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Clayface Review: बदले की आग में बना राक्षस, जोकर के बाद DC की सबसे खौफनाक फिल्म

DC स्टूडियो ने दर्शकों को कई शानदार कहानियां दी हैं और अब 'क्लेफेस' भी इसी कड़ी में शामिल हो चुकी है. इस फिल्म में दर्शकों को हॉरर के साथ सुपरहिरो की कहानी देखने को मिलेगी, और जोकर की टक्कर का एक और खतरनाक 'विलेन' दिखेगा. कैसी है फिल्म? पढ़िए हमारा रिव्यू...

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टॉम हैरिस ने मैट के किरदार को बखूबी निभाया है.(Photo Imbd)
टॉम हैरिस ने मैट के किरदार को बखूबी निभाया है.(Photo Imbd)

DC स्टूडियो अपनी सुपरहीरो फिल्मों के लिए जाना जाता है. इसने एक से बढ़कर एक फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया है. सुपरमैन और बैटमैन से लेकर पीसमेकर और द पेंगुइन तक, DC ने कई ऐसी कहानियां पेश की हैं, जो दर्शकों को पसंद आई हैं. अब इस लिस्ट में 'क्लेफेस' का नाम भी जुड़ गया है. यह फिल्म दिखाती है कि सुपरहीरो की दुनिया में हॉरर का तड़का भी लगाया जा सकता है.

डायरेक्टर जेम्स वॉटकिंस ने इस फिल्म में गोथम शहर की एक ऐसी दुनिया दिखाई है, जहां इंसाफ की उम्मीद करना भी मुश्किल लगता है. वहीं, टॉम राइस हैरिस ने मैट हेगन के किरदार में एक ऐसे इंसान की कहानी दिखाई है, जिसकी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है कि वह पूरी तरह टूट जाता है. धीरे-धीरे यही टूटन उसे एक खतरनाक एंटी-हीरो बना देती है. फिल्म में जिस तरह हॉरर, हिंसा और एक इंसान के बदलते व्यक्तित्व को दिखाया गया है, वह इसे खास बनाता है. यह फिल्म जोकिन फीनिक्स की 'जोकर' की तरह DC की यादगार फिल्मों में शामिल होने की क्षमता रखती है.

क्या है फिल्म की कहानी?
'क्लेफेस' की कहानी मैट हेगन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुका एक एक्टर है. उसे एक बड़ी फिल्म में काम करने का मौका मिलता है, जिससे उसका करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंचने लगता है. उसकी एक्टिंग को भी खूब सराहना मिलती है और उसे ऑस्कर के लिए नॉमिनेशन तक मिल जाता है.

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मैट की जिंदगी में सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, लेकिन उसकी सफलता की कहानी ज्यादा समय तक नहीं चल पाती. गोथम लौटते वक्त उसकी मुलाकात एक गैंगस्टर से होती है. इस दौरान उस पर एक खतरनाक हमला होता है, जिसमें उसका चेहरा बुरी तरह खराब हो जाता है. इस हादसे के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है.

एक तरफ उसका चेहरा बदल जाता है, तो दूसरी तरफ उसके खिलाफ नेगेटिव माहौल बनने लगता है. इसका सीधा असर उसके एक्टिंग करियर पर पड़ता है और वह धीरे-धीरे बर्बादी की तरफ बढ़ने लगता है. मैट अपनी पुरानी पहचान खोना नहीं चाहता. वह किसी भी तरह अपना चेहरा पहले जैसा करना चाहता है, ताकि उसे दोबारा वही जिंदगी मिल सके.

हर तरफ से निराश होने के बाद मैट डॉ. कैटलिन कॉर (नाओमी एकी) की मदद लेता है. कैटलिन एक वैज्ञानिक है, जो एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट के जरिए उसका चेहरा ठीक करने की कोशिश कर सकती है. मैट को उम्मीद होती है कि इस इलाज से उसकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आएगी, लेकिन होता इसके बिल्कुल उलट है.

इलाज उसके लिए एक नई मुसीबत बन जाता है. धीरे-धीरे उसके भीतर का गुस्सा और अंधेरा उस पर हावी होने लगता है. जो इंसान कभी अपनी पहचान और करियर बचाने की कोशिश कर रहा था, वही अब उन लोगों से बदला लेना चाहता है, जिन्हें वह अपनी बर्बादी का जिम्मेदार मानता है. यहीं से कहानी एक डरावना मोड़ लेती है.

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हॉरर और खून-खराबे का जबरदस्त तड़का
'क्लेफेस' में हॉरर का माहौल शुरू से ही बना रहता है. फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जिन्हें देखना हर किसी के लिए आसान नहीं होगा. खून-खराबे और हिंसा के साथ-साथ कहानी में ऐसे पल भी आते हैं, जो दर्शकों को बेचैन कर देते हैं. हालांकि, बीच-बीच में कुछ हल्के-फुल्के सीन भी देखने को मिलते हैं, जो फिल्म के गंभीर माहौल को थोड़ा हल्का करते हैं.

जेम्स वॉटकिंस शुरुआत में ही दर्शकों को इस खौफनाक दुनिया से रूबरू करा देते हैं. जब गैंगस्टर मार्कोस स्जाबो मैट हेगन पर हमला करता है, तो फिल्म में हिंसा का ऐसा रूप देखने को मिलता है, जो किसी स्लैशर हॉरर फिल्म की याद दिलाता है. इसके बाद मैट के बदले हुए चेहरे को भी काफी विस्तार से दिखाया जाता है.

एक वक्त पर अपनी खूबसूरती और नीली आंखों के लिए पहचाना जाने वाला मैट अब अपने ही चेहरे से परेशान हो जाता है. यह बदलाव सिर्फ उसके लुक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी पहचान, आत्मविश्वास और पूरी जिंदगी पर असर डालता है. धीरे-धीरे वह खुद को ही खोने लगता है. फिल्म इस बात को अच्छी तरह दिखाती है कि किसी इंसान की पहचान उससे छिन जाए, तो उसका मानसिक संतुलन किस तरह बिगड़ सकता है.

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फिल्म की एक और खास बात गोथम शहर का माहौल है. यहां हर तरफ अव्यवस्था दिखाई देती है. सड़कों पर गंदगी है और सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. इस वजह से फिल्म का माहौल काफी हद तक 'जोकर' की याद दिलाता है. दोनों फिल्मों में समाज की बदहाली, अन्याय और भ्रष्ट व्यवस्था को दिखाया गया है. हालांकि, 'क्लेफेस' इन मुद्दों को हॉरर और एक इंसान के खतरनाक बदलाव के जरिए पेश करती है.

कहानी की शुरुआत में ही मिल जाते हैं कई संकेत
फिल्म की कहानी में शुरुआत से ही ऐसे कई संकेत दिए जाते हैं, जो आगे चलकर अहम साबित होते हैं. लेकिन परेशानी यह है कि कुछ संकेत इतने साफ हैं कि दर्शक आसानी से अंदाजा लगा लेते हैं कि आगे क्या होने वाला है.

उदाहरण के लिए, शुरुआत में मैट हेगन एक टॉक शो के दौरान बदले को लेकर एक खास बात कहता है. इसे सुनते ही अंदाजा लगने लगता है कि कहानी के किसी अहम मोड़ पर इस बात का दोबारा जिक्र जरूर होगा. ऐसा लगता है कि फिल्म के मेकर्स दर्शकों को कुछ जरूरी बातें पहले ही समझा देना चाहते हैं.

मैट और कैटलिन के बीच एक-दूसरे के सामने झुकने की आदत को भी कहानी में खास अहमियत दी गई है. हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी में आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. अच्छी बात यह है कि फिल्म की रफ्तार काफी तेज है. कहानी लगातार आगे बढ़ती रहती है, इसलिए दर्शकों को इन कमियों पर ज्यादा देर तक सोचने का मौका नहीं मिलता.

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टॉम राइस हैरिस ने एक्टिंग से डाली जान
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत टॉम राइस हैरिस की एक्टिंग है. उन्होंने मैट हेगन के किरदार को काफी अच्छे तरीके से निभाया है. शुरुआत में मैट एक टैलेंटेड एक्टर के रूप में नजर आता है, जिसे अपनी काबिलियत और मेहनत पर पूरा भरोसा है. लेकिन हादसे के बाद उसकी पूरी दुनिया बदल जाती है.

उसके भीतर का गुस्सा, निराशा और हालात के सामने बेबस होने का एहसास धीरे-धीरे उसके व्यवहार में नजर आने लगता है. चेहरे पर भारी प्रोस्थेटिक्स होने के बावजूद टॉम अपनी आंखों और हाव-भाव के जरिए किरदार की भावनाओं को पर्दे पर उतारने में कामयाब रहते हैं. उनके अभिनय की वजह से मैट का दर्द और उसका खतरनाक रूप दोनों असर छोड़ते हैं.

वहीं, नाओमी एकी ने डॉ. कैटलिन कॉर के किरदार को अच्छी तरह निभाया है. उनका किरदार कहानी में अहम भूमिका निभाता है और मैट के बदलाव को समझने में मदद करता है. दूसरी तरफ, डेविड डेनसिक गैंगस्टर मार्कोस स्जाबो के रूप में डर पैदा करने में कामयाब रहते हैं. उनकी मौजूदगी फिल्म के नकारात्मक माहौल को और मजबूत बनाती है.

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