दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड फोटो मामले में कॉकरोच जनता पार्टी नेता सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह को नोटिस जारी किया है. साथ ही मेटा को निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया से उस आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाएं. इसके साथ ही पुलिस पीड़िता को पूरी सुरक्षा दे.
हाई कोर्ट ने कहा कि यह असाधारण स्थिति है, जिसमें मामला सिर्फ एक महिला का नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री का भी है. अगर पुलिस इसे लेकर संवेदनशील नहीं है तो कोर्ट यह तय करेगा कि वह संवेदनशील बने. अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी.
हाई कोर्ट पहुंची महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी ने प्रदर्शन में अश्लील और अपमानजनक नारों के साथ उसकी मॉर्फ्ड और अश्लील तस्वीर फैलाई थी. सीजेपी नेताओं ने उसकी मॉर्फ्ड और अश्लील तस्वीरों में पीएम को भी जोड़ा था. इतना ही नहीं उसे जान से मारने की धमकी भी मिली. याचिका में महिला ने डीपफेक तस्वीरों को हटाने की मांग की थी.
महिला के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है लेकिन हालांकि उन्होंने जिम्मेदार लोगों को पकड़ने या वायरल डीपफेक लिंक को हटाने या ब्लॉक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.
मामले की सुनवाई के दौरान शुरुआत में कोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का मामला सिविल कोर्ट में जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता देखते हुए महिला को दौड़ाया नहीं जाना चाहिए. सारी कार्यवाही यहीं की जाएगी.
कोर्ट ने महिला से कहा, वह जांच अधिकारी को अपना पता बताए और पुलिस को निर्देश दिया कि महिला को पूरी सुरक्षा दी जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स को नोटिस जारी किया. जिसमें कहा है कि 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से आपत्तिजनक कंटेंट हटाएं.
वहीं, महिला के मुआवज़े के अधिकार पर कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई किसी गैर-कानूनी हरकत के लिए पीड़िता को प्रदर्शन के आयोजकों से मुआवजा मांगने का अधिकार है. इस याचिका के लंबित रहने से उसे कानून के तहत मिलने वाली किसी अन्य राहत का दावा करने से नहीं रोका जाएगा.