scorecardresearch
 

बांग्लादेश में एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग की वापसी के संकेत? पुलिस चीफ का खुल्लम-खुल्ला बयान

बांग्लादेश पुलिस के चीफ ने कहा कि जब पुलिस लाठी का इस्तेमाल करती है, तो उसे 'फासीवादी' कहा जाता है, और जब वह चुप रहती है, तो उसे 'कमजोर' कहा जाता है. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 'क्रॉसफायर' किया जाएगा.

Advertisement
X
बांग्लादेश पुलिस ने एनकाउंटर शुरू करने के संकेत दिए हैं.  (Photo: ITG)
बांग्लादेश पुलिस ने एनकाउंटर शुरू करने के संकेत दिए हैं. (Photo: ITG)

बांग्लादेश के पुलिस चीफ ने सोमवार को कहा कि देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर और सरकार की अनुमति से हम 'क्रॉसफायर' (एनकाउंटर) करने से नहीं हिचकेंगे. पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मो. अली हुसैन फकीर, जो 'कम्युनिटी बैंक बांग्लादेश' के चेयरमैन भी हैं, ने ढाका के चौकबाजार में बैंक की इस्लामिक बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही.

बांग्लादेश पुलिस के प्रमुख ने कहा, "अगर सरकार अनुमति देती है, तो जहां जरूरी होगा, वहां हम 'क्रॉसफायर' करेंगे."

हालांकि फकीर ने लोगों से अपील की कि वे पुलिस को कानून के दायरे में रहकर अपना काम करने दें. उन्होंने कहा, "जब पुलिस लाठी का इस्तेमाल करती है, तो उसे 'फासीवादी' कहा जाता है, और जब वह चुप रहती है, तो उसे 'कमजोर' कहा जाता है."

उन्होंने कहा, "ऐसे हालात में पुलिस को काम करने के लिए सही माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर सकें."

बांग्लादेश में 'क्रॉसफायर' को एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग से जोड़ा जाता है. 

पुलिस और हाल ही में नया नाम पाने वाली एजेंसी 'रैपिड एक्शन बटालियन' (RAB), अपने द्वारा की गई गैर-न्यायिक हत्याओं या गैर-कानूनी हत्याओं को छिपाने के लिए अक्सर "क्रॉसफायर" शब्द का इस्तेमाल करती है.

Advertisement

ये पुलिस ऑफिसर  आमतौर पर दावा करते थे कि पीड़ित व्यक्ति गोलीबारी की किसी आकस्मिक घटना में फंस गया था. या अपराधियों ने गश्त कर रही टीम पर गोली चलाई. या फिर पुलिस कहती है कि "क्रॉसफायर" में मारा गए व्यक्ति को उसके हथियारबंद साथियों ने उसे छुड़ाने का प्रयास किया.

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के दौरान, 'क्रॉसफायर' के नाम पर की गई कार्रवाइयों को लेकर पुलिस और RAB (रैपिड एक्शन बटालियन) की मानवाधिकार समूहों और राजनीतिक विरोधियों ने कड़ी आलोचना की थी.

रिकॉर्ड बताते हैं कि बांग्लादेश में पहली सनसनीखेज 'एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग' 1975 में हुई थी. तब पुलिस हिरासत में एक अति-वामपंथी माओवादी नेता, सिराज सिकदर की मौत हुई थी. यह घटना बिल्कुल उसी तरह की परिस्थितियों में हुई थी, जिसे बाद में 'क्रॉसफायर' का नाम दिया गया.

हालांकि 'क्रॉसफायर' शब्द बांग्लादेश की सुरक्षा शब्दावली में मार्च 2004 में तब आया, जब प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार ने अपराध-विरोधी एक विशेष संयुक्त इकाई का गठन किया. इसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के जवानों के साथ-साथ नियमित पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया गया था.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement