धूप में ज्यादा देर रहने से स्किन पर टैनिंग, पिगमेंटेशन, झुर्रियां और समय से पहले बुढ़ापा आने का खतरा बढ़ सकता है. बीते कुछ सालों में सनस्क्रीन को लेकर इस तरह का प्रचार काफी किया जा रहा है. सोशल मीडिया और ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स भी इसे स्किनकेयर का सबसे जरूरी हिस्सा बताते हैं. इस वजह से लोगों में इसके इस्तेमाल करने का चलन बढ़ा है. खासतौर पर युवा तो इसका यूज बहुत करते हैं. लेकिन अधिकतर मामलों में इसको खरीदते समय गलती कर देते हैं. लोग सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन खरीदते हैं, जबकि कुछ और चीजों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, सनस्क्रीन के स्किन पर कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सनस्क्रीन का सबसे अधिक प्रचार इस दावे को लेकर किया जाता है कि ये धूप के खराब असर से बचाती है. आपको SPF देखकर इसको खरीदना चाहिए. जितना अधिक SPF होगा उतना ही फायदा होगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है.
सूरज की UVA और UVB किरणों में फर्क समझना है जरूरी
सूरज से जो पराबैंगनी किरणें किरणें धरती पर आती हैं उसमे एक को यूवीए और दूसरी को यूवीबी कहते हैं. ये दोनों ही स्किन के लिए हानिकारक हैं, लेकिन स्किन को अलग- अलग तरीके से नुकसान करती हैं. यूवीए किरणें स्किन में जाकर मेलेनिन के लेवल को बढ़ा देती हैं. इससे स्किन काली होती हैं, ये स्किन में फाइन लाइंस का कारण बनती हैं. ये किरणें ऐसी हैं जो खिड़की के शीशों को पार करके भी स्किन तक जा सकती हैं. यूवीबी किरणों के बारे में बात करें तो यह स्किन के ऊपर वाली परत को ही नुकसान करती हैं. इससे ही सनबर्न होता है और स्किन कैंसर का रिस्क होता है. लेकिन धरती पर सूरज की जो किरणें आती हैं उनमें 95 फीसदी यूवीए होती हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यूवीए किरणें ही स्किन की अधिकतर समस्याओं का कारण होती हैं. ऐसे में अगर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना है तो केवल एसपीएफ देखना जरूरी नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि एसपीएफ केवल सूरज की यूवीबी किरणों से ही बचाता है, जबकि धरती पर सूरज कि जो किरणें आती हैं उनमें अधिकतर हिस्सा यूवीए किरणों का होता है.
SPF क्या है?
दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डर्मेटोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. अखिलेश थोले ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. डॉ. अखिलेश बताते हैं कि SPF का मतलब सन प्रोटेक्शन फैक्टर होता है. अधिकतर लोग इसको ही देखकर सनस्क्रीन खरीदते हैं.यह बताता है कि सनस्क्रीन सूरज की UVB किरणों से कितनी सुरक्षा देती है. लेकिन धरती पर तो यूवीए किरणें ज्यादा आती है. टैनिंग, फाइन लाइंस और स्किन का काला होना यूवीए किरणों से ही होता है. ऐसे में सनस्क्रीन खरीदते समय केवल SPF नहीं, बल्कि UVA सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. सनस्क्रीन पर इसको देखने का पैरामीटर PA ग्रेड होता है.
क्या होता है PA ग्रेड
डॉ अखिलेश बताते हैं कि अगर किसी सनस्क्रीन का SPF बहुत ज्यादा है लेकिन PA कम है तो वह टैनिंग और पिगमेंटेशन से पर्याप्त बचाव नहीं कर पाएगी. सनस्क्रीन पर मौजूद PA+ का निशान ही बताते हैं कि ये स्किन क इन समस्याओं से बचाने में कितनी फायदेमंद है. इसलिए अगर आप सनस्क्रीन लगा रहे हैं तो एसपीएफ से ज्यादा जरूरी है कि PA ग्रेड को देखें.
PA+ : थोड़ी UVA सुरक्षा
PA++ : मध्यम सुरक्षा
PA+++ : अच्छी सुरक्षा
PA++++ : सबसे बेहतर UVA सुरक्षा
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सनस्क्रीन पर दावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण कम
डॉ. थोले के मुताबिक, सनस्क्रीन को लेकर दावों के पीछे हर व्यक्ति के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. कई बार सोशल मीडिया, विज्ञापन और कॉस्मेटिक कंपनियां अपने व्यावसायिक हितों के कारण बहुत ज्यादा दावे करती हैं. डॉ अखिलेश कहते हैं कि सनस्क्रीन कोई जादुई प्रोडक्ट नहीं है. यह धूप से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन यह कोई चमत्कारी प्रोडक्ट नहीं है. केवल सनस्क्रीन लगाने से सभी त्वचा समस्याओं से बचाव संभव नहीं होता है. आपको धूप से बचने के अन्य तरीकों को भी ध्यान में रखना चाहिए.
सनस्क्रीन को लेकर फैली 5 बड़ी गलतफहमियां
हर व्यक्ति को पूरे दिन सनस्क्रीन लगानी चाहिए
हर दो घंटे में दोबारा लगाना सभी के लिए जरूरी है
सनस्क्रीन सबसे महत्वपूर्ण स्किन केयर प्रोडक्ट है
पिगमेंटेशन केवल सनस्क्रीन न लगाने से होता है
ज्यादा SPF हमेशा बेहतर होता है
धूप से बचने के अन्य तरीके
दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें.
फुल स्लीव के कपड़े पहनें.
टोपी और सनग्लास का इस्तेमाल करें
लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से बचें.
डॉ. अखिलेश की ये बातें आपके लिए जानना जरूरी
SPF से UVB किरणों से बचाव का पता चलता है
धरती पर पहुंचने वाली UV रेडिएशन में लगभग 95% हिस्सा UVA का होता है
UVA टैनिंग और फोटोएजिंग (धूप से त्वचा का बूढ़ा होना) में अहम भूमिका निभाता है
सनस्क्रीन के कुछ इंग्रीडिएंट्स को लेकर टॉक्सिकोलॉजिकल समस्याएं सामने आई हैं
असल बचाव जो है वो सनस्क्रीन के विज्ञापन से अलग हो सकता है
सनस्क्रीन फ़ायदेमंद है, लेकिन यह पूरी तरह से समाधान नहीं है
मरीज़ों को कंपनियों के दावों को ध्यान से परखना चाहिए
धूप से बचाव का तरीका हर व्यक्ति के लिए अलग और सबूतों पर आधारित होना चाहिए.