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'मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी' रिव्यू: वक्त को थाम लेती है हिंदुस्तानियों की कलाई पर बंधे इतिहास की कहानी

जिम सर्भ और नसीरुद्दीन शाह स्टारर वेब सीरीज मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी रिलीज हो चुकी है. रॉबी ग्रेवाल के डायरेक्शन में बनी यह सीरीज भारत के अपने स्वदेशी घड़ी ब्रांड 'टाइटन' के बनने की बेहद रोमांचक और इमोशनल कहानी लेकर आई है. कॉर्पोरेट ड्रामा के कवर में ये इंसानी भावनाओं की बड़ी दमदार कहानी है.

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मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी रिव्यू (Photo: ITGD)
मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी रिव्यू (Photo: ITGD)
फिल्म:मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी
4/5
  • कलाकार : नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ, वैभव तत्ववादी, कावेरी सेठ, लक्षवीर सरन
  • निर्देशक :रॉबी ग्रेवाल

रिव्यू के लिए कंटेंट देखने के शौक में एक बीमारी भी हम फिलमचियों को लग जाती है— कंटेंट में बहुत बारीकी से खोट निकालना. मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी की शुरुआत में भी ऐसे खोट दिखने शुरू हुए थे. जिम सर्भ और बाकी एक्टर्स के चेहरों पर उम्र बढ़ने के साथ कोई बदलाव नहीं दिखते. 1980 के दशक से शुरू होकर 2011 तक पहुंचने वाली इस कहानी में विजुअल्स देखकर बता पाना मुश्किल है कि वक्त बदल चुका है. मगर अ टाइटन स्टोरी थोड़ी ही देर में आपको ऐसा लपेटती है कि फिर लगातार देखे बिना रह पाना मुश्किल लगने लगता है.

घड़ियों का एक टॉप ब्रांड बनने वाली कंपनी की कहानी वैसे तो कॉर्पोरेट ड्रामा के बॉक्स में ही रखी जा सकती है. लेकिन अ टाइटन स्टोरी में रॉबी ग्रेवाल ने कॉर्पोरेट ड्रामा को, ह्यूमन ड्रामा बनाए रखने की कला बखूबी साधी है. स्वर्गीय जे आर डी टाटा भले उद्योगपति थे, लेकिन आजादी के बाद किसी नए प्रोजेक्ट की तरह खड़े होते भारत के लिए उनके योगदान की कहानियां खूब सुनने-पढ़ने में आती हैं. मगर उन्होंने किस तरह जरक्सेस देसाई के 'मेड इन इंडिया' घड़ी बनाने के सपने को गाइड किया, ये कहानी स्क्रीन पर इतनी एंगेजिंग निकलेगी ये नहीं सोचा था.

वक्त को कलाई पर बांधने की कहानी 
शो में नसीरुद्दीन शाह जे आर डी टाटा के रोल में हैं. जिम सर्भ ने रॉकेट बॉयज में होमी भाभा के बाद, अब एक और पारसी आइकॉन जरक्सेस देसाई का रोल निभाया है. इन दोनों के अलावा टाइटन की कहानी लिखने वाले कई रियल किरदारों के फिक्शनल वर्जन भी हैं. आकाश बंसल (वैभव तत्ववादी), जरक्सेस के सपने में पहले साथी हैं. एक सीक्वेंस में उनकी टीम उन्हें 'टाइटन की मां' बताती है. मेघा म्हात्रे (कावेरी सेठ) मार्केटिंग डिपार्टमेंट संभालती हैं और जरक्सेस-आकाश की टीम में सबसे पहली एम्प्लॉयी बनती हैं. दूसरा एम्प्लॉयी बनकर इंजीनियर गौरव धर (लक्षवीर सरन) आते हैं. पहले एपिसोड से ये टीम जब एक घड़ी बनाने का सपना लेकर सफर पर निकलती है, तभी से आप इस सपने के साथ हो लेते हैं.

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जरक्सेस को टाटा साहब ने उनका एक डूबता वेंचर बचाने को दिया है, लेकिन वो घड़ी बनाने का आइडिया सामने रख देता है. मजबूत सरकारी नौकरी कर रहा आकाश जरक्सेस के भरोसे पर सब छोड़-छाड़ के आ जाता है. लेकिन टाटा साहब ने अभी इस आइडिया पर अप्रूवल ही नहीं दिया और विदेश निकल लिए हैं. उधर टाटा को स्विस घड़ी कंपनी के मालिक की ये बात दिल पर लग जाती है कि भारत कभी वर्ल्ड क्लास घड़ी बना ही नहीं सकता.

मेघा की मां का जिंदगी में बस एक ही पैशन है— अपनी बेटी की शादी करवाना. लेकिन मेघा को किसी मर्द पर भरोसा नहीं है, उसे खुद की पहचान बनानी है. आकाश इंजीनियर है और मशीनों की संगत में ही रहना चाहता है. ये सारे सपने जहां आकर मिलते हैं, उस जमीन पर एक पूरी तरह इंडियन घड़ी बनाने का सपना नींव पाता है. क्योंकि उससे पहले घड़ी बना रहीं इंडियन कंपनियों के साथ कोई न कोई विदेशी पार्टनर जुड़ा था.

अभी तो सिर्फ टीम जुटी है, लोन लिया जाना है. फैक्ट्री के लिए जमीन चाहिए, जहां मॉइस्चर-डस्ट न हो— घड़ी के पार्ट्स पर इन सब चीजों का असर पड़ता है. लोग चाहिए जो घड़ी बना सकें और इस बारीक काम के लिए उनके हाथ भी साधने होंगे. अनुभवी उस्तादों की जरूरत होगी. और एक नाम भी तो तय करना है जो सिर्फ कंपनी के प्रोडक्ट की नहीं, उस फीलिंग की पहचान हो जिसके लिए जरक्सेस और टाटा साहब ने इस सपने को पंख दिए.

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अ टाइटन स्टोरी की सबसे बड़ी खासियत यही है कि ये कहानी को ह्यूमन इमोशन्स और कनफ्लिक्ट के जरिए डील करती है, बिजनेस स्टोरी की तरह नहीं. बीच में खूबसूरत-इमोशनल पर्सनल कहानियां हैं.

एक प्यारी ओल्ड स्कूल लव स्टोरी, एक गुरु-चेले का बेहतरीन रिश्ता जो दिमाग का कोहरा छांटता है, एक याद्दाश्त खोते बाप और अपने सपने के पीछे उड़ते उसके बेटे का इमोशनल रिश्ता, एक पत्नी भी है जो जानती है कि उसका पति अपने सपने का नहीं हुआ, तो पूरी तरह उसका भी नहीं हो पाएगा, एक विदेशी टीचर को इडली-सांभर की लत लगवा देने वाले इंडियन स्टूडेंट्स की कहानी.

इनमें से हर एक कहानी आपके चेहरे पर मुस्कुराहट, आंखों में हल्की सी नमी, दिल में एक खुशनुमा फीलिंग और दिमाग को शानदार कंटेंट देखने की संतुष्टि देकर जाती है. इस तरह अ टाइटन स्टोरी एक ऐसी वेब सीरीज बन जाती है कि इससे आपका मन ही नहीं भरता. आप खुद से सवाल पूछते मिलते हैं— एक कॉर्पोरेट ड्रामा इतना ह्यूमन और इमोशनल भी हो सकता है? और अ टाइटन स्टोरी के आखिरी एपिसोड के खत्म होते क्रेडिट्स आपके चेहरे की लंबी स्माइल देख रहे होते हैं.

दमदार एक्टर्स ने डाली शो में जान 
एक्टिंग डिपार्टमेंट में नसीर साहब अब वो नाम बन गए हैं कि उनके बारे में कुछ कहना नए शब्द गढ़ने की डिमांड करता है. उन्हें टाटा के रोल में देखकर बस यही लगता है कि ऐसा मेंटोर मिल जाए तो करियर ही नहीं, जीवन भी तर जाएगा. और जिम सर्भ अपने सपने के लिए सनक की (और एक-आध बार एरोगेन्स की भी) हद तक जाने वाले किरदार को वही शिद्दत देते हैं जो आपने रॉकेट बॉयज में देखी थी.

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वैभव, कावेरी और लक्षवीर का काम भी शो का जादू बुनने में पूरी तरह काम आता है. कॉमिक किरदारों के लिए पॉपुलर परेश गणात्रा का दमदार किरदार बड़ा सरप्राइज है. अश्वथ भट्ट और जॉय सेनगुप्ता अपने सीन्स में इतने दमदार हैं कि उन्हें और देखने का मन करता है. टाइटन के इस सपने में विराफ़ पटेल एक फ्रेश एनर्जी से भरा किरदार बनकर आते हैं और आपका दिल जीत ले जाते हैं.

मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी, ऑडियंस का फेवरेट शो बनने का दम रखता है. इसके बारे में ज्यादा कुछ पढ़ने-सुनने से अच्छा है सीधा देख डालिए, ताकि फिर इसपर आगे बातचीत हो.

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