90 के दशक में सिंगर अनुराधा पौडवाल के गाने बॉलीवुड की लगभग हर फिल्म में सुनाई देते थे. उनकी मधुर आवाज आज भी लोगों के दिलों पर छाई रहती है. लेकिन अनुराधा पौडवाल की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने फिल्मी गाने छोड़ भक्ति भजन गाना शुरू कर दिया था.
अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर में भक्ति की राह चुनी थी. उन्होंने हिंदू धर्म के लगभग हर देवी-देवताओं पर बने भजन गाए, जिन्हें आज भी हर मंदिर में सुना जाता है. हिंदू के अलावा सिंगर ने मुस्लिम, ईसाई, जैन, सिख- सभी धर्मों के भक्ति भजन गाए. यूट्यूब पर उनके भजन छाए रहते हैं, इसलिए उन्हें 'भजन क्वीन' भी कहा जाता है.
क्यों रो पड़ी थीं अनुराधा पौडवाल?
हाल ही में अनुराधा पौडवाल ने न्यूज बुक के पॉडकास्ट में अपनी भक्ति संगीत की जर्नी पर बात की. सिंगर से कहा गया कि जब उन्हें किसी ने भजन क्वीन का टैग दिया था, तब वो थोड़ी परेशान हो गई थीं. तो इसपर वो कहने लगीं- मैं रोई थी. मुझे भजन क्वीन नहीं कहा था, वो बोले थे कि मैं भजन संगीत में नई क्रांति (रेवोल्यूशन) लाऊंगी.
अनुराधा पौडवाल ने आगे अपने पॉपुलर भजनों पर बात की, जो आज के समय में गंगा आरती, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर की मंगला आरती के दौरान बजते हैं. सिंगर ने कहा- भगवान की कृपा है, 35 साल से सुबह-शाम मेरे भजन लोग सुनते हैं. आप मानेंगे नहीं, मगर मैं जब भी गंगा आरती में जाती हूं और वहां मेरे गाए हुए भजन चलते हैं, मेरी आंखों से आंसू निकल जाते हैं.
'केदारनाथ-बद्रीनाथ में भी, जब सुबह 3 बजे के आसपास का समय होता है और मंदिर के पट खुलते हैं तब मेरे भजन चलते हैं. ये ऐसी चीजें हैं जिन्हें मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती.' अनुराधा पौडवाल आगे ये भी बताती हैं कि उन्होंने अलग-अलग भगवानों की कम से कम 100 अमृतवाणी गाई हैं. लेकिन उनकी शिव अमृतवाणी का असर कुछ अलग है. सिंगर का कहना है कि जब भी उसे सुनना शुरू करते हैं, तो 10 मिनट में आसपास का माहौल पूरा बदल जाता है.
अनुराधा पौडवाल ने अपने जीवन में अभी तक 1500 से ज्यादा भक्ति संगीत और भजन गाए हैं, जो अलग-अलग भाषाओं जैसे हिंदी, मराठी, गुजराती, और संस्कृत में मौजूद हैं. ये अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड भी है. वो आज भी भक्ति संगीत वाले गाने गाती रहती हैं. उनके जीवन में काफी मुश्किल पड़ाव आए, जिसके कारण वो भगवान की भक्ति में लीन हुईं.