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कर्ण को बेबस बना दिया! सालों पहले बंद हुए 'सूर्यपुत्र कर्ण' शो पर उठे सवाल, यूजर्स बोले- असली महाभारत पढ़ी है

Suryaputra Karn में द्रौपदी के चीरहरण के दौरान कर्ण को दुखी और विरोध करते दिखाया गया. लेकिन मूल महाभारत में कर्ण के संवाद कुछ और ही कहानी बताते हैं. आखिर सालों बाद इस शो के सीन पर क्यों विवाद गहराया है, जानें मामला.

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सूर्यपुत्र कर्ण के सीन पर विवाद! (Photo; Screengrab)
सूर्यपुत्र कर्ण के सीन पर विवाद! (Photo; Screengrab)

महाभारत सिर्फ एक कहानी नहीं है. इसके किरदार आज भी लोगों के दिल-दिमाग में बसे हुए हैं. यही वजह है कि जब टीवी पर महाभारत के किरदारों को नए अंदाज में दिखाया जाता है, तो दर्शक उसे सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं देखते. इसी वजह से 2015 में आए सूर्यपुत्र कर्ण शो की चर्चा अब फिर से शुरू हो चली है. इसके एक सीन पर गहमागहमी देखने को मिल रही है. यूजर्स शो में कर्ण को अलग तरह से दिखाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं और इसे इतिहास से छेड़छाड़ बता रहे हैं. 

इस शो में कर्ण को एक ऐसे इंसान के तौर पर दिखाया गया था, जो दुर्योधन का दोस्त जरूर था, लेकिन दिल से बहुत नेक और धर्म को समझने वाला था. खासकर द्रौपदी के चीरहरण वाले सीन में कर्ण का जो रूप दिखाया गया, उस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.

चीरहरण के वक्त रोते दिखे कर्ण

'सूर्यपुत्र कर्ण' में द्रौपदी के अपमान के वक्त कर्ण काफी दुखी नजर आता है. उसे इस घटना से परेशान दिखाया गया. इतना ही नहीं, सीरियल में कर्ण इस पूरे मामले का विरोध करता हुआ और दुर्योधन को रोकने की कोशिश करता भी दिखाई देता है. यानी स्क्रीन पर कर्ण एक ऐसे शख्स के तौर पर सामने आता है, जो हालात के सामने मजबूर है, लेकिन अंदर से सही है.

यही सीन यूजर्स को खटक गया और सवाल करने शुरू कर दिए कि क्या महाभारत में कर्ण का यही रूप था. अगर मूल महाभारत के सभा पर्व को देखें, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है.

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मूल महाभारत में कर्ण ने क्या कहा था

यूजर्स ने पोस्ट शेयर करते हुए अपनी राय रखी और महाभारत के श्लोक से अपना जवाब दिया. महाभारत के सभा पर्व के अध्याय 61 में द्रौपदी के सभा में लाए जाने के बाद कर्ण के संवाद मिलते हैं. यहां कर्ण द्रौपदी के एक वस्त्र में सभा में लाए जाने को लेकर अपना पक्ष रखता है.

कर्ण कहता है- “मन्यसे वा सभामेतामानीतामेकवाससम्. अधर्मेणेति तत्रापि शृणु मे वाक्यमुत्तरम्!!'' इसके बाद कर्ण द्रौपदी के कई पतियों का जिक्र करता है और उसके लिए 'बन्धकी' शब्द का इस्तेमाल करता है. अगले श्लोक में तो वह यह तक कहता है कि उसे सभा में लाया जाना कोई हैरानी की बात नहीं है, चाहे वह एक वस्त्र में हो या फिर बिना वस्त्र के. यहां कर्ण का रवैया द्रौपदी के अपमान के खिलाफ खड़े होने वाला नहीं, बल्कि उस अपमान को सही ठहराने वाला दिखाई देता है.

फिर सीरियल में इतना बदला हुआ क्यों दिखा कर्ण

यही बात सोशल मीडिया यूजर्स को खटक रही है. लोगों का कहना है कि 'सूर्यपुत्र कर्ण' में कर्ण को इतना सफेद रंग दे दिया गया कि उसके किरदार का दूसरा पहलू लगभग गायब ही हो गया. द्रौपदी के चीरहरण जैसे महाभारत के सबसे विवादित प्रसंग में जहां मूल ग्रंथ का कर्ण कठोर बातें करता है, वहीं टीवी वाला कर्ण दुखी, बेबस और आंसू बहाता नजर आता है.

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पुराने ऑनलाइन फोरम्स में भी शो के इस अंदाज को लेकर दर्शकों ने मजाक किया था. किसी ने कर्ण को 'ever-teary eyed', तो किसी ने 'ever righteous' कहकर तंज कसा. यानी लोगों को लगा कि सीरियल का कर्ण हर वक्त रोने वाला और जरूरत से ज्यादा धर्मात्मा बना दिया गया है.

कुछ दर्शकों ने तो यह तक सवाल किया कि अगर कर्ण हर मौके पर सही बात बोलता है और पांडवों के पक्ष में खड़ा होता दिखे, तो फिर यह महाभारत का कर्ण है या कोई नया किरदार.

मालूम हो कि, सूर्यपुत्र कर्ण शो 2015 से 2016 तक एयर हुआ था. ये सालों पहले बंद हो चुका है. हालांकि इसके एपिसोड्स को आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है. शो में गौतम रोड़े ने कर्ण की भूमिका निभाई थी और उनकी रियल लाइफ पत्नी पलक ने द्रौपदी का किरदार निभाया था.

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