अमेरिका और पश्चिमी देश लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अपने विरोधी देशों को दुनिया के बैंकिंग सिस्टम से बाहर रखते आए हैं. लेकिन हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि इन पाबंदियों के बावजूद क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ब्लॉकचेन पर नजर रखने वाली कंपनी चेनालिसिस (Chainalysis) की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में प्रतिबंधित संस्थाओं और नेटवर्कों से जुड़ी क्रिप्टो गतिविधि लगभग 104 अरब डॉलर (करीब 9.92 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गई. रिपोर्ट में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से जुड़े नेटवर्कों की बढ़ती गतिविधियों का भी साफ तौर पर उल्लेख किया गया है.
कितना बड़ा है ये आंकड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में गैरकानूनी कामों में इस्तेमाल हुई कुल क्रिप्टो रकम कम से कम 154 अरब डॉलर रही, जो एक साल पहले से 162% ज्यादा है. वहीं, प्रतिबंधित रकम में आई 694% की भारी बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि इन नेटवर्कों की गतिविधियों को रोकना जांच एजेंसियों और सरकारों के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. यानी यह सिर्फ छोटी-मोटी हैकिंग या धोखाधड़ी की बात नहीं रही, क्योंकि रिपोर्ट बताती है कि प्रतिबंधित संस्थाओं और राज्य-समर्थित नेटवर्कों की क्रिप्टो गतिविधियां पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ चुकी हैं.
रूस का 93 अरब डॉलर का 'डिजिटल रास्ता'
रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा रूस के स्टेबलकॉइन A7A5 को लेकर हुआ है, जो सीधे रूसी रूबल से जुड़ा हुआ है. यह टोकन 2024 में शुरू हुआ था और महज एक साल के अंदर ही इसके जरिए करीब 93.3 अरब डॉलर का लेन-देन हो गया. यह टोकन अब रूसी कंपनियों और प्रतिबंधित संस्थाओं को दुनिया के बाजार से जोड़ने का एक आसान जरिया बन गया है. अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इससे जुड़े कुछ क्रिप्टो एक्सचेंजों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं, फिर भी इतना बड़ा लेन-देन दिखाता है कि रूस से जुड़े कारोबारी नेटवर्कों में A7A5 का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की बढ़ती भूमिका
ईरान में वहां की रिवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स (IRGC) और उससे जुड़े नेटवर्क का दखल तेजी से बढ़ा है. 2025 की आखिरी तिमाही में ईरान से जुड़ी प्रतिबंधित क्रिप्टो गतिविधियों में IRGC और उससे जुड़े नेटवर्कों का हिस्सा 50% से अधिक रहा. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े कुछ नेटवर्कों का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने, तेल व्यापार और दूसरी अवैध वित्तीय गतिविधियों में किया जाता रहा है. वहीं बड़ी घटनाओं का असर सीधे ब्लॉकचेन के डेटा में भी दिखता है.
उत्तर कोरिया के लिए चोरी का सबसे कामयाब साल
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 उत्तर कोरिया के लिए क्रिप्टो चोरी के मामले में अब तक का सबसे सफल साल रहा. उत्तर कोरिया से जुड़े हैकरों ने इस साल 2 अरब डॉलर से ज्यादा की डिजिटल संपत्ति चुराई. अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का आकलन है कि ऐसी चोरी से प्राप्त धन का एक हिस्सा उत्तर कोरिया के हथियार और मिसाइल कार्यक्रमों को समर्थन देने में इस्तेमाल हो सकता है. इसी से जुड़ी एक बड़ी घटना का जिक्र CSIS (सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज) की रिपोर्ट में भी मिलता है-फरवरी 2025 में हुआ बायबिट (ByBit) एक्सचेंज हैक, जिसे अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो डकैती कहा जाता है. इस हैक में करीब 1.5 अरब डॉलर के एथेरियम टोकन चोरी हुए थे, और इसके पीछे उत्तर कोरिया के मशहूर हैकर ग्रुप लाजारस ग्रुप (Lazarus Group) का हाथ बताया गया. CSIS के अनुसार, उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह वर्षों से क्रिप्टो चोरी को विदेशी मुद्रा जुटाने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं.
आखिर इसे रोकना इतना मुश्किल क्यों है?
क्रिप्टोकरेंसी किसी एक सरकार या बैंक के कंट्रोल में नहीं होती, इसलिए प्रतिबंधित देशों और अपराधियों को ये काफी आसान रास्ता लगता है. दुनिया भर में क्रिप्टो को लेकर कोई एक जैसा नियम या साझा व्यवस्था ना होने से पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए इन लेन-देन को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. हालांकि, एक अच्छी बात ये है कि ब्लॉकचेन पर हर लेन-देन का रिकॉर्ड सबको दिखता है, इसलिए जांच एजेंसियां चाहें तो इसे ट्रैक कर सकती हैं. लेकिन जब तक अलग-अलग देश आपस में मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस पर पूरी तरह लगाम लगाना आसान नहीं होगा.
आगे क्या होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे देश लगातार क्रिप्टो एक्सचेंजों और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहे हैं. लेकिन प्रतिबंधित रकम में आई 694% की बढ़ोतरी बताती है कि अब तक हुई कार्रवाई का ज्यादा असर नहीं पड़ा है. आने वाले समय में ये देखना जरूरी होगा कि दुनिया के देश मिलकर इस पर कोई ठोस कदम उठा पाते हैं, या फिर प्रतिबंधित देश क्रिप्टो के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था इसी तरह चलाते रहेंगे.