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Mind Rocks: 'हमें मशीनों के साथ रहकर उतना ही स्मार्ट बनना है'

इंडिया टुडे ग्रुप के माइंड रॉक्स इवेंट में शामिल हुए इंफोसिस के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ कृष गोपालकृष्णन ने बताई AI की खूबियां.

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माइंडरॉक्स कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कृष गोपालकृष्णन
माइंडरॉक्स कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कृष गोपालकृष्णन

दिल्ली में इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा माइंड रॉक्स इवेंट का आयोजन किया गया है. इसमें इंफोसिस के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ कृष गोपालकृष्णन ने हिस्सा लिया. मंच साझा करते हुए उन्होंने टेक्नोलॉजी के कई पहलुओं पर बात की. साथ ही कार्यक्रम में मौजूद छात्रों के सवालों का जवाब भी दिया.

ऐसे समय में जब लोग ये सोच रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य ऑटोमैटिक तकनीकें हमारी नौकरियां छीन सकती हैं, कृष का कुछ और ही मानना है. उन्होंने कहा कि AI आज के दौर में बहुत सारी चीजों को बदल सकता है. हमें मशीनों के साथ रहना है और उनके जितना स्मार्ट बनना है.

उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि एक बग्गी चलाने वाला यदि मशीनों के युग में गाड़ी चलाना नहीं सिखेगा तो वो हार जाएगा. हर नई टेक्नोलॉजी में लोगों को रिप्लेस करने की क्षमता होती है. ऐसे में हमें भविष्य की नौकरियों को पहचानना होगा और उसी के मुताबिक अपनी स्किल्स को डेवलप करना होगा.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए कृष ने कहा कि AI केवल एक कैलकुलेटिंग मशीन है. इससे क्या कैलकुलेट करना है वो इंसानों को सीखाना होगा. AI का उपयोग हेल्थ सेक्टर समेत कई और सेक्टर में बेहतर तरीके से किया जा सकता है. क्योंकि ये मशीन लर्निंग के साथ काम करता है और इंसानों के मुकाबले ज्यादा डेटा याद रख सकता है.

AI से पैदा होने वाली नई नौकरियों पर बात करते हुए इंफोसिस के पूर्व सीईओ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से फायदा उठाने का ये सही समय है. मशीन लर्निंग के लिए एल्गोरिदम डेवलप करना या मशीनों के लिए नए चिप और प्रोसेसर बनाना ये वो काम हैं, जिनमें युवा जा सकते हैं.

युवाओं से बात करते हुए कृष ने कहा कि आपके लिए मौजूदा ट्रेंड को पहचानना जरूरी है और इसी पर आगे बढ़ना है. उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, न्यूरोसाइंस और ब्रेन साइंस हालिया ट्रेंड हैं, जिन पर आगे बढ़ा जा सकता है.

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