
साल 2000 में आई जे पी दत्ता की फिल्म 'रिफ्यूजी' का एक गाना बहुत पॉपुलर हुआ. जावेद अख्तर ने प्यार के बीच सरहदों के आ जाने को, शब्दों की शक्ल देते हुए लिखा- 'पंछी नदिया पवन के झोंके... कोई सरहद न इन्हें रोके'. एक लव स्टोरी में कनफ्लिक्ट जितना बड़ा हो, प्यार की जीत उतनी बड़ी हो जाती है. और किसी भी प्रेम कहानी में तीन जंग लड़ चुके, और एक दूसरे को लेकर हमेशा तनाव में रहने वाले दो पड़ोसी देशों की सरहद से ज्यादा बड़ा कनफ्लिक्ट क्या ही हो सकता है!
अभिषेक बच्चन और करीना कपूर की डेब्यू फिल्म 'रिफ्यूजी', भारत-पाकिस्तान की सरहद पर पनपी एक प्रेम कहानी थी. फिल्म सराही तो गई लेकिन आगे-पीछे के सालों में, सरहद पार मोहब्बत वाली दो बड़ी फिल्मों के बीच 'रिफ्यूजी' ही थी जो बहुत बड़ी हिट नहीं हुई.

'रिफ्यूजी' से एक साल पहले आई पंजाबी फिल्म 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' को नेशनल अवार्ड भी मिला था और ये इंटरनेशनल हिट कही जाती है. फिल्म की कहानी इतनी जानदार थी कि हिंदी जनता के बीच भी फिल्म काफी पसंद की गई. 'रिफ्यूजी' के अगले ही साल 'गदर' आई जो हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक है. ऋषि कपूर की हिट फिल्म 'हिना' से लेकर, इसी साल रिलीज हुई शाहरुख खान स्टारर 'पठान' तक पड़ोसी मुल्क में मोहब्बत वाला ये एंगल काफी पॉपुलर रहा है. लेकिन वक्त और दोनों देशों की सरहद पर बदलते माहौल के साथ बॉलीवुड की लव स्टोरीज में पाकिस्तान का ट्रीटमेंट भी बदलता रहा.
प्यार, पाकिस्तान और पॉलिटिक्स
90s से देखें, तो पहली बॉलीवुड लव स्टोरी 'हिना' थी जिसमें पाकिस्तान वाला एंगल आया. ऋषि कपूर, जेबा बख्तियार और अश्विनी भावे स्टारर 'हिना', बाद की फिल्मों से इसलिए भी बहुत अलग थी क्योंकि इसमें हीरो जानबूझकर पाकिस्तान नहीं जाता. फिल्म में ऋषि कपूर के किरदार, चंदर प्रकाश का एक्सीडेंट होता है और वो झेलम नदी में बहते हुए पाकिस्तान की तरफ वाले कश्मीर में जा पहुंचता है. हिना (जेबा बख्तियार) उसे बचाती है और दोनों में लव स्टोरी शुरू हो जाती है. चोट से चंदर की याददाश्त चली गई है और उसे ये याद नहीं कि वो कौन है, कहां का रहने वाला है. हिना के घरवाले बेहोशी में उसकी बातें सुनकर समझते हैं कि शायद उसका नाम 'चांद' है. चंदर की याद्दाश्त वापिस आना और हिना का उसे वापस भारत भेजने की कोशिशें करना फिल्म का कनफ्लिक्ट है.

'हिना' में किरदारों के पंगे पर्सनल थे और भारत-पाक बॉर्डर पर बराबर बनी रहने वाली टेंशन को लोग अपने बदले के लिए यूज कर रहे थे. इस फिल्म में देशों की दुश्मनी वाला सीन बहुत बड़ा नहीं था. 1999 में आई 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' का मामला भी कुछ ऐसा ही था. ब्रिटिश आर्मी में सिपाही रहा बूटा सिंह (गुरदास मान), भारत-पाक बंटवारे के दौरान चल रही हिंसा में जान बचाकर भाग रही मुस्लिम लड़की जैनब (दिव्या दत्ता) की जान बचाता है. दोनों में पहले प्यार होता है और फिर शादी. दोनों की एक बच्ची भी होती है. कहानी में पंगा कुछ साल बाद होता है जब भारत-पाक तय करते हैं कि दंगों में छूट गई महिलाओं को वापस भेज दिया जाएगा. बूटा का एक रिश्तेदार पुलिस को जैनब की खबर दे देता है और उसे पाकिस्तान में उसके परिवार के पास भेज दिया जाता है.

बूटा गैर-कानूनी तरीके से पाकिस्तान जाता है और जैनब के घरवाले उसके खिलाफ हो जाते हैं. मामला कोर्ट पहुंचने पर जज कहता है कि अगर जैनब राजी होगी तो उसे बूटा के साथ वापस भेज दिया जाएगा. लेकिन अपने परिवार के दबाव में जैनब इनकार कर देती है. दर्द में डूबा बूटा सिंह अपनी बेटी को गोद में लेकर एक ट्रेन के आगे कूद जाता है. बूटा सिंह तो नहीं बचता, लेकिन उसकी बच्ची बच जाती है. भारत-पाकिस्तान के बीच माहौल हमेशा अधिकतर गर्म ही रहा है, बदलता सिर्फ इस गर्मी का तापमान है. 90s में भी दोनों देशों के रिश्ते में गर्मी तो काफी थी, लेकिन वो सीधे युद्ध का दौर नहीं था. शायद यही वजह रही कि 'हिना' और 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' की प्रेम कहानी में किरदारों के पर्सनल कनफ्लिक्ट पर ज्यादा फोकस रहा. कहानी के प्लॉट में दोनों देशों के तल्ख रिश्तों का जिक्र जरूर आया, मगर वो फिल्म का सेन्ट्रल मुद्दा नहीं था.
गदर: एक प्रेम कथा और पंच का पावर
बताया जाता है कि बूटा सिंह और जैनब की कहानी एक सच्ची रियल लाइफ स्टोरी थी. गुरदास मान की फिल्म 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' इसी रियल कहानी पर थी. इस कहानी में विभाजन का जिक्र एक दर्द की तरह दिखा और दोनों देशों के बिगड़े रिश्ते किसी दुख की तरह नजर आए. बूटा सिंह की रियल कहानी से ही 'गदर' (2001) भी प्रेरित कही जाती है. लेकिन 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' की रिलीज और 'गदर' बनने के बीच भारत-पाकिस्तान, कारगिल में अपना तीसरा युद्ध (1999) लड़ चुके थे.
युद्ध भारत की आम जनता में भी पाकिस्तान को लेकर एक गुस्सा था. और युद्ध एक ऐसी घटना है जिससे फिल्ममेकर बहुत प्रभावित होते हैं. सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर फिल्म का पूरा नाम 'गदर- एक प्रेम कहानी' था. लेकिन इस बात से शायद ही कोई इनकार कर पाए कि ये उन फिल्मों में से एक है, जिनका ट्रीटमेंट एक तरह के एग्रेशन से भरा है. सनी देओल के किरदार का पाकिस्तान की जमीन परखड़े होकर 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' कहने का सीन, थिएटर्स में आम जनता के एग्रेशन का एक एक्सप्रेशन बन गया. जनता ने सनी देओल का हैंडपम्प उखाड़ना तो सीटियों और हूटिंग के साथ रिसीव किया ही, फिल्म के अंत तक पहुंचते हुए तो ऐसा लगा जैसे अपने प्यार, सकीना के लिए तारा सिंह (सनी देओल) ने पूरा पाकिस्तान ही तबाह कर दिया है. सनी ने अपना ट्रेडमार्क 'ढाई किलो का हाथ' लोगों को पंच करने में भरपूर इस्तेमाल किया.

'गदर' की कहानी में वो पर्याप्त सबूत हैं जो बूटा सिंह की कहानी से प्रेरित लगते हैं. लेकिन अगर 'शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह' से तुलना करें तो 'गदर' में तीन बड़ी चीजें अलग हैं- फिल्म का ट्रीटमेंट एग्रेसिव और फुल एक्शन पैक हो जाता है. सकीना, तारा सिंह के साथ आने को राजी हो जाती है और दोनों भारत आने में कामयाब भी होते हैं. बूटा सिंह को लड़की हुई थी, जबकि तारा की गोद में बेटा है. लीड किरदार के बच्चे का जेंडर बदलना भले जानबूझकर न किया गया हो, मगर ये कहानी का ट्रीटमेंट ज्यादा मस्क्युलर हो जाने के साथ काफी मेल खाता है.
वीर-जारा और भाईचारा
शाहरुख खान की रोमांटिक इमेज बनाने में जिन फिल्मों का रोल सबसे बड़ा है, उनमें से एक 'वीर जारा' भी एक क्रॉस बॉर्डर लव स्टोरी है. डायरेक्टर यश चोपड़ा की 'वीर जारा' 2004 में बनी और रिलीज हुई. इस समय तक भारत-पाक रिश्ते में एक बड़ा बदलाव आने लगा था. कारगिल युद्ध के बाद दोनों देशों में शांति प्रयास शुरू हो चुके थे. 2001 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति का आगरा दौरा हो चुका था और 2003 में लाइन ऑफ कंट्रोल पर सीजफायर भी हो गया. साल 2004, पिछले कई सालों के मुकाबले भारत-पाक रिश्तों में गर्मी के थोड़ा कम होने का साल माना जाता है. लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच सेट कहानी में बिना किसी एक्शन, बिना कनफ्लिक्ट को एड्रेस किए, सिर्फ एक विशुद्ध रोमांटिक फिल्म बनाना एक बहुत बड़ा रिस्क था.

'बॉर्डर' जैसी धमाकेदार हिट बनाने वाले जे पी दत्ता की फिल्म 'रिफ्यूजी' फ्लॉप हो चुकी थी. सिनेमा प्रेमी ये भी मानते हैं कि कारगिल युद्ध के जस्ट बाद भारत-पाक सीमा के सेंटर पर बनी कहानी में, एक्शन और थिएटर्स का तापमान बढ़ाने वाली एग्रेशन भरी डायलॉगबाजी न होना, शायद 'रिफ्यूजी' के हिट न होने का कारण रहा. ऐसे में यश चोपड़ा की 'वीर जारा' एक रिस्की प्रोजेक्ट थी. शाहरुख खान एक एयर फोर्स ऑफिसर के रोल में थे, लेकिन अपने प्यार के लिए पाकिस्तान पहुंचकर लड़ नहीं रहे थे. उल्टा जारा हयात खान (प्रीति जिंटा) की मां (किरण खेर) से कह रहे हैं कि 'आपको क्या लगा मैं आपसे पूछे बिना उसे यहां से ले जाऊंगा?' और 'मेरे देश की हर मां आप जैसी है'! 'वीर जारा' का ये सीन पूरी फिल्म का सार था, जिसमें शाहरुख कह रहे हैं कि अपने प्यार में किसी को दुख पहुंचाना या किसी की जान जाना उन्हें मंजूर नहीं.
ये 'गदर' की तुलना में बिल्कुल दूसरा छोर था. 'वीर जारा' में हीरो को वापस उसके देश, भारत आने के लिए एक पाकिस्तानी लड़की लड़ रही है. ये कुछ-कुछ वैसा था जैसा 'हिना' में हुआ था. 'वीर जारा' की लव स्टोरी में मिठास की हद ये थी कि 'विलेन' की परिभाषा पर खरा उतरने वाला कोई विलेन भी नहीं था. जारा के मंगेतर बने मनोज बाजपेयी ने भी जो किया, वो अपनी होने वाली पत्नी के प्रेमी को देखकर, एक मर्द का रिएक्शन भर था. बिना सोचा समझा, जलन की भावना में निकला बस एक रिएक्शन. 'वीर जारा' को लोगों ने ऐसा प्यार दिया कि आज भी ये एक रिकॉर्डतोड़ हिट और आइकॉनिक लव स्टोरी है.
एक था टाइगर और एक थी पाकिस्तान वाली लव स्टोरी
'वीर जारा' के बाद सरहद पार वाली लव स्टोरीज में लंबा ब्रेक आया. इधर 2008 में मुंबई पर हुए 26/11 अटैक के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर तल्ख होने लगे. नतीजा ये हुआ कि अब बॉलीवुड के हीरो ने प्यार के लिए पाकिस्तान जाना बंद कर दिया. 'वीर जारा' के बाद डायरेक्टर कबीर खान ने 'बजरंगी भाईजान' में हीरो सलमान खान को पाकिस्तान भेजा. हालांकि इस बार मकसद लव स्टोरी नहीं, एक बच्ची को घर पहुंचाना था. पहलवान बजरंगी को पाकिस्तान भेजने से पहले, 2012 में कबीर खान ने एक बार अपने हीरो को पाकिस्तानी लड़की से प्रेम में दिखाया था. फिल्म थी 'एक था टाइगर', जिसमें सलमान खान भारतीय एजेंसी रॉ के एजेंट का रोल कर रहे थे और कटरीना कैफ बनी थीं पाकिस्तानी एजेंट जोया.

'एक था टाइगर' में टाइगर और जोया की लव स्टोरी के बीच दोनों देशों के तपते रिश्ते विलेन बने. एक बार फिर जनता को लव स्टोरी खूब पसंद आई और सलमान अपने करियर में पहली बार बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ के करीब पहुंचे. 'एक था टाइगर' से भारत-पाकिस्तान के किरदारों को, अपने देश से बाहर, विदेश में प्यार करने का आईडिया मिला. 2014 में आई 'टोटल सियापा' और 'पीके' ने भी इसी टेम्पलेट को फॉलो किया.
कहानी में एक 'हैप्पी' ट्विस्ट
क्या आपने ध्यान दिया कि अभी तक ऊपर जितनी फिल्मों की बात हुई, उन सब में एक बात कॉमन है? 'हिना' से लेकर 'वीर जारा' तक पुरुष किरदार ही पाकिस्तान जा रहे थे. शायद इन कहानियों में पाकिस्तान जा कर लौट आना या वहां की लड़की से इश्क को सफल बनाना को किसी बहादुरी भरे काम की तरह या 'जीत' की तरह ट्रीट किया जा रहा था.
2016 में रिलीज हुई 'हैप्पी भाग जाएगी' में लीड फीमेल किरदार हैप्पी (डायना पेंटी) पाकिस्तान चला जाता है. लेकिन ट्विस्ट ये था कि हैप्पी असल में अपने बॉयफ्रेंड गुड्डू (अली फजल) के साथ भागकर शादी करने वाली थी. मगर एक तो गुड्डू कहीं फंस गया, ऊपर से हैप्पी गलत ट्रक में बैठ गई थी. मतलब, लव स्टोरी तो इंडिया में ही सेट थी, पाकिस्तान जाना गलती से हुआ था. लेकिन 'राजी' (2018) में आलिया भट्ट के किरदार सहमत का पाकिस्तान जाना कोई गलती नहीं थी.

1971 भारत-पाक युद्ध पर बनी 'राजी' में आलिया ने कश्मीर से आने वाली एक लड़की का किरदार निभाया, जो अपने देश भारत की जासूस बनकर पाकिस्तान जाती है. वो भी पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर (विक्की कौशल) से शादी कर के. 2016 में हुए उरी अटैक के बाद भारत में पाकिस्तान के लिए गुस्सा फिर से खूब बढ़ चुका था और इस बैकग्राउंड में आई 'राजी' को खूब पसंद किया गया.

'राजी' एक लव स्टोरी नहीं थी, एक स्पाई की कहानी थी जिसके बीच में लव स्टोरी थी. यहां इसे याद करना इसलिए जरूरी है कि इस फिल्म से हीरोज के पाकिस्तान जाने का ट्रेंड टूटा. 2020 में आई 'इंदू की जवानी' में ट्रेंड और पलटा और प्रॉपर लव स्टोरी में हीरो पाकिस्तानी हुआ, हिरोइन पाकिस्तानी.

कियारा आडवाणी और आदित्य सील स्टारर 'इंदू की जवानी' को सिर्फ इस एक फैक्ट के लिए याद करना ठीक रहेगा. फिल्म में एक और नई बात ये थी कि इस बार लव स्टोरी पाकिस्तान या विदेश में नहीं, बल्कि भारत में सेट थी.
'पठान' की पाकिस्तानी मोहब्बत
इस साल 'पठान' में शाहरुख खान एक इंडियन स्पाई के रोल में हीरो बनकर लौटे हैं और फिल्म में उनके साथ लीड रोल कर रहीं दीपिका पादुकोण, पाकिस्तानी स्पाई के रोल में हैं. दोनों किरदारों के बीच एक रोमांटिक एंगल 'पठान' में बनता दिखा था. लेकिन यहां मामला 'एक था टाइगर' जैसा नहीं है, जहां कहानी का सेंटर ही लव स्टोरी थी. भारत-पाक के किरदारों के बीच लव स्टोरी का खयाल ही अपने आप में एक एक्साइटमेंट लेकर आता है.

वक्त के साथ दोनों देशों के बीच बदलते समीकरण और बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकारों पर लगे बैन के बीच फिल्मों की क्रॉस बॉर्डर लव स्टोरीज भी बदलती चली गईं. अब ये देखना दिलचस्प होने वाला है कि अगली बार बॉलीवुड की कौन सी फिल्म दोनों देशों के किरदारों की लव स्टोरी दिखाती है. ये एक लव स्टोरी होगी या स्पाई फिल्म? और कहानी भारत-पाक में ही सेट होगी या विदेश में? लेकिन एक बात तय है कि ये जब भी होगा, अगर पर्दे पर कहानी अच्छे तरीके से कही गई. तो फिल्म के हिट होने का चांस बहुत तगड़ा है!