जो लोग फुल बॉडी चेकअप कराते हैं उसमें थायरॉइड का टेस्ट भी होता है. कुछ कि थायरॉइड रिपोर्ट में TSH का लेवल बढ़ा हुआ रहता है. महिलाओं में ऐसा ज्यादा देखा जाता है. रिपोर्ट में TSH बढ़ा हुआ देखकर परेशान हो जाती हैं. पहला सवाल होता है कि इसका क्या इलाज है और अब क्या जिंदगीभर दवा खानी पड़ेगी?
थायरॉइड क्यों बढ़ जाता है इसका इलाज या कंट्रोल करने का तरीका क्या है इसके बारे में जानेंगे. डॉक्टर बताते हैं कि TSH यानी थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन दिमाग में मौजूद पिट्यूटरी ग्लैंड से बनता है. इसका काम थायराइड ग्लैंड को शरीर के लिए जरूरी हार्मोन बनाने का संकेत देना है. लेकिन जब शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है तो थायरॉइड हार्मोन का बनना कम हो जाता है, जिससे TSH का लेवल बढ़ने लगता है. इसमें थायरॉइड ग्लैंड जरूरत के हिसाब से हार्मोन नहीं बना पाता है. इसको हाइपोथायराइडिज्म कहा जाता है.महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं. इस कारण भी कुछ महिलाओं को थायरॉइड की बीमारी हो जाती है.
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क्या लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
वजन बढ़ना
ठंड ज्यादा लगना
बालों का झड़ना
कब्ज की समस्या
कब थायरॉइड बढ़ने पर दवा है जरूरी?
इस बारे में दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डॉ अजीत कुमार ने बताया है. डॉ कुमार कहते हैं कि थायरॉइड का लेवल बढ़ने का ये मतलब नहीं है कि हर मरीज को तुरंत ही दवा खानी शुरू करनी पड़ेगी. ये इस बात पर डिपेंड करता है कि लेवल कितना बढ़ा हुआ है.
थायरॉइड का लेवल अगर 10 mIU/L से अधिक है तो दवा बहुत जरूरी होती है, अगर इसका लेवल 4.5 से 10 mIU/L के बीच है तब भी डॉक्टर दवा शुरू करने का फैसला कर सकते हैं. जबकि 0.4 से 4.0 mIU/L का नॉर्मल रेंज होने या बॉर्डरलाइन मामलों में डॉक्टर की सलाह पर दवा टाल भी जा सकती है.
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क्या खाना खाने से थायराइड ठीक हो जाएगा?
सिर्फ किसी एक चीज को खाने या घरेलू नुस्खे से थायराइड ठीक करने का दावा सही नहीं है. संतुलित डाइट जरूरी है, लेकिन दवा की जरूरत होने पर उसे डॉक्टर की सलाह के बिना बंद नहीं करना चाहिए.