आज बकिंघम पैलेस ब्रिटिश राजशाही का पर्याय बन गया है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था. क्योंकि, इसकी हालत कभी ऐसी थी कि महारानी विक्टोरिया और अल्बर्ट को इससे नफरत हो गई थी. क्योंकि, इन दोनों को बकिंघम पैलेस को आज के प्रतिष्ठित शाही निवास के रूप में विकसित करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था. हिस्ट्रीएक्स्ट्रा पॉडकास्ट के मुताबिक, इसे शाही निवास तो दूर, कभी महल तक का दर्जा नहीं मिला था. अधिकांश नवविवाहित जोड़ों के लिए, नए घर में जाना एक रोमांचक नई शुरुआत का प्रतीक होता है. लेकिन महारानी विक्टोरिया और प्रिंस अल्बर्ट के लिए , उनके नवविवाहित जीवन की खुशियां उनके ठंडे, दुर्गंधयुक्त और अव्यवस्थित नए घर के कारण धूमिल हो गईं. उनका यह घर था - बकिंघम पैलेस.
बकिंघम पैलेस जैसा हम आज जानते हैं, वह हमें केवल 20वीं शताब्दी में ही देखने को मिला. महारानी विक्टोरिया और अल्बर्ट पहले ऐसे राजा और रानी थे, जिन्होंने इसे अपने मुख्य निवास के रूप में इस्तेमाल किया. इस कपल के आने के बाद ही बकिंघम पैलेस को एक रानी के रहने योग्य घर में बदलने के लिए काफी काम करना पड़ा.विक्टोरिया से पहले, बकिंघम पैलेस आधिकारिक शाही निवास नहीं था. पहले इसे बकिंघम हाउस कहा जाता था. पहली बार 1761 में शाही परिवार के स्वामित्व में आया. मूल रूप से इसे केवल महारानी विक्टोरिया की दादी, महारानी शार्लोट के लिए एक विश्राम स्थल के रूप में बनाया गया था, जिन्हें यह घर बहुत पसंद था और उन्होंने अपने 15 बच्चों में से 14 का पालन-पोषण यहीं किया, जिनमें विक्टोरिया के पिता भी शामिल थे. (Photo - AFP)
1790 के दशक से इसे आधिकारिक तौर पर महल के रूप में जाना जाने लगा. फिर भी सेंट जेम्स पैलेस मुख्य शाही निवास बना रहा. शाही परिवार धीरे-धीरे बकिंघम पैलेस में अधिक से अधिक समय बिताने लगा, हालांकि यह विक्टोरिया के चाचा जॉर्ज चतुर्थ और विलियम चतुर्थ का आधिकारिक निवास कभी नहीं बन पाया.वास्तव में विलियम चतुर्थ इसे एक तरह का सफेद हाथी मानते थे. जब 1834 में जब वेस्टमिंस्टर पैलेस जल गया, तो उन्होंने बकिंघम हाउस को नए संसद भवन के रूप में प्रस्तावित किया, लेकिन सांसदों ने इसे बहुत जर्जर बताकर अस्वीकार कर दिया. तभी भी, महल के विस्तार और जीर्णोद्धार का काम धीरे-धीरे चल रहा था. इस काम का मुख्य चरण आखिरकार मई 1837 में पूरा हुआ. (Photo - Getty)
इस समय तक, सेंट जेम्स पैलेस की आकर्षण क्षमता लगातार कम होती जा रही थी. मुख्य निवास के आसपास का क्षेत्र विकसित हो चुका था, जिससे वहां रहने वाले शाही परिवार के लिए निजता कम हो गई थी और इसकी ट्यूडर वास्तुकला और आग से हुए नुकसान के कारण यह अब रहने के लिए आरामदायक जगह नहीं रह गई थी.इसलिए, 1837 में अपने राज्याभिषेक के बाद, महारानी विक्टोरिया ने अपने मुख्य निवास के रूप में रेनोवेट हुए बकिंघम पैलेस में रहना शुरू कर दिया. शुरुआत में महल इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं था. हालांकि, बकिंघम पैलेस को सम्राटों के लिए उपयुक्त निवास स्थान नहीं माना जाता था, यहां तक कि एक बार जब कोई सम्राट वहां रहने लगा था तब भी नहीं. उस समय महल एक भूलभुलैया जैसा था, जिसमें कई अंधेरे कमरे और अस्पष्ट उपयोग वाले गलियारे थे. इसका मतलब यह था कि सुरक्षा व्यवस्था ढीली थी और दृढ़ निश्चयी घुसपैठियों के लिए महल में प्रवेश करना आसान साबित हुआ. यह वास्तव में आश्चर्यजनक नहीं था कि विक्टोरिया के प्रशंसकों और पीछा करने वालों में से एक, जिसे 'द बॉय जोन्स' के नाम से जाना जाता था, महल में लंबे समय तक रहने में कामयाब रहा. रोटी के कुछ टुकड़े खाकर और शराब पीकर गुजारा करता रहा, जब तक कि रानी की प्रसूति नर्स ने उसे रानी की कुर्सी के नीचे नहीं पाया. (Photo - Getty)
अपनी कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के अलावा, बकिंघम पैलेस विशेष रूप से सर्दियों में बेहद ठंडा होने के लिए कुख्यात था. क्योंकि चिमनियों से इतना धुआं निकलता था कि आग ठीक से जलाई ही नहीं जा सकती थी. सीवर व्यवस्था भी ठीक नहीं थी, और महल में हवा का आवागमन बहुत खराब था और वह दुर्गंधयुक्त था.विक्टोरिया के महल में आने के तुरंत बाद निरीक्षण करने वाले आयुक्तों ने पाया कि कमरों की नियमित रूप से सफाई या धूल झाड़ना नहीं होता था, और खिड़कियां बंद रखी जाती थीं, जिससे सड़े हुए भोजन और बगीचे के कचरे की अप्रिय गंध फैलती रहती थी.कुल मिलाकर, घर का प्रबंधन भी अव्यवस्थित था. कर्मचारियों का समूह ठीक से काम नहीं करता था और अनुशासन की कमी थी. उदाहरण के लिए, बड़े घरों में घरेलू काम आमतौर पर सुबह 10 बजे तक खत्म हो जाते थे, लेकिन बकिंघम पैलेस में घरेलू कामगार दोपहर तक अपना काम खत्म नहीं कर पाते थे.एक टीम खिड़कियों के बाहरी हिस्से को धोती थी और दूसरी टीम खिड़कियों के अंदरूनी हिस्से को धोती थी, इसलिए खिड़कियां कभी भी पूरी तरह से साफ नहीं होती थीं. (Photo - Getty)
प्रिंस अल्बर्ट ने बकिंघम पैलेस को इस तरह से रेनोवेट कराया, जिसमें रानी रह सके. स्पष्ट रूप से, बकिंघम पैलेस को एक रानी के रहने योग्य बनाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी था. प्रिंस अल्बर्ट इंग्लैंड पहुंचने पर इस काम को करने के लिए तैयार थे. अल्बर्ट ने अपनी सुप्रसिद्ध जर्मन दक्षता के साथ महल की कार्यप्रणाली का जायजा लेना शुरू किया और वे बहुत निराश हुए. यह पूरी तरह से एक आपदा थी, इसलिए उन्होंने महलों को और अधिक कुशल बनाने के तरीकों पर विचार किया. पहले, घरेलू कार्यों के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग लोगों के अधिकार क्षेत्र में थे. उदाहरण के लिए, आग जलाने और उसे प्रज्वलित करने का काम अलग-अलग लोग करते थे और टूटी हुई खिड़की की मरम्मत जैसे साधारण कार्यों पर छह अलग-अलग लोगों को हस्ताक्षर करने पड़ते थे.प्रिंस अल्बर्ट ने इसमें बदलाव किया. उन्होंने महल के रखरखाव की अधिकांश जिम्मेदारी एक ही शख्स को दी. इसके लिए उन्होंने महल के चीफ का पद सृजित किया, जिसे स्थायी रूप से महल में ही रहना था. धीरे-धीरे, इमारत की खामियों की पहचान होने के बाद, उसकी हालत में सुधार किया गया. लेकिन शाही जोड़ा फिर भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं था. (Photo - Getty)
शाही दंपति ने महल में सुधार का काम जारी रखा. विक्टोरिया और अल्बर्ट ने मार्बल आर्च को बकिंघम पैलेस के ठीक बाहर स्थित उसकी मूल जगह से हटाकर आज के स्थान, हाइड पार्क में स्थापित किया था. ऐसी अफवाहें थी कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि विक्टोरिया की राजगद्दी से गुजरने के लिए आर्च पर्याप्त चौड़ा नहीं था, लेकिन यह बात गलत साबित हुई. क्योंकि, इसे बकिंघम पैलेस के एक्सपेंशन के लिए जगह बनानी थी, इसलिए उसे शिफ्ट किया गया था. क्योंकि 1847 तक, इसे उनके दरबारियों और लगातार बढ़ते परिवार को आराम से रखने के लिए बहुत छोटा माना जाता था.इस विस्तार का कार्य एडवर्ड ब्लोर नामक वास्तुकार ने किया था, जिन्होंने इससे पहले वेस्टमिंस्टर एबे और लैम्बेथ पैलेस पर काम किया था. उन्होंने पूर्वी विंग का निर्माण किया, जिसमें सामने का प्रसिद्ध केंद्रीय बालकनी शामिल है. इसका उपयोग आज भी महत्वपूर्ण शाही अवसरों पर किया जाता है. यह बालकनी प्रिंस अल्बर्ट का सुझाव था.पूर्वी विंग के निर्माण के बाद भी महल पूरी तरह से परिपूर्ण नहीं था. विक्टोरिया ने अपने वर्तमान अपार्टमेंट की तुलना में इसमें जगह की कमी की शिकायत की. इसलिए एक नए बॉलरूम का निर्माण शुरू हुआ. यह मई 1856 में बनकर तैयार हुआ, बकिंघम पैलेस के शाही स्वामित्व में आने के लगभग एक सदी बाद. (Photo - Pexels)