शुक्रवार की रात जब दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अचानक ज़ी5 पर रिलीज हुई, तो ऐसा लगा जैसे तीन साल से चल रही एक लंबी लड़ाई आखिरकार खत्म हो गई. पहले पंजाब 95 नाम से बनी ये लंबे समय तक CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के चक्कर में फंसी रही और बोर्ड ने इसमें 127 कट की मांग कर डाली थी.
बिना किसी अनाउंसमेंट, अचानक ओटीटी पर आई सतलुज ने उम्मीद जगा दी थी फाइनली दर्शक वो फिल्म देख पाएंगे जिसकी तारीफ सिनेमा सर्कल के लोग अंदर-अंदर कई सालों से कर रहे हैं. लेकिन कई लोग अभी फिल्म देखने का मन बना ही रहे थे कि रविवार शाम को ज़ी5 ने अचानक भारत में फिल्म हटा दी. ओटीटी प्लेटफॉर्म ने सिर्फ इतना कहा कि 'मौजूदा परिस्थितियों' की वजह से फिल्म उपलब्ध नहीं रहेगी.
अब सतलुज के को-राइटर निरेन भट्ट ने कहा है कि अगर द कश्मीर फाइल्स बिना समस्या के रिलीज हो सकती है तो उनकी फिल्म को भी ये चांस मिलना चाहिए था.
निरेन ने वैरायटी इंडिया से बातचीत में कहा, 'CBFC कभी नहीं बताता कि उसे दिक्कत किस बात से है. कौन-से हिस्से पर आपत्ति है, फैसला कौन ले रहा है... कुछ भी नहीं. अब ज़ी5 भी 'मौजूदा परिस्थितियों' की बात कर रहा है लेकिन ये नहीं बता रहा कि वे परिस्थितियां आखिर हैं क्या. अगर कोई समस्या है, तो बातचीत होनी चाहिए. लेकिन जब सामने वाला सिर्फ चुपचाप आपका काम हटा दे, तो संवाद कैसे होगा?'
निरेन ने बताया कि वो फिल्म के रिलीज होने की उम्मीद छोड़ चुके थे और शुक्रवार शाम ये एक मैसेज से उन्हें पता लगा कि फिल्म रिलीज हो गई है. उन्होंने कहा, 'मेरा पूरा विश्वास है कि इस फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. ये एक बैंक कर्मचारी की कहानी है, जिसने उन परिवारों के लिए लड़ाई लड़ी, जिनके अपने लोगों का गैरकानूनी तरीके से अपहरण कर हत्या कर दी गई थी.'
भट्ट का कहना है कि फिल्म हटने से पहले दर्शकों की प्रतिक्रिया भी यही साबित कर रही थी. उन्होंने कहा, 'लोग सिर्फ यही पूछ रहे थे कि इतनी मानवीय कहानी को आखिर इतने साल क्यों रोका गया?'
निरेन भट्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इस फिल्म का इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतें कर सकती हैं. उन्होंने कहा, 'ये लॉजिक बिल्कुल भी समझ में नहीं आता. अगर द कश्मीर फाइल्स बन सकती है, अगर द केरल स्टोरी बन सकती है तो उन्हें कोई अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हथियार क्यों नहीं कहता? सिर्फ हमारी फिल्म को ही क्यों ऐसा कहा गया?' निरेन ने कहा कि एक सीधी-सच्ची कहानी को रोकने के लिए इतने दूर के अनुमान लगाना बिल्कुल गलत है और फिल्म हटाने का फैसला उल्टा असर कर रहा है.
उन्होंने कहा, 'किसी भी कंटेंट पर रोक लगाने से लोगों की जिज्ञासा और बढ़ जाती है. दर्शकों ने फिल्म को बहुत पसंद किया. हजारों वीडियो और पोस्ट आए, जिनमें लोगों ने लिखा कि फिल्म देखकर वे रो पड़े या लंबे समय तक कुछ बोल नहीं पाए. जब लोग ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर फिल्म नहीं देख पाएंगे, तो जाहिर है कि दूसरे रास्ते तलाशेंगे. यही हो रहा है.'
अपनी बात खत्म करते हुए निरेन ने कहा, 'दुनिया को ऐसी कहानियों की जरूरत है. लेकिन हमारे साथ जो हुआ, उसे देखने के बाद आखिर कौन फिल्ममेकर दोबारा ऐसी फिल्म बनाने की हिम्मत करेगा?'