कैंसर के इलाज में अब कई तरह की नई तकनीक आ रही है. इनमें से एक है नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग, जिसकी मदद से अब एडवांस स्टेज कैंसर ( स्टेप-4) के मरीजों को भी नई जिंदगी मिल रही है. इससे इन मरीजों का जीवन लंबा चल रहा है. नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग की मदद से कैंसर के जीन म्यूटेशन का पता लगाकर उसका इलाज किया जा रहा है.
नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग( NGS) में इंसान के डीएनए और जीन का टेस्ट करके इलाज किया जाता है. ये नॉर्मल कैंसर ट्रीटमेंट से काफी अलग है. इसमें ये देखा जाता है कि कैंसर किस जीन म्यूटेशन (गलती) के कारण बढ़ा है. फिर उसी म्यूटेशन का पता लगाकर उसके लिए ही बनी दवा से इलाज होता है. इससे मरीजों को एडवांस स्टेज में भी इलाज का फायदा मिलता है.
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मरीज के कैंसर के हिसाब से होता है इलाज
सर गंगा राम अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है. वह कहते हैं कि यह तकनीक ट्यूमर के DNA की गहराई से जांच करती है और उस खास डीएनए कोड को पकड़ लेती है, जिसकी वजह से कैंसर की सेल्स शरीर में लगातार और तेजी से बढ़ती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज की बीमारी के हिसाब से ही उसका इलाज किया जाता है. पुराने जो तरीका है कि उससे बिलकुल अलग है. NGS रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि मरीज को कौन सी खास दवा देनी चाहिए, जो सीधे कैंसर सेल्स पर हमला करे और अच्छी सेल्स को बहुत नुकसान ना करे.
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50 से अधिक नई दवाएं आईं
डॉ श्याम ने बताया कि इस इलाज के लिए 50 से अधिक नई दवाएं आ गई हैं. इनमें से कई दवाएं गोलियोंके रूप में आती हैं या इम्यूनोथेरेपी के जरिए दी जाती हैं. ये ट्रीटमेंट सामान्य कीमोथेरेपी की तुलना में कम साइडइफेक्ट वाला है. इसमें दवाएं सीधे कैंसर पर अटैक करती हैं और हेल्दी सेल्स को कम नुकसान होता है.
लास्ट स्टेज के मरीजों के लिए फायदेमंद
एडवांस या स्टेज-4 कैंसर में नॉर्मल ट्रीटमेंट काम करना बंद कर देते हैं, तब NGS की मदद ली जाती है. अगर NGS रिपोर्ट में किसी ऐसे म्यूटेशन का पता चलता है जिसके लिए दवा मौजूद है, तो मरीज को वह खास दवा दी जाती है. इससे लास्ट स्टेज के मरीजों में भी ट्यूमर का साइज सिकुड़ने लगता है, कैंसर का फैलना रुक जाता है और मरीज की उम्र बढ़ जाती है.