भूत-प्रेत...पैरानॉर्मल एक्टीविटीज ऐसी चीज हैं, जिसे जिसने जैसे महसूस किया, वैसी उसकी सोच बनी. कई के लिए महज कहानी हैं तो कई इन इंसीडेंट्स को अपने निजी जीवन में महसूस कर चुके हैं. एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन और कॉमेडियन हर्ष गुजराल ने खतरों के खिलाड़ी के हालिया एपिसोड में खुलासा किया कि वो भी एक डरावने दौर से गुजर चुके हैं. उनके साथ भी कुछ साल पहले ऐसा हुआ था जिसके बारे में सोच के ही उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
रात के अंधेरे में एडवेंचर करना पड़ा भारी
जैस्मिन ने बताया कि कॉलेज के दिनों में वो राजस्थान में मौजूद भानगढ़ के किले में गई थीं. इसे एशिया की सबसे डरावनी और भूतिया जगहों में गिना जाता है. ये जानने-समझने के बावजूद कि वो जगह कितनी डरावनी है, और रात में वहां जाना बैन है- जैस्मिन अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ वहां गई थीं.
जैस्मिन ने कहा कि- मैं 19 साल की थी, जब मैं होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी. उस समय हम दोस्तों ने डिसाइड किया था कि हम सब लोग रात में भानगढ़ के किले में जाएंगे. हमें पता था कि रात को वहां जाना अलाउड नहीं है, फिर भी हम गए. वहां को माइलस्टोन्स नहीं हैं. तो हमने एक बुढ़े आदमी से, जिसके पास खूब सारी बकरियां थीं- रास्ता पूछा. उसने कहा- सीधे चले जाओ. लेकिन हम खो गए. पर वही बूढ़ा आदमी हमें फिर मिला. तो उसने मुझे एकदम से पकड़ लिया, और कहा कि तुम ही मेरी भानुमति हो, मैं तुम्हारा ही हजारों सालों से इंतजार कर रहा था. वो मुझे जाने ही नहीं दे रहा था. मैं कसम से बहुत डर गई थी.
हर्ष को खाने पड़े थप्पड़ पर थप्पड़
इसके बाद हर्ष ने अपने साथ हुए इंसीडेंट को शेयर किया. उन्होंने कहा कि- इससे पहले मैं भूतों पर विश्वास नहीं करता था लेकिन जब मेरे साथ ये हादसा हुआ तो मैं बहुत डर गया था. तब मैं दिल्ली में रहकर कॉल सेंटर में नौकरी करता था, मुझे 4-5 हजार रुपये सैलरी मिलती थी. मैं और मेरा दोस्त किराए पर घर ढूंढ रहे थे रहने को, सब महंगे-महंगे मिल रहे थे. फिर हमें एक आंटी मिली और उन्होंने कहा कि हमारे पास सेपरेट कमरे तो नहीं हैं, लेकिन जगह है इतनी कि अगर तुम लोग गद्दे बिछाकर चाहो तो सो जाओ. हम तुमसे सिर्फ 2 हजार रुपये लेंगे. परिवार में तीन लोग थे बस- मां-बेटा और बहू.
'फिर तीन-चार दिन में एक बार हुआ कि रात में सर्दियों के दिनों में पंखा चल गया. हमें लगा आंटी ने चलाया होगा. तो अगले दिन हमने कहा कि- ठंड के दिनों में आप रात में पंखा चला दे रहे हो. क्या हरकतें हैं. तो उन्होंने कहा कि हमने तो चलाई नहीं. तो हमें थोड़ा खटका लगा. फिर ऐसा होने लगा कि रात में कभी चाय बन रही है, अलमारी अपने आप खुल रही है. फिर एक रात हम लोग खाना खाने बैठे थे. तो अचानक से उनकी जो बहू थी उसकी आवाज बदल गई. मैं कसम से बता रहा हूं कि हम तीन लौंडे मिलकर उसे कंट्रोल नहीं पा रहे थे. उसने हमें चांटे मारे हैं. फिर हम जान बचाकर वहां से भागे हैं. अगले दिन जब हम अपना सामान लेने गए तो वही बहू आराम से बैठी नाश्ता कर रही थी. उसे कुछ याद नहीं था.'
जैस्मिन और हर्ष की ये आपबीती सुनकर वहां मौजूद सभी लोग डर गए.