दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज पर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. 5 अप्रैल को जी5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद, सेंसर बोर्ड और सरकार सख्त हो गई है. कई जगह इसकी गैरकानूनी तरीके से स्क्रीनिंग की गई थी, जिसपर अब एक्शन लिए जाने की खबर है. दिलजीत की फिल्म ऑनलाइन कई जगहों पर मौजूद है, जिसे देश-विदेश हर तरफ देखा जा रहा है.
फिल्म सतलुज को पाकिस्तान में भी वहां के लोग देख रहे हैं. चूंकि फिल्म की कहानी पंजाब के सबसे विवादित समय को दिखाती है, इसलिए पड़ोसी मुल्क में भी इसे देखने का क्रेज जागा है. दिलजीत की फिल्म पाकिस्तानी एक्ट्रेस बुशरा अंसारी ने देखी, जिन्होंने कथित तौर पर पाकिस्तान के धुरंधर फिल्म के जवाब में बनाई ड्रामा सीरीज जहन्नुम बा'रास्ता जन्नत में काम किया था.
बुशरा अंसारी ने देखी सतलुज
डॉन की रिपोर्ट अनुसार, बुशरा अंसारी ने इंस्टाग्राम पर दिलजीत की फिल्म सतलुज पर अपने दिल की कुछ बातें साझा की हैं. उनका कहना है कि वो ये फिल्म कई रातों से सो नहीं पाई हैं. वो अपने इंडिया में मौजूद पंजाब के भाइयों के लिए शोक मना रही हैं.
बुशरा अंसारी का कहना है कि उन्होंने फिल्म सतलुज के बारे में काफी बातें सुनी थीं, मगर जब उन्होंने ये फिल्म देखी तो वो शोक में डूब गईं. वो दिलजीत के काम की बड़ी फैन हैं, जिन्होंने ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी फिल्मों को इतने साहस के साथ बनाया और सबके सामने पेश किया.
दिलजीत की फिल्म देख पहुंचा दुख
पाकिस्तानी एक्ट्रेस ने ये भी कहा कि जिस तरह फिल्म में एक ही धर्म के लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हुए दिखाया गया है, उसे देख उन्हें काफी दुख पहुंचा है. उनका मानना है कि ये भारत और पाकिस्तान, दोनों तरफ की एक कड़वी सच्चाई रही है. बुशरा अंसारी ने एक सवाल के साथ कहा कि पहले ऐसे लोग हुआ करते थे जो अपने सिद्धांतों, अपने देश और अपनी ईमानदारी के लिए जान तक देने को तैयार रहते थे. मगर आज ऐसे लोग कहां हैं?
उन्होंने आगे कहा कि पहले समाज में ऐसे प्रेरणादायक लोग होते थे जो अपने विश्वास और अपने लोगों के लिए संघर्ष करते थे, यहां तक कि युद्ध लड़ने से भी पीछे नहीं हटते थे. मगर आज के समय में ऐसे उसूलों वाले लोग बहुत कम दिखाई देते हैं. पाकिस्तानी एक्ट्रेस ने ये भी कहा है कि इस फिल्म को भारत में हटा दिया गया, लेकिन जो लोग इसे देखना चाहते हैं, उनके लिए ये ऑनलाइन उपलब्ध है.
दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज, जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है जिन्होंने 80-90 के दशक में पंजाब में हुई घटनाओं और हत्याओं का सच ढूंढ निकालने की ठान ली थी. वो सिस्टम से लड़ने के लिए तैयार थे, मगर एक दिन वो अचानक कहीं गायब हो गए.