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पिछले 10 साल में एक भी सोलो फिल्म नहीं हुई फ्लॉप, Mardaani 3 से रानी मुखर्जी फिर करेंगी कमाल!

‘मर्दानी 3’ से रानी मुखर्जी फिर साबित करने उतर रही हैं कि वो फीमेल लीड फिल्मों की तगड़ी स्टार हैं. लंबे गैप्स के बावजूद उनका रिकॉर्ड लगातार हिट फिल्मों का रहा है. ट्रेलर को मिले रिस्पॉन्स के बाद नजरें अब इस पर हैं कि शिवानी शिवाजी रॉय की वापसी क्या कमाल करती है.

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रानी की सोलो फिल्में पिछले 10 सालों से नहीं हुईं फ्लॉप (Photo: ITGD)
रानी की सोलो फिल्में पिछले 10 सालों से नहीं हुईं फ्लॉप (Photo: ITGD)

बॉलीवुड की सबसे पावरफुल एक्ट्रेसेज में से एक रानी मुखर्जी, ‘मर्दानी 3’ के साथ फिर बड़े पर्दे पर लौट रही हैं. रानी पिछली बार 3 साल पहले फिल्म ‘मिसेज चैटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में नजर आई थीं. इस फिल्म ने उन्हें सिर्फ बॉक्स ऑफिस सक्सेस ही नहीं, एक नेशनल अवॉर्ड भी दिलाया. तब एक मां के रोल में, इमोशनल कहानी का हिस्सा बनीं रानी, एक बार फिर से सुपरकॉप शिवानी शिवाजी रॉय के रोल में नजर आने वाली हैं.

इस रोल ने उन्हें साल दर साल, बड़े पर्दे से लेकर टीवी तक खूब पॉपुलैरिटी दिलाई है. रानी की इस पॉपुलैरिटी की चर्चा तो होती है, लेकिन शायद लंबे गैप्स के बाद फिल्में करने की वजह से उनकी बॉक्स ऑफिस सक्सेस पर लोगों का ध्यान कम जाता है. और इस बात पर भी कि एक सोलो लीड के तौर पर वो कितनी कामयाब हैं.

रानी मुखर्जी – द सोलो स्टार
90s में डेब्यू करने वाली रानी मुखर्जी का करियर ग्राफ बहुत दिलचस्प है. उनके शुरुआती किरदार बाकी एक्ट्रेसेज जैसे ही थे, लीड हीरो की ‘हीरोइन’ वाले. फिर वो आमिर खान के साथ ‘गुलाम’ हो, शाहरुख खान के साथ ‘कुछ कुछ होता है’ या सलमान के साथ ‘हेलो ब्रदर’. लेकिन 2000s से उनके किरदार कुछ बदलने शुरू हुए.

मेनस्ट्रीम बॉलीवुड फिल्मों में भी उनके किरदार अब सिर्फ हीरो की कहानी नहीं आगे बढ़ा रहे थे, उनकी अपनी भी कहानी थी. ‘हम तुम’, ‘ब्लैक’, ‘बंटी और बबली’ या ‘कभी अलविदा ना कहना’ जैसी फिल्मों में रानी के किरदार ऐसे ही थे. मेनस्ट्रीम बॉलीवुड डिज़ाइन की फिल्मों में, अपनी धुरी पर टिके मजबूत किरदार.

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फिर आया 2010 का दशक, जिसमें रानी के किरदार अपनी ही कहानी कहने वाले थे. यानी फिल्मी डिक्शनरी में अब रानी अपनी फिल्मों की सोलो हीरो थीं— स्टार थीं. ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘अय्या’, ‘मर्दानी’, ‘हिचकी’ या फिर ‘मिसेज चैटर्जी वर्सेज नॉर्वे’. इसी दौर में रानी की तरह कंगना रनौत और विद्या बालन जैसी एक्ट्रेसेज का करियर ट्रैक भी बदला. धीरे-धीरे विद्या या कंगना की वो फिल्में फेल होने लगीं जिनमें वही स्टार थीं, लेकिन रानी मुखर्जी की सोलो लीड फिल्में चलती रहीं.

बॉक्स ऑफिस की ‘मर्दानी’
2010 के बाद रानी ने मेल स्टार्स के साथ दो ही फिल्में की हैं— आमिर खान के साथ ‘तलाश’ (2012) और सैफ अली खान के साथ ‘बंटी और बबली 2’ (2021). जबकि ‘बॉम्बे टॉकीज’ (2013) अपने वक्त में एक्सपेरिमेंटल एंथोलॉजी फिल्म थी, जिसे बॉक्स ऑफिस मैटेरियल की तरह देखा ही नहीं जाता. इन तीन को हटा दें तो 2011 से अब तक रानी 6 फीमेल लीड फिल्में कर चुकी हैं. इनमें से सिर्फ एक फ्लॉप रही है— ‘अय्या’ (2012).

‘नो वन किल्ड जेसिका’ (2011) में रानी और विद्या साथ थीं. ये फिल्म उस साल की स्लीपर हिट थी. 2014 में रानी ने सोलो लीड स्टार बनकर हिट कॉप ड्रामा ‘मर्दानी’ डिलीवर की. ‘हिचकी’ (2018) बड़े अलग सब्जेक्ट के साथ हिट हो गई, जबकि ट्रेड को लगा नहीं था कि ये कामयाब हो पाएगी.

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जब तक ‘मर्दानी 2’ (2019) आई, रानी मुखर्जी फीमेल लीड फिल्मों की कामयाब स्टार कही जा रही थीं. इसलिए ‘मर्दानी 2’ का हिट होना हैरान करने वाला नहीं था. लेकिन एक बेहद अलग सब्जेक्ट पर बनी ‘मिसेज चैटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ (2023) की बॉक्स ऑफिस सक्सेस वाकई रानी की स्टार पावर थी. बतौर फीमेल लीड स्टार रानी की पोजिशन सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही दमदार नहीं है, बल्कि इस बॉक्स ऑफिस पावर की वजह से वो नई और अलग कहानियों को बड़े पर्दे तक ला सकती हैं.

शुक्रवार को आ रही ‘मर्दानी 3’ के ट्रेलर को बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है. इस फ्रेंचाइजी को जनता से खूब प्यार मिला ही है और रानी की दमदार प्रेजेंस एक एक्स्ट्रा भरोसा जोड़ देती है. देखना है कि सोलो स्टार रानी की ‘मर्दानी 3’ को कैसी कामयाबी मिलती है.

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