दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज शुक्रवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी. रिलीज के 48 घंटों बाद ये फिल्म जी5 से हटा दी गई. पहले इस फिल्म का नाम पंजाब 95 था और ये चार सालों से सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने की वजह से अटकी हुई थी. रिपोर्ट्स बताती हैं कि बोर्ड ने इसमें 120 से ज्यादा कट्स की मांग की थी. कई साल इंतजार के बाद रिलीज और इस तरह ओटीटी से सतलुज का हटना विवादों के घेरे में है.
अब दिलजीत ने खुलासा किया है कि सतलुज कैसे उनके करियर की सबसे मुश्किल फिल्म साबित हुई है. इस फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें अपना इमोशनल बैलेंस ठीक करने के लिए एक हफ्ते का ब्रेक लेना पड़ा था. दिलजीत ने ये भी बताया कि इस फिल्म की रिसर्च के दौरान वो कई बार भावुक होकर रो पड़े थे क्योंकि फिल्म से जुड़ी सच्ची घटनाएं बेहद दर्दनाक थीं.
दिलजीत ने वैरायटी इंडिया से बातचीत में बताया कि सतलुज के लिए उन्होंने बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स, सच्ची घटनाओं और लोगों के बयान पढ़े थे. उन्होंने कहा, 'उन्हें पढ़ना भी बेहद मुश्किल था. इनमें से ज्यादातर घटनाएं दिल तोड़ देने वाली थीं. मैं उन्हें पूरी तरह समझ भी नहीं पा रहा था. रिसर्च के दौरान कई बार मैं टूट गया, क्योंकि हकीकत बहुत भारी और तकलीफ देने वाली थी.' दिलजीत ने कहा कि फिल्म में जो दिखाया गया है, असलियत उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक थी.
दिलजीत ने बताया, 'हमने जो दिखाया है, वो सिर्फ एक छोटी-सी झलक है. असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है. ये सब पूरे समय मेरे अंदर चल रहा था. ये किसी एक इंसान की नहीं, बल्कि अकल्पनीय हालात में दिखाई गई असाधारण बहादुरी की कहानी है.'
उन्होंने आगे कहा, 'जसवंत सिंह खालड़ा जानते थे कि वो किस खतरे का सामना कर रहे हैं. उन्हें पता था कि उनकी और उनके परिवार की जान जोखिम में है. इसके बावजूद उन्होंने सच का साथ नहीं छोड़ा. ऐसी हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है. ऐसे किरदार को निभाते समय आपके भीतर जिम्मेदारी का एहसास होना जरूरी है.'
दिलजीत ने बताया कि इस फिल्म ने उन्हें फिजिकली और इमोशनली बहुत निचोड़ दिया था. उन्होंने कहा, 'लंबे शूटिंग शेड्यूल थे, मुश्किल हालात थे और सीन्स बहुत इमोशनल थे. लेकिन सबसे ज्यादा असर फिल्म के टॉपिक ने डाला. मुझे लगता है कि मेरे करियर में यह पहली फिल्म है, जिसकी शूटिंग खत्म होने के बाद मुझे खुद को संभालने और नॉर्मल होने के लिए ब्रेक लेना पड़ा.'
दिलजीत ने बताया कि आमतौर पर वो शूटिंग खत्म होते ही अगले प्रोजेक्ट में लग जाते हैं, लेकिन सतलुज के साथ ऐसा नहीं हो पाया.
उन्होंने बताया, 'मैंने एक हफ्ते का ब्रेक लिया. जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाते हुए जो फीलिंग्स मेरे भीतर आई थीं, उन्हें पीछे छोड़ने में वक्त लगा. फिल्म के सीन्स और किरदार लंबे समय तक मेरे साथ बने रहे.'