तमिल सिनेमा के ‘थलपति’ विजय, अब तमिलनाडु की जनता के मुख्यमंत्री बन चुके हैं. राजनीतिक शक्ति के इस तख्त पर बैठने के लिए विजय ने दो साल पहले सिनेमा को बाय-बाय कह दी थी. वही सिनेमा जिसने उन्हें थलपति बनाया था. उनकी आखिरी जन नायगन (हिंदी टाइटल- जन नेता) अभी रिलीज होनी बाकी है. मगर बड़े पर्दे से उतर रहे विजय एक ऐसी जगह खाली करके जा रहे हैं, जिसे तमिल सिनेमा में भरने वाला फिलहाल तो कोई नहीं है― एक सुपरस्टार की जगह.
सिनेमा को फलने-फूलने की खाद भले एक्टर्स और बाकी आर्टिस्ट देते हैं. लेकिन उसे जड़ देने वाले बिजनेस की जमीन, सुपरस्टार होते हैं. विजय, 90 के दशक से ही स्टार बन गए थे. मगर 2000 के बाद, खासकर पिछले एक दशक में तो विजय तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए, रजनीकांत से भी जरूरी सुपरस्टार बन गए थे.
क्यों रजनीकांत जैसे सुपरस्टार बन गए विजय?
पिछले 10 सालों में देखें तो रजनीकांत ने तीन बार, तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी हिट डिलीवर की है― कबाली (2016), 2.0 (2018) और दरबार (2020). विजय ने पिछले 10 सालों में ये कमाल 5 बार किया― मर्सल (2017), बिगिल (2019), मास्टर (2021), लियो (2023) और The GOAT (2024). दिलचस्प ये है कि विजय की फिल्म ने जिस साल तमिलनाडु के बॉक्स ऑफिस चार्ट पर टॉप नहीं किया, उस साल भी टॉप 3 में तो जरूर रही.
बीते 10 सालों में विजय ने हर साल कम से कम एक ब्लॉकबस्टर दी है. इन 10 सालों में रजनी के अलावा विजय ही तमिलनाडु के केवल दूसरे स्टार हैं जिनकी फिल्म ने वर्ल्डवाइड 600 करोड़ का आंकड़ा पार किया है. मगर ऐसे रिकॉर्डतोड़ आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण बात एक और है― 2016 से लगातार, तमिल बॉक्स ऑफिस के टॉप 3 में विजय की एक फिल्म जरूर रही है.
ये बताता है कि बीते 10 सालों से तमिल सिनेमा के लिए वो सबसे कंसिस्टेंट स्टार रहे हैं. बॉलीवुड से लेकर साउथ की दूसरी इंडस्ट्रीज तक, 2016 के बाद से, किसी भी इंडस्ट्री के लिए, कोई एक स्टार, इतना भरोसेमंद नहीं रहा है! और एक्टिंग छोड़कर, मुख्यमंत्री बनने जा रहे विजय से मिलने वाले भरोसे की कमी ही तमिलनाडु फिल्म इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा खलने वाली है.
तमिल सिनेमा का सुपरस्टार-क्राइसिस
विजय के जाते ही तमिल इंडस्ट्री की तरफ एक स्टार क्राइसिस मुंह बाए देख रहा है. इस इंडस्ट्री की 20 सबसे बड़ी फिल्मों में से 15 रजनीकांत और विजय की हैं. लेजेंड कमल हासन की बस एक फिल्म इस लिस्ट में आती है― विक्रम. लेकिन इसे कमल से ज्यादा, डायरेक्टर लोकेश कनगराज के फिल्म यूनिवर्स का कमाल ही समझिए. क्योंकि पिछले 10 सालों में अकेले लीड एक्टर के तौर पर कमल की बॉक्स ऑफिस पावर बहुत ठंडी पड़ चुकी है.
इन दोनों के बाद तमिल इंडस्ट्री का सबसे बड़ा स्टार एक ही है― अजित कुमार. लेकिन कार रेसिंग, बाइक राइड्स और तमाम अलग-अलग बिजनेस में घुसे अजित खुद कभी अपने स्टारडम को लेकर पैशनेट नहीं रहे. ऊपर से फैन्स ने स्टारडम का बोझ बेमतलब डाल दिया, जिसे वो भी आज जबरदस्ती ढो रहे हैं.
उनके बाद इंडस्ट्री के 3 बड़े नाम हैं― सूर्या, विक्रम और धनुष. सूर्या से इंडस्ट्री को लीड करने वाला स्टार बनने का खेल, खेला नहीं जा रहा. विक्रम को एकदम आउट ऑफ बॉक्स काम करने की ऐसी सूझी है कि वो बॉक्स ऑफिस पर गायब होते जा रहे हैं. और धनुष के साथ वही दिक्कत है, जिसकी वजह से तमिलनाडु में 50 साल में पहली बार DMK-AIADMK के बिना सरकार बनने जा रही है.
धनुष उसी आदर्शवादी सोशल मैसेज वाले सिनेमा में सुख खोज रहे हैं, जिससे दर्शक भी ऊबने लगे हैं. यंग तमिल स्टार्स में सबसे बड़ी इंटरनेशनल पॉपुलैरिटी वाले धनुष की फिल्में मैसेज की उस ऊंचाई पर निकल जाती हैं, जहां से एंटरटेनमेंट बहुत छोटा दिखने लगता है. मैसेज देता हुआ, घनघोर एक्टिंग कर रहा एक्टर तालियां तो बटोर सकता है. मगर थिएटर्स की एक-एक सीट वो तभी भर पाएगा जब वो जनता को एंटरटेन करेगा. उनके डेली दुख को 3 घंटे के लिए बिल्कुल भुला देने वाली फिल्म डिलीवर कर पाएगा.
तमिल सिनेमा की नई लीग में भी स्टार्स का अभाव
2010 के बाद आए तमिल फिल्म स्टार्स में सिर्फ शिवकार्तिकेयन ही ऐसे हैं जो लगातार एक दशक से कामयाब फिल्में डिलीवर कर रहे हैं. साल 2000 के बाद आए तमिल फिल्म स्टार्स में सिर्फ शिवकार्तिकेयन ही हैं जिनकी फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ का लैंडमार्क पार किया है. लेकिन अमरन (2024) के अलावा, लॉकडाउन के बाद से वो भी थोड़े कमजोर नजर आ रहे हैं. प्रदीप रंगनाथन ने बैक टू बैक 100 करोड़ वाली फिल्मों की हैट्रिक लगाई तो लोग उन्हें ‘अगला रजनीकांत’ बोलने लगे, मगर चौथी फिल्म में वो नेक्स्ट लेवल पर जाने की बजाय, पिछले लेवल से भी नीचे चले गए.
घूम फिर कर तमिल फिल्म बिजनेस फिर रजनीकांत पर केंद्र होने वाला है. रजनी अब पहले जितने कंसिस्टेंट हो भी जाएं, तो केवल एक अकेले सुपरस्टार के भरोसे कोई फिल्म इंडस्ट्री नहीं चलती! तमिलनाडु जैसे धुआंधार फिल्मची राज्य में फैन्स अपने सुपरस्टार्स को पूजते हैं, उन्हें अपनी पर्सनल मोटिवेशन, पब्लिक आइकॉन बनाते हैं, उनके लिए लड़ते हैं― सिनेमा वहां एक इमोशन है. रजनीकांत पिछले 50 सालों से ये चेहरा बने रहे. करीब 30 साल पहले से विजय ने ये जगह ली.
इस बीच आए बाकी लोग तमिल सिनेमा फैन्स के इमोशन को इस शानदार तरीके से नहीं संभाल पाए. तमिल डायरेक्टर्स पहले ही अपनी बड़ी फिल्मों के लिए बॉलीवुड और तेलुगु के बड़े स्टार्स से हाथ मिलाने लगे हैं. अब विजय बड़े पर्दे से उतरकर, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जनता के प्यार का चेहरा बनेंगे. लेकिन बड़े पर्दे पर, तमिलनाडु के बॉक्स ऑफिस पर विजय एक बहुत बड़ी जगह खाली छोड़ जा रहे हैं. जिसे भरने वाला कोई चेहरा तमिल सिनेमा में फिलहाल तो नहीं दिखता. वक्त ही बता पाएगा कि तमिल इंडस्ट्री के इस स्टार-क्राइसिस का जवाब बनकर कौन आगे आता है.