उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नगर पंचायत वाला कस्बा 'गुन्नौर', पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ दोआब मैदानी इलाकों में गंगा नदी के पास बसा है. सदियों से यह आस-पास के ग्रामीण इलाकों के लिए स्थानीय प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र रहा है. आज, यह बदायूं लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. मुख्य रूप से ग्रामीण इलाका होने और सामान्य (अनारक्षित) सीट होने के बावजूद, गुन्नौर हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां यादव समुदाय का दबदबा है और मुस्लिम व अनुसूचित जाति के लोग भी अच्छी-खासी संख्या में हैं.
परिसीमन आयोग के 1951 के आदेश के तहत बनी गुन्नौर विधानसभा सीट पर पहली बार 1952 में चुनाव हुए थे. 2008 के परिसीमन के दौरान इसकी सीमाएं फिर से तय की गईं और अब इसमें पूरी गुन्नौर तहसील शामिल है, जिसमें गुन्नौर नगर पंचायत और तहसील के कई गांव आते हैं, जिससे इस क्षेत्र को एक खास ग्रामीण पहचान मिली है.
गुन्नौर में अब तक 21 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1979, 2004 और 2007 में हुए उपचुनाव भी शामिल हैं. शुरुआती चुनावी इतिहास में यह सीट अक्सर 'स्विंग सीट' (कभी किसी पार्टी तो कभी किसी दूसरी पार्टी को जिताने वाली सीट) की तरह रही, लेकिन धीरे-धीरे यह समाजवादी पार्टी का गढ़ बन गई. 1952 से 1989 के बीच कांग्रेस ने यहां चार बार जीत हासिल की, लेकिन 1992 में समाजवादी पार्टी के बनने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए. तब से, पार्टी ने यहां छह बार जीत हासिल की है, जिसमें 2004 से 2012 के बीच लगातार चार जीतें शामिल हैं. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और जनता दल ने दो-दो बार जीत हासिल की है. बीजेपी ने भी दो बार यह सीट जीती है - पहली बार 1969 में अपनी पुरानी पार्टी 'भारतीय जनसंघ' के जरिए और फिर 2017 में. भारतीय क्रांति दल, एक निर्दलीय उम्मीदवार, जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेक्युलर) और जनता दल (यूनाइटेड) ने भी एक-एक बार यहां जीत हासिल की है.
गुन्नौर के राजनीतिक इतिहास में 2004 का साल एक खास जगह रखता है. तीसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद, संविधान के अनुसार समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लिए छह महीने के अंदर राज्य विधानसभा का सदस्य बनना जरूरी था. जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक अजीत कुमार यादव ने विधानसभा में उनके प्रवेश को आसान बनाने के लिए गुन्नौर सीट खाली कर दी. मुलायम सिंह ने जनवरी 2004 में हुए उपचुनाव में हिस्सा लिया और भारी जीत हासिल की. उन्हें 90.45 प्रतिशत वोट मिले और वे 183,899 वोटों के अभूतपूर्व अंतर से जीते, जो आज भी एक रिकॉर्ड है.
तीन साल बाद, मुलायम सिंह ने गुन्नौर और भरथना दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीते. भरथना सीट अपने पास रखने का फैसला करने के बाद, उन्होंने गुन्नौर सीट छोड़ दी, जिससे 2007 में एक और उपचुनाव कराना पड़ा. समाजवादी पार्टी ने प्रदीप कुमार के जरिए यह सीट अपने पास बनाए रखी.
2012 के विधानसभा चुनाव से पहले, समाजवादी पार्टी ने रामखिलाड़ी सिंह यादव को मैदान में उतारा, जिन्होंने पहले जनता दल के विधायक के तौर पर दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अजीत कुमार को 46,658 वोटों से हराया.
आखिरकार, 2017 के विधानसभा चुनाव में 48 साल के अंतराल के बाद बीजेपी ने गुन्नौर में जीत का स्वाद चखा. उसके उम्मीदवार अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने मौजूदा समाजवादी पार्टी विधायक रामखिलाड़ी सिंह यादव को 11,386 वोटों से हराया और समाजवादी पार्टी की लगातार चार चुनावों की जीत का सिलसिला तोड़ दिया.
यह बदलाव ज्यादा समय तक नहीं रहा. 2022 में, रामखिलाड़ी सिंह यादव ने बीजेपी के मौजूदा विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू यादव को 29,529 वोटों के बड़े अंतर से हराकर समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट फिर से हासिल कर ली. रामखिलाड़ी सिंह को 123,969 वोट मिले, जबकि अजीत कुमार को 94,440 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान भी गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का रिकॉर्ड शानदार रहा है. 2009 के बाद से हुए सभी चार संसदीय चुनावों में पार्टी यहां आगे रही है. 2009 में पार्टी ने बीएसपी पर 28,501 वोटों की बढ़त बनाई थी, जिसके बाद बीजेपी ने बीएसपी की जगह मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर ले ली. 2014 में समाजवादी पार्टी की बढ़त 64,984 वोटों तक पहुंच गई थी, लेकिन 2019 में यह तेजी से घटकर 9,628 वोट रह गई, जिससे बीजेपी को इस सीट पर जीत की उम्मीद जगी. लेकिन ये उम्मीदें ज्यादा दिन नहीं टिकीं. 2024 में, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आदित्य यादव को 122,044 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार दुर्विजय सिंह शाक्य को 82,012 वोट मिले. इससे पार्टी ने 40,032 वोटों की बढ़त के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर ली. यह बढ़त विधानसभा क्षेत्र में डाले गए कुल वोटों का 17.90 प्रतिशत थी.
पिछले दशक में गुन्नौर में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 341,367 से बढ़कर 2017 में 372,513, 2019 में 387,671, 2022 में 411,191 और 2024 में 415,282 हो गई. मतदान में उतार-चढ़ाव के बावजूद भागीदारी आम तौर पर औसत रही है और इस दौरान केवल एक बार यह 60 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर पाई है. मतदान का प्रतिशत 2012 में 59.14 प्रतिशत, 2017 में 61.14 प्रतिशत, 2019 के लोकसभा चुनावों में 55.37 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनावों में 58.71 प्रतिशत और 2024 के संसदीय चुनावों में 53.79 प्रतिशत रहा.
गुन्नौर विधानसभा सीट हिंदू-बहुसंख्यक है और इसका स्वरूप पूरी तरह से ग्रामीण है. यहां मुस्लिम आबादी कुल मतदाताओं का 11.70 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जातियों की आबादी 12.44 प्रतिशत है. यादव यहां का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूह हैं. अनुमान है कि वे कुल मतदाताओं का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं. अन्य महत्वपूर्ण समुदायों में कुशवाहा, ब्राह्मण, ठाकुर और वैश्य शामिल हैं. यहां के लगभग 90.74 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि केवल 9.26 प्रतिशत मतदाता गुन्नौर शहर के आसपास के शहरी इलाकों में रहते हैं. इस सामाजिक संरचना से समाजवादी पार्टी को स्वाभाविक लाभ मिलता है, क्योंकि यादव और मुस्लिम समुदाय पारंपरिक रूप से उसका समर्थन करते रहे हैं. भाजपा की सफलता काफी हद तक गैर-यादव OBC, सवर्ण जातियों और अनुसूचित जातियों के वोटों को एकजुट करने पर निर्भर करती है.
स्थानीय परंपरा के अनुसार, गुन्नौर की शुरुआत 'बहमनपुरी' नामक एक पुरानी बस्ती से हुई थी, जहां ब्राह्मण रहते थे. उन्हें मझौला के शासकों से बिना लगान वाली जमीनें मिली हुई थीं. माना जाता है कि 13वीं सदी में फारसी संत शेख ताहिर माजिद-उद-दीन, जिन्हें 'मखदूम साहब' के नाम से जाना जाता है, यहां आकर बस गए थे. स्थानीय लोक-कथाओं के अनुसार, एक चमत्कारिक घटना के बाद यह गांव उन्हें उपहार में दिया गया था, जिसके बाद इसका नाम गुन्नौर पड़ा. उनकी मजार आज भी आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है.
मुगल काल के दौरान, गुन्नौर संभल सरकार के अंतर्गत एक 'महल' का मुख्यालय था. ब्रिटिश शासन के समय, यह तत्कालीन बदायूं जिले की एक तहसील का मुख्यालय बना और धीरे-धीरे एक छोटे बाजार वाले शहर के रूप में विकसित हुआ, जो आसपास की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करता था. 2011 में प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव हुआ और गुन्नौर तहसील नए बने संभल जिले का हिस्सा बन गई.
कृषि यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है; इस निर्वाचन क्षेत्र में मुख्य रूप से गेहूं, धान, गन्ना, आलू और सरसों की खेती होती है. कृषि उत्पादों का व्यापार स्थानीय बाजारों को चलाता है, जबकि डेयरी फार्मिंग और छोटे व्यवसाय आय के अतिरिक्त स्रोत प्रदान करते हैं. गुन्नौर सड़क मार्ग से बदायूं, संभल, अलीगढ़ और पड़ोसी जिलों से जुड़ा हुआ है, जबकि पास का रेलवे नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों से कनेक्टिविटी प्रदान करता है. यह निर्वाचन क्षेत्र संभल से लगभग 45 km, बदायूं से लगभग 75 km, मुरादाबाद से लगभग 95 km, अलीगढ़ से लगभग 120 km, आगरा से लगभग 185 km, नोएडा से लगभग 195 km, दिल्ली से लगभग 215 km, लखनऊ से लगभग 360 km और कानपुर से 285 km दूर है.
पिछले तीन दशकों में ज्यादातर समय समाजवादी पार्टी गुन्नौर में प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है. इसने 1993 के बाद से छह विधानसभा चुनाव जीते हैं और 2009 के बाद से इस निर्वाचन क्षेत्र में हुए हर लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाई है. यादव वोटरों की बड़ी संख्या और उन्हें मिलने वाले मुस्लिम समर्थन ने पार्टी को एक मजबूत सामाजिक आधार दिया है, जिससे उसे बार-बार चुनावी सफलता मिली है.
फिर भी, बीजेपी समाजवादी पार्टी की मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी के तौर पर उभरी है. 2017 के विधानसभा चुनाव में उसकी जीत ने दिखाया कि यह निर्वाचन क्षेत्र पूरी तरह से उसकी पहुंच से बाहर नहीं है. पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की बढ़त को सिर्फ 9,628 वोटों तक सीमित करके अपनी बढ़ती मौजूदगी को और मजबूत किया, हालांकि 2024 में समाजवादी पार्टी ने इस अंतर को फिर से बढ़ा दिया.
ये दो चुनाव बताते हैं कि बीजेपी अनुकूल परिस्थितियों में मुकाबले को कड़ा बना सकती है और हाशिए पर जाने के बजाय मुकाबले में मजबूती से बनी रह सकती है.
हालांकि, चुनावी गणित अभी भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में है. बीजेपी की उम्मीदें गैर-यादव OBC, अनुसूचित जाति और सवर्ण वोटरों को एकजुट करने और साथ ही समाजवादी पार्टी के यादव-मुस्लिम वोट बैंक में बंटवारे की उम्मीद पर टिकी हैं. जब तक बड़े पैमाने पर ऐसा बदलाव नहीं होता, गुन्नौर के 2027 में भी समाजवादी पार्टी के खाते में ही रहने की संभावना है. फिर भी, बीजेपी की बढ़ती संगठनात्मक मौजूदगी यह पक्का करती है कि मुकाबला एकतरफा नहीं होगा, जिससे गुन्नौर विधानसभा चुनाव से पहले बारीकी से नजर रखने लायक निर्वाचन क्षेत्र बन जाता है.
(अजय झा)
Ajeet Kumar Urf Raju Yadav
BJP
Firoz
BSP
Nota
NOTA
Vijay Sharma
INC
Ramkhiladi
IND
Lakhvendra Urf Akhilesh Yadav
IND
Hari Singh
IND
Anil Kumar
ASPKR
Vijay Kumar
AAAP
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