हरियाणा चुनाव को लेकर आजतक-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल जारी हो गया है. इसके मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 32-44, कांग्रेस को 30-42, दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी को 6-10 और अन्य को भी 6-10 सीटें मिल सकती हैं. वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 33, कांग्रेस को 32, जेजेपी को 14 और अन्य को 21 फीसदी वोट मिल सकते हैं.
लोकसभा चुनाव की तुलना में बीजेपी को इस बार काफी कम वोट मिलते दिख रहे हैं. इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. मसलन, हरियाणा के लोग केंद्र की मोदी सरकार से तो खुश हैं लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कामकाज से उनकी नाराजगी बताई जा रही है. एक अन्य बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बंपर जीत से कार्यकर्ता इतने आत्मविश्वास में आ गए कि वोटों के लिए उनमें जद्दोजहद नहीं दिखी. इसका सबसे बड़ा प्रमाण हरियाणा के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कम पड़े वोट हैं.
इस बार टूटा वृद्धि का ट्रेंड
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक लोकतंत्र के महापर्व में प्रदेश की 90 सीटों पर अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए 65.57 फीसदी मतदाताओं ने ही मताधिकार का उपयोग किया. अगले पांच साल के लिए अपनी नई सरकार चुनने के लिए हुआ यह मतदान पिछले 19 वर्षों में विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे कम मतदान प्रतिशत है. सोमवार शाम 6 बजे तक मतदान का आंकड़ा 61.62 फीसदी तक ही पहुंच पाया था.
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सन 2000 से अब तक हुए मतदान की बात करें तो चुनाव दर चुनाव मतदान के प्रतिशत में इजाफा होता गया. सन 2000 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी मतदान हुआ था. 2005 में वोट प्रतिशत 2.9 फीसदी इजाफे के साथ 71.9 फीसदी मतदान हुआ, जबकि 2009 में 0.4 फीसदी की मामूली वृद्धि के साथ वोट प्रतिशत 72.3 फीसदी पहुंच गया था. हर चुनाव में मामूली ही सही, वृद्धि का ट्रेंड रहा लेकिन इस बार यह टूट गया.
सीटों का आंकड़ा
खट्टर से नाराज जाट, दलित?
हरियाणा के जाट और दलित मौजूदा खट्टर सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं. लोग अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ तो हैं लेकिन हरियाणा में यह वोट में तब्दील नहीं हो पाया. एग्जिट पोल के मुताबिक हरियाणा के मतदाता मोदी सरकार से खुश हैं लेकिन प्रदेश सरकार से उनकी नाराजगी है. इसलिए बीजेपी हरियाणा में सत्ता विरोधी लहर का सामना करती दिख रही है.
टिकट बंटवारे में जाट फैक्टर
बीजेपी ने जाट फैक्टर को देखते हुए टिकट वितरण नहीं किया, जिसका असर उसे सीटों के घाटे के रूप में दिख सकता है. बीजेपी ने महज 20 जाटों को टिकट दिया जबकि कांग्रेस ने 29 प्रत्याशियों को. बीजेपी अगर जाट समुदाय से डिप्टी सीएम पद का चेहरा आगे करती तो आंकड़े कुछ और हो सकते थे. मनोहर लाल खट्टर गैर जाट चेहरा हैं इसलिए वे गैर-जाट वोटों को ही समेटने में सफल होते दिख रहे हैं जबकि कांग्रेस और जेजेपी इसमें सफल जान पड़ रही है. सीटवार देखें तो 13-16 सीटों पर बीजेपी के बागी प्रत्याशियों ने अपनी ही पार्टी का खेल खराब किया है.
कांग्रेस को हो सकता है फायदा
कांग्रेस ने जाट और दलितों की नाराजगी को भुना लिया जो बीजेपी के खिलाफ थी. मुख्यमंत्री पद के लिए जाट चेहरा (भूपेंद्र सिंह हुड्डा) को आगे कर और कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बना कर कांग्रेस ने बीजेपी को मात दे दी. लोकसभा चुनाव के बाद दलित मतदाता कांग्रेस के खेमे में आते दिख रहे हैं. इनलो के टूटने के बाद जाट वोटर्स कांग्रेस की ओर जाते दिख रहे हैं. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों और लोगों की भलाई के मुद्दे पर फोकस किए जबकि बीजेपी ने अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखा. दूसरी ओर जेजेपी के दुष्यंत चौटाला ने जाट बहुल इलाके हिसार, रोहतक और करनाल में बड़ा वोट शेयर पाया. एग्जिट पोल के मुताबिक, चौटाला सरकार बनाने में बड़ा रोल निभा सकते हैं.
वोट परसेंटेज का अनुमान
चुनाव में क्या रहे अहम मुद्दे
एग्जिट पोल के मुताबिक, 32 फीसदी वोटर्स ने माना कि उनके लिए विकास ही अहम मुद्दा है जबकि केवल 3 फीसदी मतदाताओं को ही अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मुद्दा लुभा पाया. 23 फीसदी वोटर्स के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ा फैक्टर था जबकि 2 फीसदी लोगों ने माना कि राष्ट्रीय सुरक्षा का इस चुनाव में बड़ा रोल है. बीजेपी ने जहां अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय सुरक्षा पर फोकस किया, वही कांग्रेस ने विकास, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया. एग्जिट पोल में यही मुद्दे कांग्रेस के पक्ष में जाते दिख रहे हैं.
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पीएम मोदी के नाम पर वोट?
एग्जिट पोल में कहा गया है कि केंद्र सरकार के अच्छे काम के कारण 36 फीसदी लोगों ने हरियाणा में बीजेपी को पसंद किया जबकि मनोहर लाल खट्टर के नाम पर महज 6 फीसदी लोगों ने ही वोटिंग की. एग्जिट पोल के मुताबिक, 34 फीसदी वोटर्स ने माना कि मौजूदा सरकार अच्छा काम नहीं कर रही है, जबकि 26 फीसदी लोगों ने परिवर्तन के नाम पर वोट दिया. 19 फीसदी ऐसे भी लोग हैं जो मौजूदा सरकार से नाखुश दिखते जान पड़ रहे हैं.