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कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और... भारत को व्‍यापार में घाटा करा रहीं ये तीन चीजें!

भारत का कच्‍चा तेल आयात इस साल ज्‍यादा हुआ है. खासकर जून के महीने में आयात बिल में ज्‍यादा बढ़ोतरी देखी गई है. सरकारी आंकड़ा के मुताबिक, कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण भारत का व्‍यापार घाटा तेजी से बढ़ा है.

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भारत का व्‍यापार घाटा तेजी से बढ़ा. (Photo: File/ITG)
भारत का व्‍यापार घाटा तेजी से बढ़ा. (Photo: File/ITG)

जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने से भारत का सप्‍लाई चेन प्रभावित हुआ है. वहीं ट्रंप टैरिफ की वजह से एक्‍सपोर्ट पर भी दबाव आया है. ऐसे में भारत का व्‍यापार घाटा तेजी से बढ़ा है. खासकर अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने और होर्मुज के बंद होने के बाद, कच्‍चे तेल को भारी कीमतों पर आयात करने की वजह से भारत का व्‍यापार घाटा ज्‍यादा हुआ है. 

ऐसे में भारत अपने इस व्‍यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा है. पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्‍स एंड ज्‍वैलरी भारत के व्यापार घाटे को बढ़ाने वाले तीन प्रमुख आयातित वस्तुएं बनी हुई हैं, जहां अप्रैल से जून 2026 के दौरान आयात निर्यात से अधिक था. 
 
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्‍स एंड ज्‍वैलरी से संबंधित व्यापार घाटा 65.9 बिलियन डॉलर रहा, जबकि इसी अवधि में कुल व्यापार घाटा 37.42 बिलियन डॉलर था. 

इन तीन चीजों का आयात इतना बढ़ा 
जून महीने में ही पेट्रोलियम और कच्‍चे तेल का आयात पिछले साल की तुलना में 23 फीसदी बढ़कर 19.32 अरब डॉलर हो गया, जबकि इलेक्‍ट्रॉनिक सामानों का आयात 43.76 फीसदी बढ़कर 13.36 अरब डॉलर और सोने का आयात 47.1 फीसदी बढ़कर 1.6 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चांदी का आयात 42.7% घटकर 0.06 अरब डॉलर रह गया. 

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20 अरब डॉलर का घाटे में बढ़ोतरी 
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि जून माह में पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और रत्न एवं आभूषणों के आयात से व्यापार घाटे में 20 अरब डॉलर की शुद्ध वृद्धि हुई है. पत्रकारों को जानकारी देते हुए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयात में यह बढ़ोतरी खासतौर से कच्चे तेल और कीमती धातुओं की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है और इसका मतलब आयात की मात्रा में वृद्धि नहीं है. 
 
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में बढ़ोतरी का कारण 'बढ़ते मध्यम वर्ग, व्यय योग्य आय और देश में बढ़ती मांग' को बताया है. इस बीच, जून माह में भारत का कुल वस्तु व्यापार घाटा भी बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया. जून 2026 में जहां माल निर्यात में सालाना आधार पर 15.52% की बढ़ोतरी हुई और यह 40.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया, वहीं माल आयात में इससे भी तेज गति से 31% की बढ़ोतरी हुई और यह पिछले महीने 70.84 अरब डॉलर तक पहुंच गया. 

चुनौतियां अब हो चुकी हैं कम
हालांकि, मई 2026 में 28.21 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की तुलना में इस महीने व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा, क्योंकि माल निर्यात 45.2 अरब डॉलर से घटकर जून 2026 में 28.21 अरब डॉलर हो गया. एक सकारात्मक पहलू यह है कि जून में मध्य पूर्व को भारत का निर्यात फिर से बढ़ने लगा और सालाना आधार पर 7.29% बढ़कर 5 अरब डॉलर हो गया. अग्रवाल ने कहा कि मार्च, अप्रैल और मई में आई चुनौतियां अब कम हो गई हैं. 

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