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चिकन खाने से फैल सकता है खतरनाक बैक्टीरिया, बढ़ा इस बीमारी का खतरा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक पोल्ट्री फार्मिंग कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया के तेजी से विकास का कारण बन रही है, जो डायरिया जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण है, यह बैक्टीरिया एंटीबायोटिक रजिस्टेंस भी बढ़ा रहा है.

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पोल्ट्री फार्म में मुर्गियां. (Photo: Unsplash)
पोल्ट्री फार्म में मुर्गियां. (Photo: Unsplash)

चिकन को प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स माना जाता है, लेकिन अब यह दुनियाभर में डायरिया ( दस्त) फैलाने वाले सबसे आम बैक्टीरिया कैंपिलोबैक्टर का कारण बन रहा है.  एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर होने वाली पोल्ट्री फार्मिंग इस बैक्टीरिया के विकास का कारण बन रही है. यहां तक की यह एंटीबायोटिक रजिस्टेंस को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य में इस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी का इलाज मुश्किल हो सकता है.

इस रिसर्च को Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित किया गया है. रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक प्रोफेसर सैम शेपर्ड के अनुसार, दुनियाभर के पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों की संख्या काफी बढ़ रही है. मुर्गियों में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने का रिस्क होत है. अब देखा जा रहा है कि इनमें कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया पनप रहा है जो डायरिया जैसी बीमारी का कारण बनता है. अगर कोई व्यक्ति 60 से 80 प्रतिशत तक कच्चे या ठीक से न पके चिकन को खाता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है. हालांकि चिकन को अच्छी तरह से पकाने से यह बैक्टीरिया मर सकते हैं, लेकिन कई मामलों में लोग सही से पकाते नहीं है जिससे इंफेक्शन का रिस्क होता है. 

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मुर्गियों से फैल रहा बैक्टीरिया क्यों है खतरनाक

संक्रमित मुर्गी को खाने के बाद कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया इंसान के शरीर में चला जाता है. इससे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम से लेकर डायरिया जैसी बीमारी का रिस्क होता है. हालांकि अधिकांश लोग बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन रिसर्च में यह भी पता चला है कि कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया पर कई तरह की एंटीबायोटिक अब असर नहीं कर रही है. जिससे इस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी खतरनाक रूप ले रही है. 

30 देशों के आंकड़ों पर हुई स्टडी

वैज्ञानिकों ने 1979 से 2024 के बीच 30 देशों से से करीब 2,800 बैक्टीरिया जीनोम का विश्लेषण किया, अध्ययन में पाया गया कि साल 1900 के बाद से  मुर्गियों के बीच कैंपिलोबैक्टर स्ट्रेन लगभग 100 गुना बढ़ गया है. यह इतनी तेजी से फैल रहा है कि जिन मुर्गी फार्म में जरूरत से ज्यादा मुर्गियां हैं वहां इसका प्रसार आसानी से हो जाता है. जो इंसानों में भी संक्रमण का कारण बन सकता है. ऐसे में इसको काबू करने की जरूरत है. 

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संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?

हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं

अलग कटिंग बोर्ड और चाकू का इस्तेमाल करें

 चिकन को पूरी तरह पकाकर ही खाएं 

पेट में कोई परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें 

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