रोजाना 50 हजार रुपये देने होते हैं. (Photo- ITG)

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को लिस्ट से हटाए जाने के बाद अब रामलीला मैदान में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली पुलिस ने इस मैदान को प्रदर्शन और धरना देने के लिए तय किए गए नए स्थलों में शामिल किया है. 

ताजा जानकारी के मुताबिक, मैदान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है. यहां सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी बढ़ने के साथ सफाई का काम भी चल रहा है. मैदान के एक हिस्से की सफाई की जा रही है, जबकि रामलीला के आयोजनों की तैयारियां भी जारी हैं.

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में तय किया गया है. पुलिस इन तीनों जगहों पर प्रदर्शनों के लिए विस्तृत और संशोधित एसओपी अलग से जारी करेगी.

रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना आसान नहीं

रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने के बावजूद यहां धरना या प्रोटेस्ट आयोजित करना आसान नहीं दिख रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, अगले ढाई महीने तक मैदान की बुकिंग के लिए कोई तारीख खाली नहीं है. इस साल केवल 29, 30 और 31 दिसंबर को ही बुकिंग की गुंजाइश है. करीब 12 एकड़ में फैले इस मैदान में लगभग 50 हजार लोगों के जुटने की क्षमता है. हालांकि, मैदान का एक छोटा हिस्सा प्रदर्शन और सभाओं के लिए मुफ्त उपलब्ध है, लेकिन वहां एक समय में केवल 150 लोगों के जुटने की क्षमता है.

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एक दिन की बुकिंग पर 1.21 लाख रुपये तक खर्च

अधिकारियों के मुताबिक, रामलीला मैदान की बुकिंग के लिए रोजाना 50 हजार रुपये देने होते हैं. इसके अलावा 55 हजार रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी पड़ती है, जो वापस मिल जाती है. टैक्स समेत एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च करीब 1.21 लाख रुपये बैठता है. मैदान की बुकिंग दिल्ली नगर निगम के हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के जरिए होती है. इसके लिए दिल्ली पुलिस से एनओसी लेना भी जरूरी है. ऐसे में किसी संगठन या आम लोगों के समूह के लिए यहां बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करना महंगा पड़ सकता है.

त्योहारी आयोजनों के कारण मैदान पहले से बुक

अधिकारियों का कहना है कि दशहरा, दिवाली और रामलीला जैसे आयोजनों के चलते मैदान पहले से ही कई कार्यक्रमों के लिए बुक है. यही वजह है कि प्रदर्शन के लिए तारीखें मिलना मुश्किल हो रहा है. आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी मैदान की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जब मैदान में रामलीला के दो आयोजन चल रहे हैं, तो वहां विरोध प्रदर्शन कैसे किया जा सकेगा. उन्होंने इसे लोगों के साथ धोखा बताते हुए पूछा कि क्या सरकार ऐसे में अव्यवस्था पैदा करना चाहती है.

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बड़े प्रदर्शनों से ट्रैफिक पर पड़ता है असर

रामलीला मैदान व्यस्त व्यावसायिक इलाके में स्थित है. इसके आसपास तीन अस्पताल और नगर निगम के मुख्यालय भी हैं. बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान यहां की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है. अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मौकों पर असफ अली रोड पर यातायात की दिशा बदलनी पड़ती है और दूसरी सड़कों पर भी ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ता है.

कई बड़े राजनीतिक आंदोलनों का गवाह रहा है मैदान

रामलीला मैदान का इतिहास भी काफी पुराना है. साल 1930 तक यहां तालाब हुआ करता था. बाद में इसे भरकर समतल किया गया, ताकि रामलीला का आयोजन हो सके. यहां 1932 से रामलीला का मंचन हो रहा है. आजादी के बाद यह मैदान बड़े राजनीतिक आयोजनों का अहम केंद्र बन गया. 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने यहां जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण की मांग को लेकर सत्याग्रह शुरू किया था. पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 1957 में यहां बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया था.

25 जून 1975 को आपातकाल घोषित होने के दिन जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसी मैदान में रैली को संबोधित किया था. साल 2013 में अरविंद केजरीवाल ने यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

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