WHO ने सर्वाइकल कैंसर की भारतीय वैक्सीन Cervavac को प्री-क्वालिफिकेशन मंजूरी दे दी है. इसका सीधा मतलब यह है कि इस वैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित, असरदार और उच्च गुणवत्ता का माना गया है. इस टीके को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है. यह सर्वाइकल कैंसर फैलाने वाले एचपीवी वायरस के चार स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी है. इसके लगने के बाद कैंसर की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है.
भारत सरकार ने भी सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ टीकाकरण अभियानों में एचपीवी टीकों को शामिल किया गया है. अब WHO से मान्यता मिलने के बाद ये वैक्सीन दुनिया के कई देशों में भी पहुंच सकेगी. सर्वाइकल कैंसर HPV यानी Human Papillomavirus से होता है. भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बाद महिलाओं में सबसे ज्यादा केस सर्वाइकल कैंसर के ही आते हैं. अब 20 से 30 साल की उम्र वाली महिलाओं को भी ये कैंसर हो रहा है. अधिकतर मामलों में ये शुरुआती स्टेज में पकड़ में नहीं आता है. ऐसे में बचाव के लिए वैक्सीन लगवाना काफी फायदेमंद है.
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Cervavac वैक्सीन क्या ह
Cervavac चार HPV प्रकारों जैसे 16, 18, 6 और 11के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है. HPV 16 और 18 को कैंसर के खतरे से जुड़े प्रमुख प्रकारों में माना जाता है, जबकि HPV 6 और 11 मुख्य रूप से जननांग मस्सों से जुड़े हैं. जो महिलाएं अपने डॉक्टर की सलाह पर इस वैक्सीन को लगवा लेती हैं उनमें एचपीवी वायरस से होने वाले सर्वाइकल कैंसर से बचाव किया जा सकता है. WHO के मुताबिक, जो महिलाएं 9 से 14 साल की उम्र में सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन लगवा लेती हैं उनमें इस कैंसर का रिस्क 90 फीसदी तक कम हो जाता है.
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WHO से मंजूरी मिलने का क्या है फायदा
WHO से मंजूरी मिलने का ये मतलब है कि अब उन देशों और वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए इस वैक्सीन को खरीदना आसान हो सकता है. इससे भारत में बनी HPV वैक्सीन की वैश्विक पहुंच बढ़ने की संभावना है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर देश में वैक्सीन तुरंत उपलब्ध हो जाएगी. वहां की सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था को अपने टीकाकरण कार्यक्रम, उम्र, डोज और खरीद से जुड़े फैसले अलग से लेने होंगे.