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शर्माने और शांत रहने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने खोला राज- बोलने में कैसे आया आत्मविश्वास

एक समय में किसी के सामने बात करने से शर्माने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया कि वह जब क्रिकेट खेलते थे तब वह मीडिया से बात करने से अकसर डरा करते थे. अगर किसी से बात करनी पड़ जाती थी तो उनके पसीने छूट जाते थे.

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नवजोत सिंह सिद्धू
नवजोत सिंह सिद्धू

अमृतसर ईस्ट विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नवजोत सिंह सिद्धू को उनकी 'सिद्धूवाणी' के लिए भी जाना जाता है. कॉमेंट्री हो या लॉफ्टर शो, या फिर राजनीतिक रैली का प्लेटफॉर्म, जब सिद्धू बोलते हैं तो उनके मुहावरे, शेरो-शायरी सुनने लायक होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब सिद्धू शर्मीले स्वभाव के होने की वजह से किसी से बात करने से भी कतराते थे.

जब सिद्धू ने टीम इंडिया के लिए ओपनिंग बैट्समैन के तौर पर आगाज किया था तो सिद्धू ड्रैसिंग रूम में भी चुपचाप रहना ही पसंद करते थे. मीडिया से कभी बात करने की नौबत आती थी तो सिद्धू के पसीने छूट जाते थे. इस बात की पुष्टि एक बार टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कपिलदेव ने भी की थी.


सिद्धू का कायापलट कैसे हुआ, इस राज का खुलासा सिद्धू ने खुद 'आज तक' से किया. सिद्धू ने माना कि जब वो क्रिकेट खेला करते थे तो उस वक्त किसी से बात करने की नौबत आती थी तो इधर-उधर होने की कोशिश करते थे. सिद्धू के मुताबिक प्रोफेसर डिबेट के लिए बुलाते थे तो वो छुट्टी ले लिया करते थे. सिद्धू ने कहा, 'कभी अच्छे रन बना लेता था तो डर लगता था कि अब मीडिया से बात करनी पड़ेगी.'

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बोलने में आत्मविश्वास कैसे आया, इसके लिए सिद्धू मेडिटेशन (ध्यान-मनन) को श्रेय देते हैं. सिद्धू ने कहा, 'मैं सुबह 3 बजे उठकर ध्यान लगाता हूं, इससे मुझे शक्ति मिली. ये तमाम बदलाव जो मेरे अंदर आया है वो सब परमात्मा का प्रताप है. परमात्मा आपके अंदर ही मिलेगा, ये कहीं और नहीं मिलेगा.' कहीं कुछ बोलना हो तो क्या कोई विशेष तैयारी करते हैं, इस सवाल के जवाब में सिद्धू ने कहा, 'मैं कोई किताब लेकर नहीं घूमता हूं, कोई किताब छुपाके नहीं चलता हूं. आत्मविश्वास क्या है, पब्लिक स्पीकिंग क्या है? जो आत्मा से संपर्क करेगा. जो भीतर डूबेगा वो भीतर बैठे परमेश्वर के साथ एक रहेगा.आत्मा से संपर्क है तो आत्मविश्वास है. अगर वह संपर्क टूटता है तो भगवान के नाम से संदेह पैदा होता है.अगर संदेह का इलाज करना है तो आत्मा के साथ संपर्क रखो. भीतर विलीन रहो सब कुछ ठीक हो जाएगा.'

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