पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में गंगा के किनारे बसा पटियाली, एक ऐतिहासिक सब-डिविजन हेडक्वार्टर और नगर पंचायत है. यह जगह 13वीं सदी के मशहूर कवि, विद्वान और संगीतकार अमीर खुसरो की जन्मस्थली के तौर पर सबसे ज्यादा जानी जाती है. प्राचीन ब्रज-पांचाल क्षेत्र के उपजाऊ मैदानों में स्थित यह शहर सदियों तक हिंदू, मुगल और ब्रिटिश शासनों के दौरान खेती, संस्कृति और व्यापार के केंद्र के तौर पर विकसित हुआ. आज यह एटा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. हिंदू-बहुल लेकिन सामाजिक रूप से विविध इस क्षेत्र में शाक्य, यादव, मुस्लिम और अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी का राजनीतिक प्रभाव है, जिससे यहां चुनावी मुक़ाबले बहुत कड़े और जबरदस्त होते हैं.
1967 के परिसीमन आयोग के आदेश से बना पटियाली एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र है, जहां पहली बार 1969 में चुनाव हुए थे. 2008 के परिसीमन के बाद, अब इसमें पटियाली, सिधपुरा और भर्गेन नगर पंचायतें, गंजडुंडवारा म्युनिसिपल बोर्ड और आस-पास के कई गांव शामिल हैं, जिससे इस क्षेत्र का स्वरूप मिला-जुला लेकिन मुख्य रूप से ग्रामीण हो गया है.
पटियाली ने अपनी शुरुआत से अब तक 14 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है और शायद ही कभी किसी एक पार्टी के प्रति लंबे समय तक राजनीतिक वफादारी दिखाई हो. शुरुआती दशकों में इस क्षेत्र पर कांग्रेस का दबदबा रहा और उसने चार बार यह सीट जीती. बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन बार जीत हासिल की है, जबकि बहुजन समाज पार्टी दो बार जीती है. भारतीय क्रांति दल और जनता पार्टी को भी यहां एक-एक बार सफलता मिली है. हालांकि कांग्रेस और बाद में बीजेपी लगातार दो बार इस सीट को अपने पास रखने में कामयाब रहीं, लेकिन आम तौर पर पटियाली ने पार्टियों को थोड़े समय के लिए ही समर्थन दिया और फिर पाला बदल लिया, जिससे इसे इस क्षेत्र की सबसे अनिश्चित नतीजों वाली सीटों में से एक माना जाता है.
समाजवादी पार्टी ने 2012 में आसान जीत हासिल की, जब नजीवा खान जीनत ने बीएसपी उम्मीदवार सूरज सिंह शाक्य को 27,775 वोटों से हराया. उस चुनाव में चौथे स्थान पर खिसक गई BJP ने 2017 में शानदार वापसी की. उसके उम्मीदवार ममतेश शाक्य ने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार किरण यादव को 3,771 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2022 में स्थिति फिर बदली और समाजवादी पार्टी ने यह सीट वापस हासिल कर ली. उसकी उम्मीदवार नादिरा सुल्तान ने मौजूदा BJP विधायक ममतेश शाक्य को 4,001 वोटों के मामूली अंतर से हराया. नादिरा सुल्तान को 91,958 वोट मिले, जबकि ममतेश शाक्य को 87,957 वोट मिले.
इस विधानसभा क्षेत्र में संसदीय चुनावों के दौरान भी ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. BJP से अलग होने के बाद 2009 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने पटियाली क्षेत्र में BSP पर 7,004 वोटों की बढ़त बनाई थी. BJP में उनकी वापसी से पार्टी को 2014 में समाजवादी पार्टी पर सिर्फ़ 558 वोटों की मामूली बढ़त बनाने में मदद मिली. 2019 में समाजवादी पार्टी ने बाजी पलट दी और एक और कड़े मुकाबले वाले चुनाव में BJP पर 2,572 वोटों की बढ़त हासिल की. बहुत कम अंतर से जीत-हार का यह सिलसिला आखिरकार 2024 में टूटा, जब समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार देवेश शाक्य को 112,940 वोट मिले और BJP उम्मीदवार राजवीर सिंह को 69,842 वोट मिले, जिससे विधानसभा क्षेत्र में 43,098 वोटों की बड़ी बढ़त बन गई.
पिछले दशक में पटियाली में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 306,382 से बढ़कर 2017 में 328,107, 2019 में 340,252, 2022 में 359,278 और 2024 में 362,617 हो गई. मतदान में भागीदारी सामान्य रही है और इसमें बहुत कम उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में वोटिंग 57.65 प्रतिशत, 2017 में 61.84 प्रतिशत, 2019 के लोकसभा चुनाव में 58.63 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनाव में 61.19 प्रतिशत और 2024 के संसदीय चुनाव में 55.16 प्रतिशत रही.
पटियाली हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां OBC का काफी प्रभाव है. यहां मुस्लिम आबादी कुल मतदाताओं का लगभग 21.90 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जातियों की आबादी लगभग 15 से 17 प्रतिशत है. OBC समुदायों में, शाक्य सबसे प्रभावशाली समूह हैं जिनकी आबादी लगभग 14 प्रतिशत है, इसके बाद यादव आते हैं जिनकी आबादी लगभग 8 प्रतिशत है. राजपूत मतदाताओं की संख्या लगभग 12 प्रतिशत है, जबकि ब्राह्मण लगभग 8 प्रतिशत हैं. यहां के 78.01 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में और 21.99 प्रतिशत शहरी केंद्रों में रहते हैं, इसलिए खेती ही यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था और चुनावी प्राथमिकताओं को तय करती है.
भारत के सांस्कृतिक इतिहास में पटियाली का खास स्थान है क्योंकि यह मशहूर सूफी कवि, विद्वान, भाषाविद् और संगीतकार अमीर खुसरो की जन्मस्थली है, जिन्हें मध्यकालीन भारत के महानतम साहित्यकारों में से एक माना जाता है. गंगा के किनारे बसा यह इलाका महाभारत में उल्लिखित पांचाल राज्य से प्राचीन रूप से जुड़ा हुआ है और बाद में यह व्यापक ब्रज सांस्कृतिक क्षेत्र का हिस्सा बन गया. मुगल काल में, 'आईन-ए-अकबरी' में पटियाली को एक 'महल' (प्रशासनिक इकाई) के तौर पर मान्यता मिली थी, जो इसके प्रशासनिक महत्व को दर्शाता है. ब्रिटिश शासन के दौरान भी यह आसपास के खेती-बाड़ी वाले इलाकों के लिए एक छोटे से बाजार वाले कस्बे के तौर पर काम करता रहा. आज भी, यह कस्बा अपनी ऐतिहासिक, साहित्यिक और धार्मिक विरासत को संजोए हुए है और साथ ही खेती और ग्रामीण व्यापार से गहराई से जुड़ा हुआ है.
पटियाली जिला मुख्यालय कासगंज से लगभग 55 किमी, एटा से लगभग 95 किमी, अलीगढ़ से लगभग 120 किमी, आगरा से लगभग 150 किमी और नई दिल्ली से लगभग 235 किमी दूर स्थित है. यहां राज्य राजमार्ग नेटवर्क के जरिए सड़क संपर्क की अच्छी सुविधा है. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से लगभग 290 किमी दूर है, जबकि कानपुर लगभग 240 किमी दूर है. सबसे नजदीकी बड़े रेलवे स्टेशन गंजडुंडवारा और कासगंज में हैं, जो आगरा, बरेली, लखनऊ और दिल्ली से जुड़े हुए हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर आधारित है, जहां किसान गेहूं, धान, आलू, गन्ना और दालें उगाते हैं. छोटे पैमाने पर व्यापार, कृषि-प्रसंस्करण, डेयरी फार्मिंग और खुदरा व्यापार ग्रामीण आय में मदद करते हैं. पटियाली और गंजडुंडवारा में मौजूद शिक्षण संस्थान, स्थानीय बाजार और सरकारी सेवाएं मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों को शहरी सुविधाएं प्रदान करते हैं.
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जबरदस्त बढ़त ने निस्संदेह 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पटियाली में उसकी स्थिति को मजबूत किया है. फिर भी, इस निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी इतिहास बताता है कि किसी एक नतीजे से बहुत ज्यादा निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. अक्सर पटियाली में कड़े मुकाबले देखने को मिले हैं, जहां मतदाता बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच बारी-बारी से अपना समर्थन बदलते रहे हैं. बीजेपी राजपूत, ब्राह्मण और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं के एक बड़े हिस्से पर भरोसा कर सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोट बैंक को मजबूत करने और शाक्य समुदाय के कुछ वर्गों के बीच अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश करेगी. अनुसूचित जाति के मतदाताओं का वोटिंग व्यवहार एक बार फिर निर्णायक साबित हो सकता है. बीजेपी के लिए, मुस्लिम वोटों में कोई भी बंटवारा हार-जीत के अंतर को काफी कम कर सकता है. दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी उस व्यापक सामाजिक गठबंधन को बनाए रखने की कोशिश करेगी, जिसकी वजह से उसे 2024 में संसदीय चुनावों में बड़ी बढ़त मिली थी. मौजूदा हालात को देखते हुए, पटियाली में मुकाबला काफी बराबरी का लग रहा है. किसी भी पक्ष को ऐसी बढ़त हासिल नहीं है जिसे आसानी से तोड़ा न जा सके और 2027 में भी यहां कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है.
(अजय झा)
Mamtesh Shakya
BJP
Neeraj Kishore Mishra
BSP
Vivek Kumar
JANADIP
Mohd. Imran Ali
INC
Abhay Pratap Singh
IND
Nota
NOTA
Kamlesh Kumar
MADP
Dhruv Mishra
IND
Girish Chandra
RSOSP
Jitendra Kumar
IND
Akhlesh
IND
Meera Rani
BSCP
Yusuf
AAAP
Kallu Singh
RBP
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
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बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.