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LJP के निष्कासित महासचिव ने बनाया नया मोर्चा, कहा- पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र नहीं

सत्यानंद शर्मा के साथ लोजपा के कुछ और नेताओं ने मिलकर यह नई पार्टी बनाई है. एलजेपी पार्टी का कहना है कि सत्यानंद के साथ-साथ इस नए मोर्चे में शामिल सभी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.

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रामविलास पासवान (फाइल फोटो-PTI)
रामविलास पासवान (फाइल फोटो-PTI)

लोक जनशक्ति पार्टी से निष्कासित राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर सत्यानंद शर्मा ने गुरुवार को लोजपा (सेक्युलर) के नाम से एक नया मोर्चा बनाया है. सत्यानंद शर्मा का कहना है कि पार्टी में भ्रष्टाचार चरम पर है और आतंरिक लोकतंत्र नहीं है. उन्होंने पार्टी में परिवारवाद पर सवाल उठाते हुए गुरुवार को इसका ऐलान किया. सत्यानंद शर्मा को लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से लोक जनशक्ति पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.

सत्यानंद शर्मा के साथ लोजपा के कुछ और नेताओं ने मिलकर यह नई पार्टी बनाई है. एलजेपी पार्टी का कहना है कि सत्यानंद के साथ-साथ इस नए मोर्चे में शामिल सभी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद पशुपति कुमार पारस ने इस नए मोर्चे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहें डॉक्टर सत्यानंद शर्मा को जमुई में लोकसभा चुनाव के मतदान के बाद 11 अप्रैल को ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, इनके साथ कुछ अन्य नेता भी शामिल थे.

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सत्यानंद शर्मा 2014 में नालंदा से लोक जनशक्ति पार्टी की तरफ से नालंदा से एनडीए के उम्मीदवार रह चुके हैं और काफी कम वोट से जेडीयू उम्मीदवार से चुनाव हारे थे. 2015 में वो पटना की दीघा विधानसभा से भी एनडीए के उम्मीदवार बने, लेकिन चुनाव हार गए. इस बार जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद उन्हें टिकट नहीं मिला और न ही विधानसभा में टिकट मिलने की संभावना दिख रही थी. ऐसे में सत्यानंद शर्मा के पास अगल मोर्चा बनाने के अलावे और कोई चारा भी नहीं था.

लोक जनशक्ति पार्टी के कई नेता इस बार पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगे हुए थे फिर भी पार्टी के सभी 6 उम्मीदवार जीतने में सफल रहें तो इसके पीछे नरेंद्र मोदी का चेहरा था. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन जमुई से उनके बेटे चिराग पासवान और हाजीपुर से उनके भाई पशुपति कुमार पारस को हराने के लिए दल के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. कई नेताओं के भीतरघात के बारे में रामविलास पासवान सार्वजनिक रूप से बोल चूके हैं. इनमें जेडीयू के नेता नरेंद्र सिंह भी शामिल हैं.

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