बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा मधुबाला आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. उनकी खूबसूरती, अदाकारी और दिलीप कुमार के साथ उनकी अधूरी मोहब्बत के किस्से आज भी चर्चा में रहते हैं. लेकिन अब उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएंगी. मधुबाला की बहन मधुर भूषण ने बताया है कि एक्ट्रेस के इंतकाल के बाद उनके पिता अताउल्लाह खान का क्या हाल हुआ था. वह सालों तक बेटी की कब्र पर जाते, वहां कुर्सी लगाकर बैठते और फूट-फूटकर रोते थे.
बेटी की कब्र पर बैठकर घंटों रोते थे पिता
मधुर भूषण ने विक्की लालवानी के साथ बातचीत में बताया कि उनके पिता बेहद सख्त मिजाज के थे, लेकिन बच्चों से बेइंतहा प्यार करते थे. मधुबाला की मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था. वह खुद कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. उन्हें तीन बार हार्ट अटैक आ चुका था और ब्रेन स्ट्रोक भी हुआ था. इसके अलावा वह गंभीर डायबिटीज से भी परेशान थे. इसके बावजूद बेटी की कब्र पर जाना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा.
मधुर के मुताबिक, उनके पिता कब्रिस्तान जाते, मधुबाला की कब्र के पास एक कुर्सी रखते और वहीं बैठकर रोते रहते थे. वह कई सालों तक इसी तरह अपनी लाडली बेटी को याद करते रहे.
मधुबाला की कब्र में पिता ने भर दिया था इत्र
मधुर ने एक और ऐसा किस्सा सुनाया, जो पिता-बेटी के रिश्ते की गहराई बयां करता है. उन्होंने बताया कि मधुबाला को सुपुर्द-ए-खाक करते वक्त उनके पिता ने उनकी कब्र में इतना इत्र डाला था कि पूरा कब्रिस्तान महीनों तक महकता रहा.
मधुर ने बताया, "जब मधु आपा को दफनाया गया, तब मेरे पिता ने उनकी कब्र में इतना इत्र डाला कि पूरा कब्रिस्तान महीनों तक महकता रहा. उन्होंने कब्र के अंदर और उनके शरीर पर भी इत्र डाला था. मुस्लिम दफन की परंपरा में आमतौर पर ऐसा नहीं किया जाता. उन्हें इसकी इजाजत कैसे मिली, क्या हुआ, यह सिर्फ भगवान ही जानता है."
पिता ने संगमरमर से बनवाया था खूबसूरत मकबरा
मधुबाला के पिता ने उनकी कब्र को भी खास तरीके से बनवाया था. मधुर के मुताबिक, उन्होंने कब्र के ऊपर ही नहीं, बल्कि किनारों और बीच के हिस्से को भी संगमरमर से पूरी तरह ढकवा दिया था. आमतौर पर कब्र के बीच का हिस्सा खुला छोड़ा जाता है, लेकिन अताउल्लाह खान ने बेटी की कब्र को पूरी तरह संगमरमर से ढकवाया था.
हालांकि, पिता की मौत के बाद इस संगमरमर के ढांचे को तोड़ दिया गया. मधुर ने बताया कि जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो उन्हें गहरा सदमा लगा. उन्हें लगा कि अब मधुबाला की कब्र का कोई निशान ही नहीं बचा है.
मधुर ने बताया कि बाद में किसी ने उन्हें जानकारी दी कि कब्रिस्तान में मधुबाला की कब्र अब भी मौजूद है. जब वह वहां पहुंचीं तो दूर से उन्हें कब्र दिखाई गई, जिस पर 'मधुबाला' नाम लिखा हुआ था. यह देखकर परिवार को कुछ राहत मिली.
दिलीप कुमार की कब्र भी है कुछ ही दूरी पर
मधुर ने बातचीत में यह भी बताया कि उसी कब्रिस्तान में बॉलीवुड की कई जानी-मानी हस्तियां दफन हैं. इनमें दिलीप कुमार, परवीन बाबी, मोहम्मद रफी और नौशाद जैसे नाम शामिल हैं. उन्होंने बताया कि दिलीप कुमार की कब्र मधुबाला की कब्र से महज पांच से दस मीटर की दूरी पर है.
गौर करने वाली बात है कि मधुबाला और दिलीप कुमार की प्रेम कहानी कभी मुकम्मल नहीं हो सकी थी. दोनों की मोहब्बत के किस्से आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी प्रेम कहानियों में गिने जाते हैं.
2010 में कब्रों को लेकर हुआ था विवाद
मधुबाला की कब्र से जुड़ा यह मामला पहली बार चर्चा में नहीं आया है. साल 2010 में मुंबई के जुहू मुस्लिम कब्रिस्तान में कई मशहूर हस्तियों की कब्रों और उन पर बने मकबरों को हटाने को लेकर विवाद हुआ था. खबरों के मुताबिक, मधुबाला, मोहम्मद रफी, नौशाद और साहिर लुधियानवी समेत कई हस्तियों की कब्रों पर बने ढांचे हटाए गए थे. जगह की कमी के चलते जमीन को समतल कर वहां नई कब्रों के लिए जगह बनाई गई थी.
उस वक्त मधुर भूषण ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उनका कहना था कि उनके पिता ने मधुबाला की कब्र पर संगमरमर का ढांचा बनवाने में कई हफ्ते और महीने लगाए थे. उन्होंने सवाल उठाया था कि जब परिवार को ऐसा ढांचा बनाने की इजाजत दी गई थी, तो बाद में उसे तोड़ा क्यों गया.
कब्रिस्तान के अधिकारियों ने जगह की कमी और इस्लामी परंपराओं का हवाला देते हुए स्थायी मकबरों को हटाने की बात कही थी. इसी विवाद में मोहम्मद रफी की कब्र भी चर्चा में आई थी. उनके बेटे शाहिद ने बाद में बताया था कि कब्र के निशान हट जाने के कारण वह अपने पिता की कब्र पहचान नहीं पा रहे थे.
36 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई थीं मधुबाला
मधुबाला का निधन 23 फरवरी 1969 को महज 36 साल की उम्र में हुआ था. वह दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. उनकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया था. बेटी के जाने का दुख उनके पिता अताउल्लाह खान भी ज्यादा समय तक नहीं सह सके और 1975 में उनका निधन हो गया.