मेरठ दक्षिण, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह मेरठ शहर के अंतर्गत आने वाली तीन विधानसभा सीटों में से एक है. बाकी दो सीटें मेरठ और मेरठ कैंट हैं. जहां बाकी दो सीटें पूरी तरह शहरी हैं, वहीं मेरठ दक्षिण का स्वरूप मिला-जुला है क्योंकि इसमें शहर के बाहरी इलाकों में बसे कई गांव भी शामिल हैं. इस सीट में मेरठ नगर निगम के 18 वार्ड और मेरठ कानूनगो सर्कल के अंतर्गत आने वाले गांव शामिल हैं.
हाल ही में, दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का मेरठ दक्षिण स्टेशन चालू होने के बाद यह इलाका शहर के एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभरा है. यह मेरठ को दिल्ली से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का पहला स्टेशन है.
मेरठ और मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्रों के विपरीत, जो 1957 से अस्तित्व में हैं, मेरठ दक्षिण का गठन 2008 के परिसीमन आयोग के आदेश से हुआ था. यहां पहली बार 2009 के लोकसभा और 2012 के विधानसभा चुनावों में मतदान हुआ था.
मेरठ दक्षिण में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और यह भाजपा के गढ़ के रूप में उभरा है, क्योंकि पार्टी ने तीनों बार यहां जीत हासिल की है.
2012 में, भाजपा के रवींद्र कुमार भड़ाना ने पहला चुनाव जीता और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के हाजी राशिद अखलाक को 9,784 वोटों से हराया.
2017 में भाजपा ने उनकी जगह सोमेंद्र तोमर को मैदान में उतारा और यह दांव सफल रहा. तोमर ने BSP के हाजी मोहम्मद याकूब को 35,395 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी. तोमर ने 2022 में दूसरी बार जीत हासिल की और समाजवादी पार्टी के मो. आदिल को 7,942 वोटों से हराया. उन्हें 1,29,667 वोट मिले, जबकि आदिल को 1,21,725 वोट मिले. तोमर वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री हैं.
भाजपा मेरठ दक्षिण क्षेत्र में विधानसभा चुनावों जैसी सफलता लोकसभा चुनावों में नहीं दोहरा पाई है. उसे यहां संघर्ष करना पड़ा है और अब तक हुए चार संसदीय चुनावों में से तीन में वह दूसरे स्थान पर रही है. 2009 में, BSP ने BJP पर 487 वोटों के मामूली अंतर से बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP ने BSP पर 23,337 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में BSP ने वापसी की और BJP से 29,714 वोटों से आगे रही. 2024 में समाजवादी पार्टी सबसे आगे रही और BJP पर 20,473 वोटों की बढ़त बनाई. इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 140,354 वोट मिले, जबकि BJP के अरुण गोविल को 119,881 वोट मिले.
मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 354,863 थी, जो 2017 में बढ़कर 428,854 और 2019 में 453,809 हो गई. 2022 में यह संख्या बढ़कर 481,365 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 497,855 हो गई.
वोटिंग का प्रतिशत औसत रहा है. यह 2012 में 61.57 प्रतिशत, 2017 में 63.15 प्रतिशत, 2019 में 62.67 प्रतिशत और 2022 में 62.01 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 57.36 प्रतिशत रह गया.
मेरठ दक्षिण हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम समुदाय की भी अच्छी-खासी आबादी है. यहां जाट वोटरों की भी काफी संख्या है. कुल वोटरों में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी लगभग 20.78 प्रतिशत है. यह सीट मुख्य रूप से शहरी है, जहां 88.16 प्रतिशत शहरी और 11.84 प्रतिशत ग्रामीण वोटर हैं.
मेरठ के बाकी इलाकों की तरह, मेरठ दक्षिण का इलाका भी 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश नियंत्रण में आने से पहले कई सदियों तक मुस्लिम शासन के अधीन रहा. इस क्षेत्र ने 1857 के विद्रोह के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी.
मेरठ दक्षिण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में स्थित है. यहां सड़क संपर्क अच्छा है और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से इसे बहुत फायदा हुआ है. दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने दिल्ली तक का सफर का समय काफी कम कर दिया है और इस इलाके को तेजी से विकसित होने वाले जोन में बदल दिया है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मेरठ सिटी में है. गाजियाबाद और नोएडा यहां से लगभग 65-75 किमी दूर हैं, और देश की राजधानी दिल्ली लगभग 70-80 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
मेरठ साउथ की स्थानीय अर्थव्यवस्था व्यापार, छोटे व्यवसायों, ट्रांसपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों और बाहरी इलाकों में खेती पर टिकी है. RRTS और एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण आने वाले सालों में रियल एस्टेट, कॉमर्स और कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. वोटरों के लिए अहम मुद्दों में बेहतर नागरिक सुविधाएं, ट्रैफिक मैनेजमेंट, रोजगार के अवसर, कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास शामिल हैं.
मेरठ साउथ के पिछले चुनावी इतिहास को देखें तो लगातार तीन जीत के बाद, BJP को 2027 के चुनावों में अपनी सीट बचाने के लिए शायद ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े. हालांकि, असलियत कुछ और है क्योंकि BJP की इन तीन जीतों में से दो जीत का अंतर काफी कम था, और लोकसभा चुनावों में इस इलाके में पार्टी को संघर्ष करना पड़ा है. ऐसा मुख्य रूप से इसलिए हुआ क्योंकि वह हिंदू वोटरों को पूरी तरह से अपने पक्ष में नहीं ला पाई और मुस्लिम वोटर एकजुट होकर उस पार्टी को वोट देते रहे जो BJP को हराने की सबसे ज्यादा संभावना रखती हो. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या RRTS और एक्सप्रेसवे से बेहतर हुए इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा BJP को मिलता है या नहीं. इसके अलावा, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या BSP और SP के बीच किसी टकराव से मुस्लिम वोट बंटते हैं और BJP को फायदा पहुंचता है. संक्षेप में, मेरठ दक्षिण में कड़ा मुकाबला होने की संभावना है, जहां अंतिम नतीजों में हर एक वोट मायने रखेगा.
(अजय झा)
Mohd Adil
SP
Dilshad Ali
BSP
Nafees
INC
Nota
NOTA
Omdutt
AAAP
Shakeel Ahmad
NBEP
Mukesh
IND
Afzal
SACP
Rajuddin Gadrey
BMUP
Harish Chand
IND
Sandeep Chaudhary
IND
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.