हाल ही में कई सेलेब्रिटीज ने NEET पेपर लीक के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन किया है, लेकिन आमिर खान की बेटी इरा खान ने इस पर चुप रहना ही बेहतर समझा. अपने इस फैसले की वजह बताते हुए इरा ने इंस्टाग्राम पर कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ क्यों नहीं कहा. उन्होंने कहा, 'मैं न तो न्यूज देखती हूं और न ही सोशल मीडिया.'
एक सवाल का जवाब देते हुए कि 'मैं विरोध प्रदर्शनों के बारे में क्यों नहीं बोल रही हूं?' इरा ने माना कि हालांकि वह अक्सर मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) के लिए आवाज उठाती हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगा कि NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी बातचीत में उनका कोई खास योगदान हो सकता है.
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगा कि मेरे पास कहने के लिए कुछ ऐसा है जिससे बातचीत में कोई फायदा हो. खासकर इसलिए क्योंकि मेरे मन में इसे लेकर कोई खास भावना नहीं है.'
आमिर खान की बेटी ने क्या कहा?
अपनी बात को और साफ करते हुए इरा ने बताया कि वह जानबूझकर सोशल मीडिया पर हिंसा और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी खबरें या वीडियो देखने से बचती हैं. उन्होंने कहा कि वह ऐसा इसलिए करती हैं क्योंकि इस तरह का कंटेंट उन्हें भावनात्मक रूप से परेशान कर देता है और उन्हें बेबस महसूस कराता है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्हें पता है कि क्या हो रहा है और वह अपने तरीके से घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं.
इरा ने कहा, 'परेशान और बेबस हुए बिना, लेकिन चीजों को नजरअंदाज भी न करने का मेरा तरीका यह है कि मैं अपनी एनर्जी और अपना ध्यान दूसरी तरफ़ लगा लेती हूं.'
एक ऐसी घटना को याद करते हुए जिसने उन्हें बहुत प्रभावित किया, इरा ने बताया कि एक रिश्तेदार ने उन्हें एक रील भेजी थी जिसमें उनकी कजिन को एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा, 'उसे शायद एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया जा रहा था और मैं घबरा गई थी. जैसे ही मुझे पता चला कि वह सुरक्षित है, मैं ठीक हो गई और काम पर चली गई.' इरा ने यह भी कहा कि उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान इसलिए नहीं दिया क्योंकि उन्हें नहीं लगा कि उनके बोलने से कोई खास असर पड़ेगा.
उन्होंने आगे माना कि वह उस दबाव को महसूस नहीं कर पातीं जो छात्र कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी के दौरान झेलते हैं. साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि सरकार और छात्रों के बीच बेहतर बातचीत होनी चाहिए. अपना वीडियो खत्म करते हुए इरा ने कहा, 'मुझे सच में उम्मीद है कि यह मामला कम से कम भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक तकलीफ के साथ सुलझ जाए.'
वीडियो के साथ, इरा ने माना कि किसी मुद्दे से खुद को दूर रखने का विकल्प होना एक विशेषाधिकार है. कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'मैं समझती हूँ कि ऐसा कर पाना, इसकी गुंजाइश होना... या नजरें फेर लेने का विकल्प होना... एक विशेषाधिकार है. मैं यह पता लगाने की कोशिश कर रही हूं कि मेरे मूल्यों के हिसाब से मेरी सबसे मददगार भूमिका क्या हो सकती है और मैं वही करूंगी.'
इरा खान मेंटल हेल्थ एडवोकेट हैं और मुंबई स्थित गैर-लाभकारी संस्था 'अगात्सु फाउंडेशन' की संस्थापक और CEO हैं. यह संस्था मेंटल हेल्थ सपोर्ट को ज्यादा सुलभ बनाने और उससे जुड़े कलंक को कम करने के लिए काम करती है.