बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के सामने एक सवाल अकसर आता है. वैक्सीन सरकारी अस्पताल में लगवाएं या प्राइवेट में? प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर कई बार ऐसे टीकों की भी सलाह देते हैं जो सरकारी अस्पताल में नहीं लगाए जाते है. इससे लोगों को लगता है कि शायद सरकारी अस्पताल में सभी वैक्सीन नहीं लग रही है. दूसरी तरफ, जिन लोगों को कोई आर्थिक समस्या नहीं होती है वह प्राइवेट अस्पताल में ही वैक्सीन लगवाना पसंद करते हैं. इन लोगों में एक भ्रम होता है कि सरकारी संस्थानों में वैक्सीन सही नहीं होती है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? आपको अपने बच्चे को वैक्सीन किस अस्पताल में लगवानी चाहिए. इसके बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बताया है.
पहले बात सरकारी वैक्सीनेशन की कर लेते हैं. भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunisation Programme - UIP) देश का बड़ा मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम है. इसके तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सभी जरूरी टीके मुफ्त दिए जाते है. इसमें BCG, पोलियो, हेपेटाइटिस-B, पेंटावैलेंट, रोटावायरस, PCV, IPV, MR, DPT जैसी वैक्सीन बच्चों को लगाई जाती है. कुछ जगहों पर जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) का टीका भी दिया जाता है जहां बीमारी का खतरा अधिक होता है. सरकारी अस्पतालों में वो सभी वैक्सीन लगती हैं जो बहुत जरूरी है और आने वाले समय से गंभीर बीमारियों से बचा सकती है. सरकारी संस्थानों की वैक्सीन को भी सभी पैरा मीटर को फॉलो करते हुए सुरक्षित रखा जाता है.
यह भी पढ़ें: भारत में डेंगू वैक्सीन को मंजूरी और आगे की राह, कब तक शुरू हो सकता है वैक्सीनेशन, किनके लिए जरूरी
फिर प्राइवेट में इतने टीके क्यों बताए जाते हैं?
इस बारे में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एलएच घोटेकर ने बताया है. वह कहते हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर राष्ट्रीय टीकाकरण प्रोग्राम के अलावा कुछ वैक्सीन भी देते हैं. जैसे प्राइवेट अस्पताल में हेपेटाइटिस ए, इन्फ्लूएंजा, कॉन्जुगेट वैक्सीन और चिकनपॉक्स की भी वैक्सीन लगती हैं. ये वैक्सीन सरकारी सप्लाई में नहीं है. सिर्फ प्राइवेट में मिलती हैं. सरकार ने इन्फ्लूएंजा, हेपेटाइटिस A और चिकनपॉक्स जैसी वैक्सीन को UIP शेड्यूल में शामिल नहीं किया है क्योंकि ये महंगी हैं और सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षा देना चाहती है, इसलिए इन्हें कम प्राथमिकता दी गई है. हालांकि, जिन लोगों को ज़्यादा खतरा है, उनके लिए ये वैक्सीन लगवाना ज़रूरी है.
प्राइवेट में बिना सुईं वाली वैक्सीन भी लगती है
यह भी पढ़ें: HPV वैक्सीनेशन क्या है? 1.15 करोड़ बेटियों को लगेगा फ्री में टीका, जानें क्यों है यह जरूरी
तो फिर किस अस्पताल में लगवाएं वैक्सीन
इस बारे में सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया है. वह कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में सभी जरूरी टीके लग जाते हैं. ऐसे में सरकारी में वैक्सीनेशन कराना फायदेमंद है. क्योंकि वहां वैक्सीन का खर्च आपको नहीं देना पड़ता है, लेकिन अगर आपके डॉक्टर ने कुछ ऐसी वैक्सीन लगवाने को भी कहा है जो यूनिवर्सल प्रोग्राम में शामिल नहीं है तो उन टीकों को आप प्राइवेट अस्पतालों में लगवा सकते हैं. कुछ प्राइवेट अस्पतालों में बिनापेनलेस वैक्सीन कहते हैं वो लगाई जाती है. इस तरह की आधुनिक और दर्द रहित तकनीक या पेनलेस विकल्प मुख्य रूप से प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं सरकारी में नहीं. इस वजह से कुछ लोग प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगवाते हैं. वैक्सीन के फायदे, जरूरत, सही उम्र और खर्च के बारे में डॉक्टर से समझकर फैसला किया जा सकता है.
लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि वैक्सीनेशन का कोर्स एक ही जगह से पूरा करें, ऐसा न करें कि 2 टीके सरकारी में लगवा लिए और 2 प्राइवेट में, कोशिश करें कि जहां वैक्सीनेशन शुरू किया है वहीं उसका कोर्स पूरा करें. इसका कारण ये है कि अलग-अलग जगह से वैक्सीन का निर्माता अलग हो सकता है, उसकी रचना भी अलग हो सकती है. ऐसे में एक प्रकार की ही वैक्सीन लगवाना ठीक होता है.