धामपुर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक शहर है जहां अपना म्युनिसिपल बोर्ड है. यह धामपुर शुगर मिल्स के लिए मशहूर है, जिसने 1933 में रोजाना 300 टन गन्ना पेरने की शुरुआती क्षमता के साथ काम शुरू किया था और तब से यह देश की प्रमुख चीनी कंपनियों में से एक बन गई है.
धामपुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा सीट है और नगीना (SC) लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह सीट 1956 में बनी थी और यहां पहली बार 1957 में चुनाव हुए थे. 2008 में परिसीमन आयोग ने इसकी सीमाओं को फिर से तय किया था. अब इसमें धामपुर, शेरकोट और स्योहारा शहर, साथ ही धामपुर, शेरकोट और स्योहारा के कानूनगो सर्कल और धामपुर तहसील के गांव शामिल हैं.
धामपुर में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा, जिसने पांच बार जीत हासिल की. उनकी आखिरी जीत 1985 में हुई थी. हाल के वर्षों में, BJP पांच जीत के साथ सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीन बार जीत हासिल की है. भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेक्युलर) और बहुजन समाज पार्टी ने भी एक-एक बार यह सीट जीती है.
2012 में, समाजवादी पार्टी के ठाकुर मूल चंद चौहान ने BSP के मौजूदा विधायक अशोक कुमार राणा को 564 वोटों के बहुत कम अंतर से हराया था. अशोक कुमार राणा 2017 के चुनावों से पहले BJP में शामिल हो गए और ठाकुर मूल चंद चौहान को 17,486 वोटों से हराकर यह सीट जीती. राणा ने 2022 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नईम उल हसन को 203 वोटों के बहुत कम अंतर से हराकर BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. राणा को 81,791 वोट (39.89 प्रतिशत) मिले, जबकि हसन को 81,588 वोट (39.79 प्रतिशत) मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान धामपुर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के रुझान यहां के मतदाताओं के बदलते मूड और बदलती निष्ठा को दिखाते हैं. 2009 में, समाजवादी पार्टी ने BSP पर 19,147 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP आगे निकल गई और समाजवादी पार्टी से 20,917 वोटों से आगे रही. 2019 में BSP ने BJP पर 23,760 वोटों की साफ बढ़त हासिल की. 2024 में, नई बनी आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) इस इलाके में सबसे आगे रही और BJP से 16,838 वोटों की बढ़त बनाई. ASP(KR) के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को 90,518 वोट मिले, जबकि BJP के ओम कुमार को 73,680 वोट मिले.
धामपुर में वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 252,629 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग 63.80 प्रतिशत हुई थी. यह संख्या 2017 में बढ़कर 282,279 वोटर (वोटिंग 68.36 प्रतिशत), 2019 में 292,998 (वोटिंग 64.16 प्रतिशत), 2022 में 302,357 (वोटिंग 67.82 प्रतिशत) और 2024 में 305,437 (वोटिंग 59.99 प्रतिशत) हो गई.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, धामपुर हिंदू-बहुसंख्यक सीट है और यहां मुस्लिम आबादी भी काफी है. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 18.98 प्रतिशत है. यहाँ ग्रामीण और शहरी आबादी का संतुलित मिश्रण है. 55.49 प्रतिशत वोटर ग्रामीण हैं और 44.51 प्रतिशत शहरी वोटर हैं जो इस सीट के अंतर्गत आने वाले तीन कस्बों में रहते हैं.
धामपुर का संबंध प्राचीन इतिहास से है. मान्यता के अनुसार, महाभारत के विदुर महान युद्ध के बाद पास के ही एक इलाके में बस गए थे. 1805 में, पिंडारियों ने इस कस्बे को लूटा था. ये कुख्यात भाड़े के हमलावर थे जो 19वीं सदी की शुरुआत में मध्य और उत्तरी भारत में सक्रिय थे. 1933 में धामपुर शुगर मिल्स की स्थापना के साथ ही इस इलाके में आधुनिक औद्योगिक विकास की शुरुआत हुई.
यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गन्ने की खेती, चीनी उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों पर टिकी है. व्यापार, छोटे-मोटे कारोबार और खेती-बाड़ी यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं. गन्ने की कीमतें, सिंचाई, बिजली की सप्लाई और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दे अक्सर वोटरों की प्राथमिकताओं पर असर डालते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से, धामपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में बसा है. इस इलाके को नहरों से सिंचाई की सुविधा मिलती है और यह शिवालिक की पहाड़ियों के पास स्थित है.
यहां सड़क और रेल कनेक्टिविटी अच्छी है. धामपुर का अपना रेलवे स्टेशन है जो बड़े रूटों से जुड़ा हुआ है. नेशनल और स्टेट हाईवे इस शहर को आस-पास के इलाकों से जोड़ते हैं.
धामपुर, जिला मुख्यालय बिजनौर से लगभग 35-37 किलोमीटर दूर है. मुरादाबाद लगभग 55-65 किलोमीटर, हरिद्वार लगभग 70-80 किलोमीटर, देहरादून लगभग 120-130 किलोमीटर, मेरठ लगभग 90-100 किलोमीटर, सहारनपुर लगभग 90 किलोमीटर और दिल्ली लगभग 160-170 किलोमीटर दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 420 किलोमीटर दूर है.
जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) धामपुर में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को बदल पाएगी या नहीं. इस पार्टी से मिलने वाली चुनौती को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसमें अनुसूचित जाति के उस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता है जो पारंपरिक रूप से BSP का समर्थक रहा है और हाल के समय में BJP की ओर झुका है. इससे 2027 के विधानसभा चुनावों में धामपुर सीट के लिए एक कड़े और दिलचस्प मुकाबले की स्थिति बन रही है. यह मुकाबला कई पार्टियों के बीच होने की उम्मीद है और सभी प्रमुख पार्टियां अपनी जीत की संभावना देख रही हैं. नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि उम्मीदवार कितनी असरदार कहानी के जरिए वोटरों से जुड़ पाते हैं और विकास को तेज करने तथा लोगों की उम्मीदों को पूरा करने का कितना अच्छा वादा करते हैं.
(अजय झा)
Naim Ul Hasan
SP
Thakur Moolchand Chauhan
BSP
Nota
NOTA
Hussain Ahmad
INC
Vivek Kumar
ASPKR
Meetan
PHSP
Arun Kumar Gahlot
AAAP
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने अपना रुख साफ किया है. इटावा के सैफई में मतदान के बाद उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों को पता है कि कितनी सीटों पर बंटवारा होना है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा. हालांकि, अखिलेश ने सीटों की संख्या का खुलासा नहीं किया.
पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
इटावा में अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर सवालों का जवाब दिया. इस दौरान सपा नेता राजकुमार भाटी पर कार्रवाई और आजम खान से जुड़े मुद्दों पर भी उनसे सवाल पूछे गए.
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. अगले एक हफ्ते के भीतर बीजेपी के तीन सबसे शीर्ष नेता उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहने वाले हैं. इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे से होगी, जहां वे 25 अक्टूबर को एक एयर शो में शामिल होने के साथ पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरणों को साधेंगे.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 11 महीने बाद रामपुर जेल में बंद वरिष्ठ नेता आजम खान से करीब 45 मिनट तक मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक आजम खान ने अखिलेश यादव को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने पसंदीदा उम्मीदवारों की एक सूची सौंपी है. वह अपने समर्थकों और मददगारों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं.
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