दिल्ली विधानसभा में बजट सत्र के 10वें दिन सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी के विधायकों ने जमकर हंगामा किया. सदन में स्पीकर, मंत्रियों और विधायकों ने एलजी अनिल बैजल के खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध किया. उनका आरोप है कि एलजी की शह पर कई सवालों के जवाब अधिकारियों की तरफ से नहीं दिए जा रहे हैं.
विधानसभा में कार्यवाही शुरू होते ही आप पार्टी के विधायकों ने सवाल उठाया कि द्वारा दिल्ली विधानसभा की शक्तियों पर लगातार हमला हो रहा है. विधायकों ने पूछा कि क्या चुने हुए विधायक और सरकार भ्रष्टाचार पर सवाल तक नहीं कर सकते, क्या कार्रवाई हुई वह भी नहीं पूछ सकते?
के विधायकों ने एक-एक कर सदन में विरोध जताया. 'आप' विधायक सहीराम ने कहा कि अफसरों की सैलरी भी रिजर्व कर देनी चाहिए, एलजी समझ लें कि कोई हम पर ईंट फेंकेगा तो जवाब पत्थर से मिलेगा.
विधायक विशेष रवि ने कहा कि आज हमने सदन में एलजी के तानाशाह रवैये पर काली पट्टी बांधी है और सदन को 2 मिनट के लिए मौन रखना चाहिए ताकि एलजी को सद्बुद्धि मिले. हालांकि स्पीकर ने इस मसले पर मौन रखने की विधायक की मांग को नकार दिया. 'आप' विधायक सोमनाथ भारती ने इस दौरान कहा कि एलजी ने लोकतंत्र की हत्या की है.
स्पीकर ने भी बांधी काली पट्टी
हंगामे के बीच ने भी एलजी पर जमकर हमला किया. स्पीकर ने सदन में हंगामे को शांत करते हुए कहा कि आज अधिकारियों की तरफ से 40 में से 17 सवालों के जवाब नहीं दिए गए. अंग्रेजों का शासन खत्म होने के बाद आज तक किसी सरकार में ऐसा नहीं हुआ. वह भी काली पट्टी बांधना चाहते हैं. एलजी ने उन्हें पत्र लिखा है कि विधानसभा अध्यक्ष आरक्षित मामलों से जुड़े किसी भी प्रश्न को स्वीकार नहीं करेंगे. अपने बयान के बाद स्पीकर ने भी काली पट्टी बांध ली और विरोध जताया.
आपको बता दें कि जमीन, सर्विसेज और कानून से जुड़े तमाम मामले एलजी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. आम आदमी पार्टी सरकार और एलजी दफ्तर के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान अब बेहद आम बात हो गई है. हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान स्पीकर ने प्रश्नों के जवाब नहीं मिलने पर आपत्ति भी जताई थी.
बीजेपी ने किया काली पट्टी बांधने का समर्थन
हालांकि इस दौरान बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने आप विधायकों द्वारा काली पट्टी बांधने का समर्थन तो किया लेकिन स्पीकर के काली पट्टी बांधने पर विरोध भी जताया. सिरसा ने सदन में कहा कि विपक्ष काली पट्टी बांधने का समर्थन करती है. दिल्ली की सरकार चुनी हुई है नॉमिनेट की गई सरकार नही है. हालांकि स्पीकर को काली पट्टी नही बांधनी चाहिए. यह संविधान की परंपराओं के उलट होगा. कानून का पालन करना स्पीकर का धर्म है. अगर अफसर जवाब नहीं दे रहे तो आरटीआई से जवाब मांग लीजिए.
दूसरी ओर, विधानसभा में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले सोमवार और मंगलवार यानी 2 से 3 अप्रैल तक सत्र को बढ़ाया जा सकता है. इन 10 दिनों के दौरान विधायकों से लेकर स्पीकर ने एलजी पर जमकर हमले किए हैं. सत्र काफी हंगामेदार रहा. खुद बजट पेश करते वक्त उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने एलजी से कई योजनाओं को बिना अड़ंगा लगाए पास करने की अपील भी की थी.