बीते कुछ दिनों में राजस्थान, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में तीन लोगों की अपने रोजमर्रा के कामों के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ी और उनकी जान चली गई. सोशल मीडिया पर इन घटनाओं के वीडियो वायरल हैं. इनमें एक व्यक्ति जिम में एक्सरसाइज करते समय अचानक बेहोश होकर गिर गए और मौत हो गई. दूसरी दो घटनाएं अलग- अलग दुकानों की हैं. ये वीडियो देखकर लोगों के मन में डर बैठ गया है कि ऐसा हो क्यों रहा है? हालांकि अभी इन मौतों के कारणों का पता नहीं चला है, लेकिन डॉक्टर इसको कार्डियक अरेस्ट से जोड़कर देख रहे हैं.
इस बारे में दिल्ली साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. समीर श्रीवास्तव ने बताया है..डॉ समीर कहते हैं कि अचानक बेहोश होकर गिरने से जो मौतें हो रहीं हैं उनका बड़ा कारण कार्डियक अरेस्ट है. ये हार्ट अटैक से अलग होता है. डॉ समीर बताते हैं कि हार्ट अटैक प्लंबिंग की प्रॉब्लम की तरह है. इसमें हार्ट में खून की नली में थक्का (क्लॉट) जम जाता है और दिल के एक हिस्से तक खून पहुंचना बंद हो जाता है. इसमें दिल धड़क रहा होता है, बंद नहीं होता, इंसान होश में रहता है, सांस चल रही होती है, सीने में दर्द, पसीना आना, घबराहट, उल्टी जैसा लगना ये लक्षण होते हैं. जितनी देर इलाज नहीं मिलेगा, दिल की मसल उतनी ज्यादा डैमेज होगी जिससे मौत का खतरा बढ़ता जाएगा.
कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक
डॉ समीर बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट दिल की एक इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम है. इसमें दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक फेल हो जाता है. जिससे दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है. इंसान नीचे गिर जाता है, पूरा बेहोश हो जाता है, सांस बंद हो जाती है, नब्ज नहीं मिलती. ये उस वक्त के लिए क्लीनिकली डेड जैसी सिचुएशन होती है. कई मामलों में एक गंभीर हार्ट अटैक भी कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, पर ये दोनों अलग-अलग इमरजेंसी हैं. कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट होने से पहले हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखते भी हैं, लेकिन लोग इनको पहचान नहीं पाते हैं.
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कार्डियक अरेस्ट में सीपीआर बचा सकती है जान
अरगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश होतकर गिर गया है तो ये कार्डियक अरेस्ट का लक्षण हो सकता है. ऐसे मामलों में सीपीआर जान बचा सकता है. सीपीआर कैसे दें ये ऐसे समझें
मरीज को जमीन पर सीधा लिटाएं
अपने दोनों हाथों को छाती के बिल्कुल बीच में रखे. कोहनियां सीधी रखते हुए छाती को करीब 2 से 2.5 इंच तक नीचे दबाएं.
एक मिनट में कम से कम 100 बार छाती को दबाते रहें. इसको जब तक जारी रखें जब मरीज को सांस न आ जाए