'बाहुबली' से पैन इंडिया में स्टार बने प्रभास की फिल्मों का फैंस को बेसब्री से इंतजार रहता है. उन्होंने पिछले 9 सालों में कई बड़ी बजट की फिल्में कर ली हैं. लेकिन अफसोस की बात ये रही कि इतने समय में उनकी सिर्फ एक फिल्म 'सलार' ही अच्छी साबित हुई. बाकी फिल्मों को लोगों ने उतना नहीं सराहा.
प्रभास की आने वाली फिल्में भी बड़ी बजट वाली हैं. कल उनका जन्मदिन था, इसलिए उसमें से एक फिल्म फौजी का टीजर सामने आया. फौजी में उनका किरदार क्या है, और कहानी में क्या दिखाया जा सकता है इसकी पहली झलक हमें देखने मिली. तो आखिर कैसा लगा प्रभास की अगली फिल्म का टीजर? आइए, बात करते हैं.
कैसे शुरू होता है फौजी का टीजर?
फौजी के टीजर की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में हुई 29 मई 1942 को एडोल्फ हिटलर और सुभाष चंद्र बोस की मीटिंग से होती है. इसमें सुभाष चंद्र बोस हिटलर से मदद मांगते हैं कि वो भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाएं. लेकिन हिटलर ऐसा नहीं करते, उल्टा वो उन्हें ये कहते हैं कि अंग्रेजों संग भारत की लड़ाई एक 'हारी हुई लड़ाई' है.
मगर सुभाष चंद्र बोस उनसे कहते हैं कि वो भारत को आजाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. इसके बाद जापान और ब्रिटेन में हुए युद्ध का जिक्र होता है, जिसे जीतकर जापान ने सिंगापुर पर कब्जा कर लिया था. इसके पीछे की वजह एक भारतीय था, जो एक सैनिक और स्पाई है. सुभाष चंद्र बोस का कहना है कि ब्रिटेन के पास हर स्पाई की जानकारी है, लेकिन उस एक 'फौजी' स्पाई की जानकारी नहीं है जो सुभाष चंद्र बोस का खास है. उसने श्रीमद्भगवद्गीता से स्पाई कोड बनाए हैं, जिसे डीकोड करना अंग्रेजों के बस की बात नहीं है.
हिटलर अब उस फौजी से मिलना चाहता है, लेकिन सुभाष चंद्र बोस उसे बताते हैं कि वो फिलहाल उनके वतन की हिफाजत कर रहा है. इसके बाद हमें फौजी की झलक दिखाई जाती है, जो एक बड़ी सी मशीन गन को लोड कर रहा है ताकि अंग्रेजों को मार सके. वो उनसे कह रहा है- अरे ओ फिरंगी, मैं तुझसे तेरा खून और अपनी आजादी भी लूंगा.
पहली झलक में कैसा लगता है टीजर?
फिल्म फौजी के टीजर की बात करें, तो डायरेक्टर हनु राघवपुडी ने इसे बनाया है जिन्होंने साल 2022 में दुलकर सलमान, मृणाल ठाकुर और रश्मिका मंदाना की सीता रामम भी बनाई थी. उस फिल्म के शॉट्स भी काफी खूबसूरत थे. फौजी में भी उन्होंने ऐसी ही कोशिश की है. टीजर में वो 1940s वाली डिटेल्स साफ झलक रही है. प्रभास जिस तरह से मशीन गन को इस्तेमाल कर रहे हैं, उस टाइम भी उसे वैसे ही चलाया जाता था.
इसके अलावा जो गाड़ियां दिखाई गईं, वो भी फिल्म के टोन को सेट करने में मदद कर रहा है. एडोल्फ हिटलर और सुभाष चंद्र बोस की मीटिंग के दौरान जैसा सेटअप रखा गया है, वो भी तारीफ के काबिल बात है. देखा जाए, तो ये फिल्म आपको उस दौर में लेकर जाने वाली है जब भारत अंग्रेजों से अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था. आप उस फीलिंग में पूरी तरह समा जाने वाले हैं.
क्या है फौजी में निराशा की बात?
हालांकि जो चीज इसमें सबसे ज्यादा निराशाजनक रही, वो था इसका टिपिकल साउथ मसाला फिल्म जैसा माहौल. फौजी के टीजर में सुभाष चंद्र बोस के किरदार में जो शख्स प्रभास के किरदार के बारे में बात कर रहा है, वो उसे वैसे ही इंट्रोड्यूस करता है जैसा आमतौर पर एक साउथ की पिक्चर में होता है. जैसे फिल्म के हीरो को कोई हरा नहीं सकता है, उसे ढूंढ पाना मुश्किल है. उसके जैसा कोई नहीं, जो एक अच्छा सेटअप नहीं है. साथ ही टीजर में हिंदी डबिंग भी कुछ खास नहीं है, जो आपको अंदर से फिल्म के लिए एक्साइट करे.
इसके अलावा प्रभास का लुक भी काफी नकली लगता है. उनके मुंह में सिगरेट है, जो कुछ-कुछ केजीएफ की कॉपी जैसा लगा. उनके जन्मदिन पर ये एक परफेक्ट गिफ्ट तो नहीं लगा. फैंस की तरफ से भी अभी मिक्स रिव्यू देखने मिल रहे हैं. हालांकि उम्मीद है कि जब फिल्म आएगी, तब प्रभास सबको सरप्राइज करें.